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Bageshwar News: आदेश... अवैध दावे और झूठे साक्ष्यों पर नहीं मिलता मालिकाना हक

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 11:10 PM IST
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Order... Ownership rights are not granted on the basis of illegal claims and false evidence.
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बागेश्वर। सिविल जज (जूनियर डिविजन) शिवानी नाहर की अदालत ने पैतृक भूमि पर अवैध कब्जा और स्थायी व्यादेश पर दायर एक सिविल वाद को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वादी विवादित भूमि पर न तो अपना मालिकाना हक साबित कर पाया और न ही उसका वहां कोई कब्जा था।

मामला काफलीगैर तहसील के पगना गांव के खोला तोक का है। वादी देवकी नंदन पांडेय ने प्रतिवादी प्रशांत कुमार पांडेय और त्रिलोक चंद्र के खिलाफ दायर वाद में दावा किया कि खतौनी खाता संख्या 00003 के पैमाइश नंबर 937 और पैमाइश नंबर 963 उसकी पैतृक भूमि है। यह पारिवारिक बंटवारे के बाद से उसके कब्जे में है। प्रतिवादीगण बलपूर्वक उसकी भूमि में घुसकर आम के पेड़ से फल तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और उसे बेदखल करने की धमकी दे रहे हैं।
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सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने कोर्ट के समक्ष वास्तविक तथ्य रखे। प्रतिवादी प्रशांत पांडेय ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1995 में हुए सरकारी बंटवारे के तहत उनके पिता स्व. मथुरा दत्त पांडेय को आवंटित हुई थी और तब से उनका परिवार इस पर कृषि कार्य कर रहा है।
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प्रतिपरीक्षा के दौरान वादी अपने ही जाल में उलझ गया। उसने स्वीकार किया कि उसने पारिवारिक बंटवारे का कोई दस्तावेज साक्ष्य पेश नहीं किया है। उसने यह भी माना कि कोर्ट में केस दाखिल करने के बाद उसने विवादित खेत पर जेसीबी मशीन लगवाई थी जिसे एसडीएम के आदेश पर प्रतिवादी की शिकायत के बाद हटाना पड़ा था।
राजस्व उपनिरीक्षक नेहा चंद की गवाही और रिपोर्ट से भी यह साफ हुआ कि उक्त भूमि पर प्रतिवादी का नाम दर्ज है। दोनों पक्षों के मौखिक और दस्तावेज साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद सिविल जज शिवानी नाहर ने माना कि वादी विवादित भूमि पर अपना स्वामित्व और कब्जा साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। अदालत ने वादी के वाद को आधारहीन पाते हुए उसे खारिज कर दिया और आदेश दिया कि सभी पक्षकार प्राथमिकी का खर्च स्वयं वहन करेंगे।
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