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बागेश्वर: बिना वैध वीजा रह रहे यूक्रेनी नागरिक को दो साल कैद, सजा के बाद स्वदेश भेजने के निर्देश

Mon, 26 Oct 2026 02:14 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर Published by: Heera Updated Mon, 26 Oct 2026 02:14 PM IST
सार

बागेश्वर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार तिवारी की अदालत ने बिना वैध वीजा के रह रहे यूक्रेनी नागरिक को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा और दो लाख रुपये का अर्थदंड सुनाया। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 

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Ukrainian citizen jailed for two years for staying without a valid visa in bageshwar
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

बागेश्वर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे यूक्रेन के नागरिक मेक्सिम स्टार चेंको को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास और दो लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सजा पूरी होने के बाद उसे नियमानुसार उसके देश वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।

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पुलिस के अनुसार बीते 24 मई 2026 को थाना कपकोट को सूचना मिली थी कि ग्राम डौला में एक विदेशी पर्यटक घायल अवस्था में है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट में भर्ती कराया, जहां से बेहतर उपचार के लिए उसे जिला चिकित्सालय बागेश्वर रेफर किया गया था। उपचार के बाद 26 मई 2026 को जब पुलिस ने उससे पूछताछ की और पासपोर्ट-वीजा मांगा, तो वह कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। पूछताछ में उसने अपना नाम मेक्सिम स्टार चेंको, निवासी खार्किव, यूक्रेन बताया। उसने बताया कि वह ट्रैकिंग के दौरान रास्ता भटक गया था और पहाड़ी से गिरने से घायल हो गया था। जांच के दौरान स्थानीय एलआईयू से पता चला कि उसके नाम का कोई फार्म-सी जिले में जमा नहीं है। इसके बाद पुलिस ने उसे आप्रवास और विदेशियों विषयक अधिनियम के तहत हिरासत में ले लिया था। विचारण के दौरान बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि आरोपी के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्च आयुक्त का रिफ्यूजी कार्ड था, जिसके आधार पर वह उत्तरकाशी के पायलट बाबा आश्रम और अन्य जगहों पर रह रहा था।
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अदालत ने पत्रावली के अवलोकन और साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया कि भारत यूएनएचआरसीआर का हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र नहीं है, इसलिए यूएनएचआरसीआर से जारी रिफ्यूजी कार्ड भारत में रहने के वैध वीजा का स्थान नहीं ले सकता है। आरोपी का टूरिस्ट वीजा 16 अप्रैल 2025 को ही समाप्त हो चुका था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार तिवारी की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को आप्रवास और विदेशियों विषयक अधिनियम, 2025 की धाराओं के तहत दोषी पाया।
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आदेश में कहा कि चूंकि आरोपी ने विचारण के दौरान चार माह 28 दिन की अवधि कारागार में बिता ली है, इसलिए उसे इस अवधि का लाभ दिया जाएगा। सजा पूरी होने के बाद संबंधित प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि दोषी को उसके देश यूक्रेन भेज दिया जाए।

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