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बदरीनाथ हाईवे : कमेड़ा में करोड़ों के सुरक्षा कार्य धंसे
Wed, 19 Aug 2026 07:02 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 19 Aug 2026 07:02 PM IST
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गौचर के पास 12 करोड़ की लागत से किया गया था निर्माण
पानी के रिसाव को बताया गया वजह, यातायात वन-वे किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
गौचर। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर गौचर के समीप स्थित कमेड़ा भूस्खलन जोन में हाल ही में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सुरक्षा एवं स्लोप प्रोटेक्शन कार्य धंस गए हैं। निर्माण कार्य पूरा होते ही हाईवे के नीचे की सुरक्षा दीवार ढहने और सड़क का ढांचा प्रभावित होने पर प्रशासन ने एहतियातन कुछ समय के लिए यातायात वन-वे कर दिया है। ऐसे में यहां यात्रियों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
यहां वर्ष 2013 की भीषण आपदा में अलकनंदा के कटाव से सड़क का बड़ा हिस्सा 500 मीटर गहराई में समा गया था। इस नासूर के स्थायी समाधान के लिए बीते वर्ष भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी को नदी तट से हाईवे तक सुरक्षा दीवार और स्लोप प्रोटेक्शन का जिम्मा दिया गया था। मगर यह काम करीब डेढ़ माह भी नहीं टिक पाया। वहीं भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर उस्मान अली का कहना है कि पहाड़ी पर डेढ़ किमी ऊपर से मंदिर के नीचे तक जमीन के 15-20 मीटर अंदर भारी पानी का रिसाव हो रहा है। इसी भूमिगत इरोजन (क्षरण) के कारण करीब 20 मीटर क्षेत्र में निर्माण क्षतिग्रस्त हुआ है। जल्द इंजीनियरिंग एक्सपर्ट्स को बुलाकर नए सिरे से सर्वेक्षण कराया जाएगा। दूसरी ओर निर्माण ध्वस्त होने पर गौचर, कांग्रेस प्रदेश सचिव मुकेश नेगी व नगर अध्यक्ष जगदीश कनवासी, ग्राम प्रधान कमेड़ा भागवत प्रसाद मैठाणी, व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल, सामाजिक कार्यकर्ता बीरेंद्र सिंह राणा, वार्ड सभासद बंदना राणा, गौरव कपूर, जनकल्याण लोक सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील पंवार आदि ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
रामपुर के पास भू-धंसाव का दायरा बढ़ा
फाटा। केदारघाटी में हो रही लगातार बारिश के कारण रामपुर के समीप स्थित हो रहे भूधंसाव का दायरा बढ़ गया है। स्थिति यह है कि सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने के बाद अब सड़क का भू-भाग भी धंसने से यहां आवाजाही जोखिमभरी हो गई है। मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और केदारनाथ व त्रियुगीनारायण जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रामपुर के समीप करीब 60 मीटर मार्ग पिछले कई वर्षों से भू-धंसाव की चपेट में है। इसी वर्ष करीब 50 लाख रुपये की लागत से यहां सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया गया था लेकिन बारिश के दौरान यह कई बार धंस चुकी है। अब यहां भू-धंसाव का दायरा बढ़ गया है। स्थानीय अर्जुन सिंह ने कहा कि हर वर्ष अस्थायी कार्यों पर धन खर्च किया जा रहा है लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने शीघ्र ठोस कार्ययोजना बनाकर इस क्षेत्र का स्थायी उपचार करने की मांग की। इधर, राष्ट्रीय राजमार्ग के सहायक अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि संबंधित ठेकेदार की ओर से यहां निर्माण कार्य जारी है। जल्द स्थायी समाधान के प्रयास किए जाएंगे। संवाद
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सड़क बंद, पीठ पर राशन, पैदल चलकर ला रहे लोग सामान
या
सड़कें हुईं बंद, पीठ पर ढोकर ला रहे सिलिंडर और राशन
ब्रह्मसैंण के पास 15 अगस्त से बंद है सड़क, 17 हजार की आबादी है प्रभावित
चार किमी पैदल चलकर गोपेश्वर पहुंच रहे लोग, बच्चों को भी पैदल स्कूल जाने की मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी-
