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Bageshwar News: पांच बाखलियों की पहचान वाले पचार में पड़ने लगे पलायन के ताले
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बागेश्वर। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और पांच बाखलियों के रूप में पहचाने जाना वाला पचार गांव समुचित विकास नहीं होने से पलायन की मार झेल रहा है। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसी सुविधाओं की तलाश में लोग गांव छोड़ते गए। जिस गांव के लोगों ने पुलिस महानिरीक्षक और कुलपति जैसे उच्च पद हासिल किए उस गांव की आधी आबादी पलायन कर गई है।
दुगनाकुरी तहसील क्षेत्र का पचार गांव मोटर मार्ग से सटा हुआ है। इसी गांव में भगवान नौलिंग देवता का पुरातन मंदिर स्थित है। बांज और चीड़ की मिश्रित जैव विविधिता वाले गांव में करीब चार दशक पहले तक 120 परिवार रहा करते थे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की तलाश में युवा पीढ़ी गांव छोड़कर नगरों की ओर प्रस्थान कर गई। गांव से निकलकर लोगों ने खूब नाम कमाया और नगरों में ही बसकर रह गए। प्रवासी बन चुके ग्रामीण अब कभी-कभार गांव आते हैं। वर्तमान में गांव में करीब 62 परिवार निवास करते हैं।
कभी गूंजते थे ठहाके, अब बढ़ रहा सन्नाटा
पचार की पांचों बाखली गांव के अलग-अलग क्षेत्र में स्थित हैं। इन बाखलियों में सात-आठ परिवार एक साथ रहा करते थे। एक बाखली की शुरूआत में बना चबूतरे में गांव के बड़े-बुजुर्गों की चौपाल लगा करती थी। अब इन बाखलियों में इक्का-दुक्का परिवार ही रहते हैं। शोरगुल और रौनक की पर्याय रही इन बाखलियों में अब कभी-कभार ही चहल-पहल दिखती है।
यजमानी नहीं होती तो हालात और बिगड़ते
पचार गांव में रहने वाले आधे से अधिक परिवार कर्मकांड, भागवत कथा से आजीविका कमाते हैं। इनका कार्यक्षेत्र भी आसपास ही होने के कारण यजमानी में जाना सुगम होता है। वर्तमान में भी 25 से अधिक घरों में किसी न किसी रूप में पंडिताई करने वाले मौजूद हैं। ग्रामीण मानते हैं कि अगर कर्मकांडी पंडित नहीं होते तो पलायन करने वालों की संख्या कहीं अधिक होती।
कोट
बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। शहर जाकर वहां के माहौल में रचबस चुके अधिकांश लोग फिर गांव नहीं लौटना नहीं चाहते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की तलाश में दशकों पहले जो पलायन की दौड़ शुरू हुई थी वह आज भी जारी है।
रमेश चंद्र पांडेय, ग्रामीण
कोट
लोगों में शहरों की तरफ जाने की होड़ लगी है। जंगली जानवरों से बर्बाद होती फसल, मूलभूत सुविधाओं की कमी गांव खाली होने का प्रमुख कारण बन रही हैं। गांवों को खाली होने से बचाने के लिए गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
नवीन चंद्र पांडेय, ग्रामीण
गांव से पलायन बढ़ रहा है लेकिन इसे कम करने के लिए हमें ही पहल करनी होगी। रोजगार की तलाश में गांव छोड़ गए लोगों को सेवानिवृत होने पर गांव लौटना चाहिए। गांव में रहकर शासन-प्रशासन पर सुविधाओं के लिए दबाव बनाया जा सकता है। गांव ही खाली हो गया तो कौन सुध लेने आएगा।
भुवन चंद्र पांडेय, ग्रामीण
दुगनाकुरी तहसील क्षेत्र का पचार गांव मोटर मार्ग से सटा हुआ है। इसी गांव में भगवान नौलिंग देवता का पुरातन मंदिर स्थित है। बांज और चीड़ की मिश्रित जैव विविधिता वाले गांव में करीब चार दशक पहले तक 120 परिवार रहा करते थे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की तलाश में युवा पीढ़ी गांव छोड़कर नगरों की ओर प्रस्थान कर गई। गांव से निकलकर लोगों ने खूब नाम कमाया और नगरों में ही बसकर रह गए। प्रवासी बन चुके ग्रामीण अब कभी-कभार गांव आते हैं। वर्तमान में गांव में करीब 62 परिवार निवास करते हैं।
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कभी गूंजते थे ठहाके, अब बढ़ रहा सन्नाटा
पचार की पांचों बाखली गांव के अलग-अलग क्षेत्र में स्थित हैं। इन बाखलियों में सात-आठ परिवार एक साथ रहा करते थे। एक बाखली की शुरूआत में बना चबूतरे में गांव के बड़े-बुजुर्गों की चौपाल लगा करती थी। अब इन बाखलियों में इक्का-दुक्का परिवार ही रहते हैं। शोरगुल और रौनक की पर्याय रही इन बाखलियों में अब कभी-कभार ही चहल-पहल दिखती है।
यजमानी नहीं होती तो हालात और बिगड़ते
पचार गांव में रहने वाले आधे से अधिक परिवार कर्मकांड, भागवत कथा से आजीविका कमाते हैं। इनका कार्यक्षेत्र भी आसपास ही होने के कारण यजमानी में जाना सुगम होता है। वर्तमान में भी 25 से अधिक घरों में किसी न किसी रूप में पंडिताई करने वाले मौजूद हैं। ग्रामीण मानते हैं कि अगर कर्मकांडी पंडित नहीं होते तो पलायन करने वालों की संख्या कहीं अधिक होती।
कोट
बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। शहर जाकर वहां के माहौल में रचबस चुके अधिकांश लोग फिर गांव नहीं लौटना नहीं चाहते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की तलाश में दशकों पहले जो पलायन की दौड़ शुरू हुई थी वह आज भी जारी है।
रमेश चंद्र पांडेय, ग्रामीण
कोट
लोगों में शहरों की तरफ जाने की होड़ लगी है। जंगली जानवरों से बर्बाद होती फसल, मूलभूत सुविधाओं की कमी गांव खाली होने का प्रमुख कारण बन रही हैं। गांवों को खाली होने से बचाने के लिए गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
नवीन चंद्र पांडेय, ग्रामीण
गांव से पलायन बढ़ रहा है लेकिन इसे कम करने के लिए हमें ही पहल करनी होगी। रोजगार की तलाश में गांव छोड़ गए लोगों को सेवानिवृत होने पर गांव लौटना चाहिए। गांव में रहकर शासन-प्रशासन पर सुविधाओं के लिए दबाव बनाया जा सकता है। गांव ही खाली हो गया तो कौन सुध लेने आएगा।
भुवन चंद्र पांडेय, ग्रामीण