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Bageshwar News: वन्यजीव के हमले में ही हुई थी देवकी की मौत, तीन दिन बाद हुआ खुलासा
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बागेश्वर। मनकोट गांव की बुजुर्ग महिला की मौत को लेकर बने रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद वन विभाग ने पुष्टि की है कि महिला की मौत वन्यजीव के हमले के कारण ही हुई थी। इस खुलासे के बाद वन विभाग ने पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा राशि देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
बीते बुधवार की रात मनकोट के कंपास तोक निवासी देवकी देवी (60) का शव घर से करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। उनके सिर और पैर पर गंभीर चोट के निशान थे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्राथमिक जांच में वन्यजीव के हमले की आशंका जताई थी लेकिन डीएफओ की ओर से आधिकारिक पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था। अब तीन दिन बाद रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर यह साफ हो गया है कि उन पर पीछे से किसी जंगली जानवर ने हमला किया था। डीएफओ आदित्य रत्न ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वन्यजीव के हमले की पुष्टि होने के बाद पीड़ित परिवार को इसकी सूचना दे दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिजनों की ओर से आवश्यक शपथ पत्र प्राप्त होते ही विभाग की ओर से 10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान कर दी जाएगी।
......कोट
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के सिर पर वन्यजीव के हमले की पुष्टि हुई है। परिजनों को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है। शपथ पत्र प्राप्त होते ही पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पिंजरे और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। -आदित्य रत्न, डीएफओ, बागेश्वर
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए बिछाया जाल
मनकोट क्षेत्र में बुजुर्ग की मौत की पुष्टि वन्यजीव के हमले से होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। भले ही मौत के कारणों का खुलासा हो गया हो लेकिन सुरक्षा को लेकर ग्रामीण अब भी आशंकित हैं। शाम ढलते ही सन्नाटा पसर रहा है और लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है। छाती और मनकोट क्षेत्र में दो पिंजरे लगा दिए हैं। इसके अलावा, तेंदुए की आवाजाही पर नजर रखने के लिए 10 ट्रैप कैमरे और दो एनाइडर स्थापित किए गए हैं। विभाग की विशेष टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं। रेंजर केवलानंद पांडेय ने बताया कि अब तक ट्रैप कैमरों में तेंदुए की कोई हलचल रिकॉर्ड नहीं हुई है लेकिन निगरानी 24 घंटे जारी है। विभाग ने ग्राम प्रधानों को ब्रश कटर मशीन उपलब्ध कराई है। विभाग की टीम ग्रामीणों के बीच जाकर उन्हें जागरूक कर रही है और अकेले अंधेरे में बाहर न निकलने जैसे सुरक्षा उपाय बता रही है।
जिस जंगल को नंगे पांव नापकर उम्र गुजारी, उसी में थम गया देवकी के जीवन का सफर
बागेश्वर। पहाड़ की नारी और वनों का रिश्ता अटूट होता है, लेकिन मनकोट की देवकी देवी के लिए यह रिश्ता उनके जीवन की अंतिम सांस तक बना रहा। 60 वर्ष की उम्र में भी अपनी और बहू की मेहनत से बने घास के ढेरों को जंगल की आग से बचाने का प्रयास करते हुए वन्य जीव के हमले का शिकार हो गईं। जिस जंगल की पगडंडियों को उन्होंने उम्र भर नंगे पांव दुलारा, वही जंगल उनके लिए काल बन गया।
छाती निवासी हेम पांडेय (36) बताते हैं कि आमा के लिए 10 किमी दूर बागेश्वर बाजार जाना कोई बड़ी बात नहीं थी। वे अक्सर पैदल ही जंगल के रास्तों से यह दूरी तय कर लेती थीं। चप्पल-जूतों से उनका कभी वास्ता नहीं रहा। वह झटपट से बाजार से जरूरी सामान लेकर जंगल के रास्तों से पैदल घर पहुंच जाती थी। पहाड़ की पथरीली जमीन से उनका सीधा और गहरा रिश्ता था।
दयाल आया कि नहीं
पांडेय के अनुसार देवकी देवी के दोनों बेटे मिस्त्री का काम करते हैं और बेहद कर्मठ हैं। देवकी का हृदय पूरी तरह अपनी ममता में सिमटा था। शाम होते ही वे अक्सर अपने घर के समीप होटल के पास पहुंचकर पूछती थीं कि उनका बेटा दयाल आया या नहीं। बेटों की सुरक्षा को लेकर उनकी यह चिंता अब केवल यादों में शेष है। घटना वाले दिन वे हर ग्रामीण से बहुत आत्मीयता से मिलीं, जैसे जंगल की ओर अपने इस आखिरी सफर का उन्हें पूर्वाभास हो गया हो। बीते तीन दिनों से पूरा मनकोट और छाती गांव गमगीन है। एक ऐसी मां और संघर्षशील महिला जिसने वनों की रक्षा और अपने परिवार के लिए जीवन समर्पित कर दिया, आज उसी प्रकृति की गोद में सदा के लिए सो गई।