गोपेश्वर। 15 अगस्त से गोपेश्वर-घिंघराण सड़क ब्रह्मसैंण के पास बंद होने से घिंघराण क्षेत्र की करीब 17 हजार की आबादी प्रभावित है। सड़क बंद होने से जहां स्कूली बच्चों को पुलिस की सुरक्षा में पैदल आवाजाही कर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है वहीं क्षेत्र में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी ठप हो गई है। कई गांवों में रसोई गैस की किल्लत शुरू हो गई है और दुकानों में भी राशन के साथ अन्य सामान भी धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। ऐसे में लोगों को सिलिंडर और जरूरी सामान पीठ पर लादकर लाना पड़ रहा है।
घिंघराण क्षेत्र की ग्राम पंचायत कौंज पोथनी, काणा, खंडरा, कुजौं मेकोट, डुंगरी, स्वींग बिजराकोट, खोड़ मलाना, नैल, कुड़ाव, घिंघराण, देवर-खडोरा, रौली, ग्वाड़, ऑफिसर कॉलोनी और बेलीधार के ग्रामीण सड़क बंद होने से परेशान हैं। देवर गांव के पपेंद्र रावत और हरेंद्र राणा ने बताया कि सड़क बंद होने के कारण रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। लोगों को करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर गोपेश्वर पहुंचना पड़ रहा है। जरूरी सिलिंडर और राशन समेत अन्य सामान भी ग्रामीण पीठ पर लादकर लाने के लिए मजबूर हैं। देवर गांव की दीपा देवी ने बताया कि स्कूली बच्चे रोज सुबह पैदल आवाजाही कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। वहीं क्षेत्र की दुकानों में भी आवश्यक सामान धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य योगेंद्र सेमवाल ने लोनिवि से सड़क किनारे ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने की मांग की है ताकि भविष्य में सड़क बार-बार बाधित न हो। इधर लोनिवि के अधिशासी अभियंता तनुज कांबोज ने बताया कि तात्कालिक रूप से आवाजाही शुरू कराने के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से में क्रेस्टवॉल का निर्माण कराया जा रहा है। मौसम ने साथ दिया तो दस दिनों में सड़क को हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु कर लिया जाएगा।
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चेकडैम, क्रेटवाल व जलकुंड हुए क्षतिग्रस्त
पोखरी (चमोली)। बीते दिनों हुई बारिश से खाल-बजेठा नाले में बनाया गया जल कुंड क्रेटवाल व चेकडैम क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नाले में भारी मात्रा में पानी आने से जलकुंड का एक हिस्सा धंस गया है। अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग की पोखरी रेंज की ओर से यह कार्य करवाए गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि इसी साल यह निर्माण कार्य किए गए थे लेकिन पहली बरसात में टूट गए हैं। ग्राम प्रधान सूरज लाल, सत्येंद्र नेगी, महावीर बासकंडी सहित अन्य ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त जलकुंड व अन्य कार्यों के पुनर्निर्माण की मांग की है। अलकनंदा भूमि संरक्षण के वनक्षेत्राधिकारी बीएल शाह ने बताया कि मौके पर जाकर नुकसान का आकलन किया गया। इसकी रिपोर्ट उच्चधिकारियों को भेज दी गई है। संवाद
24 घंटे बाद खुली नंदप्रयाग-नंदानगर सड़क
नंदानगर। नंदप्रयाग-नंदानगर (19 किमी) सड़क पर बुधवार को 24 घंटे बाद वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है। सड़क खुलने पर लोगों ने राहत की सांस ली है।
बीते मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे थिरपाक-छिड़िया के बीच भारी चट्टान टूटने से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई थी। लोनिवि कर्णप्रयाग की ओर से जेसीबी मशीन लगाकर मार्ग खोलने के प्रयास किए गए, लेकिन मलबा अधिक होने के चलते इसमें काफी समय लग गया। बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि नंदानगर सड़क पर वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है। सड़क पर आए मलबे को पूरी तरह से हटा लिया गया है।
चमोली जिले में 19 सड़कें अवरुद्ध
गोपेश्वर। चमोली जिले में भारी बारिश से 19 सड़कें अवरुद्ध हैं। जिससे लोगों को वाहनों की आवाजाही के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रुक-रुककर हो रही बारिश से सड़कों को खोलने का काम भी प्रभावित हो रहा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि सड़कों को खोलने के लिए पर्याप्त मशीनें लगाई गई हैं। सड़कों को जल्द वाहनों की आवाजाही के लिए खोल लिया जाएगा। संवाद
