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Bageshwar News: फायर सीजन के बाद भी धधक रहे जंगल, जौलकांडे में वनाग्नि से भारी नुकसान
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बागेश्वर। जिले में सरकारी तौर पर फायर सीजन समाप्त होने के बाद भी वनों के जलने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। बीते दिनों हुई बारिश के बाद मौसम साफ होते ही तापमान में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे जंगल दोबारा सुलगने लगे हैं। वनाग्नि की इन ताजा घटनाओं से बहुमूल्य वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
उत्तराखंड में 15 फरवरी से 15 जून तक की अवधि को वनाग्नि काल (फायर सीजन) माना जाता है जिसके बाद मानसून के आगमन की उम्मीद रहती है। हालांकि, बागेश्वर जिले में मानसूनी बारिश अमूमन जुलाई के दूसरे सप्ताह से रफ्तार पकड़ती है। ऐसे में जून के उत्तरार्ध और जुलाई की शुरुआत तक जंगलों में आग लगने की आशंका लगातार बनी रहती है।
शनिवार को जिला मुख्यालय के बिल्कुल पास स्थित जौलकांडे के जंगलों में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। सुबह से लेकर दोपहर बाद तक आसमान में धुएं का भारी गुबार उठता रहा जिससे जिला मुख्यालय के अधिकांश हिस्सों में धुंध छा गई।
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इस वनाग्नि में बेशकीमती वनस्पति, मवेशियों के लिए चारा-पत्ती और कई कीमती इमारती लकड़ियां जलकर नष्ट हो गईं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस साल फायर सीजन के दौरान बीच-बीच में हुई बारिश से जंगलों को काफी राहत मिली थी लेकिन अब गर्मी बढ़ते ही हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं।
कोट
- जंगल में नमी होने के कारण धुआं अधिक मात्रा में उठता हुआ दिखाई दे रहा था। वनाग्नि से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। आग की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मुस्तैदी से इसे काबू में कर लिया था। - श्याम सिंह करायत, रेंजर, बागेश्वर वन प्रभाग
उत्तराखंड में 15 फरवरी से 15 जून तक की अवधि को वनाग्नि काल (फायर सीजन) माना जाता है जिसके बाद मानसून के आगमन की उम्मीद रहती है। हालांकि, बागेश्वर जिले में मानसूनी बारिश अमूमन जुलाई के दूसरे सप्ताह से रफ्तार पकड़ती है। ऐसे में जून के उत्तरार्ध और जुलाई की शुरुआत तक जंगलों में आग लगने की आशंका लगातार बनी रहती है।
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शनिवार को जिला मुख्यालय के बिल्कुल पास स्थित जौलकांडे के जंगलों में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। सुबह से लेकर दोपहर बाद तक आसमान में धुएं का भारी गुबार उठता रहा जिससे जिला मुख्यालय के अधिकांश हिस्सों में धुंध छा गई।
इस वनाग्नि में बेशकीमती वनस्पति, मवेशियों के लिए चारा-पत्ती और कई कीमती इमारती लकड़ियां जलकर नष्ट हो गईं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस साल फायर सीजन के दौरान बीच-बीच में हुई बारिश से जंगलों को काफी राहत मिली थी लेकिन अब गर्मी बढ़ते ही हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं।
कोट
- जंगल में नमी होने के कारण धुआं अधिक मात्रा में उठता हुआ दिखाई दे रहा था। वनाग्नि से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। आग की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मुस्तैदी से इसे काबू में कर लिया था। - श्याम सिंह करायत, रेंजर, बागेश्वर वन प्रभाग