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बीते बुधवार की रात मनकोट के कंपास तोक निवासी देवकी देवी (60) का शव घर से करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। उनके सिर और पैर पर गंभीर चोट के निशान थे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्राथमिक जांच में वन्यजीव के हमले की आशंका जताई थी लेकिन डीएफओ की ओर से आधिकारिक पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था। अब तीन दिन बाद रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर यह साफ हो गया है कि उन पर पीछे से किसी जंगली जानवर ने हमला किया था। डीएफओ आदित्य रत्न ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वन्यजीव के हमले की पुष्टि होने के बाद पीड़ित परिवार को इसकी सूचना दे दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिजनों की ओर से आवश्यक शपथ पत्र प्राप्त होते ही विभाग की ओर से 10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान कर दी जाएगी।
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......कोट
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के सिर पर वन्यजीव के हमले की पुष्टि हुई है। परिजनों को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है। शपथ पत्र प्राप्त होते ही पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पिंजरे और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। -आदित्य रत्न, डीएफओ, बागेश्वर
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए बिछाया जाल
मनकोट क्षेत्र में बुजुर्ग की मौत की पुष्टि वन्यजीव के हमले से होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। भले ही मौत के कारणों का खुलासा हो गया हो लेकिन सुरक्षा को लेकर ग्रामीण अब भी आशंकित हैं। शाम ढलते ही सन्नाटा पसर रहा है और लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है। छाती और मनकोट क्षेत्र में दो पिंजरे लगा दिए हैं। इसके अलावा, तेंदुए की आवाजाही पर नजर रखने के लिए 10 ट्रैप कैमरे और दो एनाइडर स्थापित किए गए हैं। विभाग की विशेष टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं। रेंजर केवलानंद पांडेय ने बताया कि अब तक ट्रैप कैमरों में तेंदुए की कोई हलचल रिकॉर्ड नहीं हुई है लेकिन निगरानी 24 घंटे जारी है। विभाग ने ग्राम प्रधानों को ब्रश कटर मशीन उपलब्ध कराई है। विभाग की टीम ग्रामीणों के बीच जाकर उन्हें जागरूक कर रही है और अकेले अंधेरे में बाहर न निकलने जैसे सुरक्षा उपाय बता रही है।
जिस जंगल को नंगे पांव नापकर उम्र गुजारी, उसी में थम गया देवकी के जीवन का सफर
बागेश्वर। पहाड़ की नारी और वनों का रिश्ता अटूट होता है, लेकिन मनकोट की देवकी देवी के लिए यह रिश्ता उनके जीवन की अंतिम सांस तक बना रहा। 60 वर्ष की उम्र में भी अपनी और बहू की मेहनत से बने घास के ढेरों को जंगल की आग से बचाने का प्रयास करते हुए वन्य जीव के हमले का शिकार हो गईं। जिस जंगल की पगडंडियों को उन्होंने उम्र भर नंगे पांव दुलारा, वही जंगल उनके लिए काल बन गया।
छाती निवासी हेम पांडेय (36) बताते हैं कि आमा के लिए 10 किमी दूर बागेश्वर बाजार जाना कोई बड़ी बात नहीं थी। वे अक्सर पैदल ही जंगल के रास्तों से यह दूरी तय कर लेती थीं। चप्पल-जूतों से उनका कभी वास्ता नहीं रहा। वह झटपट से बाजार से जरूरी सामान लेकर जंगल के रास्तों से पैदल घर पहुंच जाती थी। पहाड़ की पथरीली जमीन से उनका सीधा और गहरा रिश्ता था।
दयाल आया कि नहीं
पांडेय के अनुसार देवकी देवी के दोनों बेटे मिस्त्री का काम करते हैं और बेहद कर्मठ हैं। देवकी का हृदय पूरी तरह अपनी ममता में सिमटा था। शाम होते ही वे अक्सर अपने घर के समीप होटल के पास पहुंचकर पूछती थीं कि उनका बेटा दयाल आया या नहीं। बेटों की सुरक्षा को लेकर उनकी यह चिंता अब केवल यादों में शेष है। घटना वाले दिन वे हर ग्रामीण से बहुत आत्मीयता से मिलीं, जैसे जंगल की ओर अपने इस आखिरी सफर का उन्हें पूर्वाभास हो गया हो। बीते तीन दिनों से पूरा मनकोट और छाती गांव गमगीन है। एक ऐसी मां और संघर्षशील महिला जिसने वनों की रक्षा और अपने परिवार के लिए जीवन समर्पित कर दिया, आज उसी प्रकृति की गोद में सदा के लिए सो गई।