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गौचर के पास 12 करोड़ की लागत से किया गया था निर्माण
पानी के रिसाव को बताया गया वजह, यातायात वन-वे किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
गौचर। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर गौचर के समीप स्थित कमेड़ा भूस्खलन जोन में हाल ही में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सुरक्षा एवं स्लोप प्रोटेक्शन कार्य धंस गए हैं। निर्माण कार्य पूरा होते ही हाईवे के नीचे की सुरक्षा दीवार ढहने और सड़क का ढांचा प्रभावित होने पर प्रशासन ने एहतियातन कुछ समय के लिए यातायात वन-वे कर दिया है। ऐसे में यहां यात्रियों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
यहां वर्ष 2013 की भीषण आपदा में अलकनंदा के कटाव से सड़क का बड़ा हिस्सा 500 मीटर गहराई में समा गया था। इस नासूर के स्थायी समाधान के लिए बीते वर्ष भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी को नदी तट से हाईवे तक सुरक्षा दीवार और स्लोप प्रोटेक्शन का जिम्मा दिया गया था। मगर यह काम करीब डेढ़ माह भी नहीं टिक पाया। वहीं भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर उस्मान अली का कहना है कि पहाड़ी पर डेढ़ किमी ऊपर से मंदिर के नीचे तक जमीन के 15-20 मीटर अंदर भारी पानी का रिसाव हो रहा है। इसी भूमिगत इरोजन (क्षरण) के कारण करीब 20 मीटर क्षेत्र में निर्माण क्षतिग्रस्त हुआ है। जल्द इंजीनियरिंग एक्सपर्ट्स को बुलाकर नए सिरे से सर्वेक्षण कराया जाएगा। दूसरी ओर निर्माण ध्वस्त होने पर गौचर, कांग्रेस प्रदेश सचिव मुकेश नेगी व नगर अध्यक्ष जगदीश कनवासी, ग्राम प्रधान कमेड़ा भागवत प्रसाद मैठाणी, व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल, सामाजिक कार्यकर्ता बीरेंद्र सिंह राणा, वार्ड सभासद बंदना राणा, गौरव कपूर, जनकल्याण लोक सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील पंवार आदि ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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रामपुर के पास भू-धंसाव का दायरा बढ़ा
फाटा। केदारघाटी में हो रही लगातार बारिश के कारण रामपुर के समीप स्थित हो रहे भूधंसाव का दायरा बढ़ गया है। स्थिति यह है कि सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने के बाद अब सड़क का भू-भाग भी धंसने से यहां आवाजाही जोखिमभरी हो गई है। मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और केदारनाथ व त्रियुगीनारायण जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रामपुर के समीप करीब 60 मीटर मार्ग पिछले कई वर्षों से भू-धंसाव की चपेट में है। इसी वर्ष करीब 50 लाख रुपये की लागत से यहां सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया गया था लेकिन बारिश के दौरान यह कई बार धंस चुकी है। अब यहां भू-धंसाव का दायरा बढ़ गया है। स्थानीय अर्जुन सिंह ने कहा कि हर वर्ष अस्थायी कार्यों पर धन खर्च किया जा रहा है लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने शीघ्र ठोस कार्ययोजना बनाकर इस क्षेत्र का स्थायी उपचार करने की मांग की। इधर, राष्ट्रीय राजमार्ग के सहायक अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि संबंधित ठेकेदार की ओर से यहां निर्माण कार्य जारी है। जल्द स्थायी समाधान के प्रयास किए जाएंगे। संवाद
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सड़क बंद, पीठ पर राशन, पैदल चलकर ला रहे लोग सामान
या
सड़कें हुईं बंद, पीठ पर ढोकर ला रहे सिलिंडर और राशन
ब्रह्मसैंण के पास 15 अगस्त से बंद है सड़क, 17 हजार की आबादी है प्रभावित
चार किमी पैदल चलकर गोपेश्वर पहुंच रहे लोग, बच्चों को भी पैदल स्कूल जाने की मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी-
गोपेश्वर। 15 अगस्त से गोपेश्वर-घिंघराण सड़क ब्रह्मसैंण के पास बंद होने से घिंघराण क्षेत्र की करीब 17 हजार की आबादी प्रभावित है। सड़क बंद होने से जहां स्कूली बच्चों को पुलिस की सुरक्षा में पैदल आवाजाही कर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है वहीं क्षेत्र में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी ठप हो गई है। कई गांवों में रसोई गैस की किल्लत शुरू हो गई है और दुकानों में भी राशन के साथ अन्य सामान भी धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। ऐसे में लोगों को सिलिंडर और जरूरी सामान पीठ पर लादकर लाना पड़ रहा है।
घिंघराण क्षेत्र की ग्राम पंचायत कौंज पोथनी, काणा, खंडरा, कुजौं मेकोट, डुंगरी, स्वींग बिजराकोट, खोड़ मलाना, नैल, कुड़ाव, घिंघराण, देवर-खडोरा, रौली, ग्वाड़, ऑफिसर कॉलोनी और बेलीधार के ग्रामीण सड़क बंद होने से परेशान हैं। देवर गांव के पपेंद्र रावत और हरेंद्र राणा ने बताया कि सड़क बंद होने के कारण रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। लोगों को करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर गोपेश्वर पहुंचना पड़ रहा है। जरूरी सिलिंडर और राशन समेत अन्य सामान भी ग्रामीण पीठ पर लादकर लाने के लिए मजबूर हैं। देवर गांव की दीपा देवी ने बताया कि स्कूली बच्चे रोज सुबह पैदल आवाजाही कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। वहीं क्षेत्र की दुकानों में भी आवश्यक सामान धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य योगेंद्र सेमवाल ने लोनिवि से सड़क किनारे ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने की मांग की है ताकि भविष्य में सड़क बार-बार बाधित न हो। इधर लोनिवि के अधिशासी अभियंता तनुज कांबोज ने बताया कि तात्कालिक रूप से आवाजाही शुरू कराने के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से में क्रेस्टवॉल का निर्माण कराया जा रहा है। मौसम ने साथ दिया तो दस दिनों में सड़क को हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु कर लिया जाएगा।
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चेकडैम, क्रेटवाल व जलकुंड हुए क्षतिग्रस्त
पोखरी (चमोली)। बीते दिनों हुई बारिश से खाल-बजेठा नाले में बनाया गया जल कुंड क्रेटवाल व चेकडैम क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नाले में भारी मात्रा में पानी आने से जलकुंड का एक हिस्सा धंस गया है। अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग की पोखरी रेंज की ओर से यह कार्य करवाए गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि इसी साल यह निर्माण कार्य किए गए थे लेकिन पहली बरसात में टूट गए हैं। ग्राम प्रधान सूरज लाल, सत्येंद्र नेगी, महावीर बासकंडी सहित अन्य ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त जलकुंड व अन्य कार्यों के पुनर्निर्माण की मांग की है। अलकनंदा भूमि संरक्षण के वनक्षेत्राधिकारी बीएल शाह ने बताया कि मौके पर जाकर नुकसान का आकलन किया गया। इसकी रिपोर्ट उच्चधिकारियों को भेज दी गई है। संवाद
24 घंटे बाद खुली नंदप्रयाग-नंदानगर सड़क
नंदानगर। नंदप्रयाग-नंदानगर (19 किमी) सड़क पर बुधवार को 24 घंटे बाद वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है। सड़क खुलने पर लोगों ने राहत की सांस ली है।
बीते मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे थिरपाक-छिड़िया के बीच भारी चट्टान टूटने से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई थी। लोनिवि कर्णप्रयाग की ओर से जेसीबी मशीन लगाकर मार्ग खोलने के प्रयास किए गए, लेकिन मलबा अधिक होने के चलते इसमें काफी समय लग गया। बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि नंदानगर सड़क पर वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है। सड़क पर आए मलबे को पूरी तरह से हटा लिया गया है।
चमोली जिले में 19 सड़कें अवरुद्ध
गोपेश्वर। चमोली जिले में भारी बारिश से 19 सड़कें अवरुद्ध हैं। जिससे लोगों को वाहनों की आवाजाही के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रुक-रुककर हो रही बारिश से सड़कों को खोलने का काम भी प्रभावित हो रहा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि सड़कों को खोलने के लिए पर्याप्त मशीनें लगाई गई हैं। सड़कों को जल्द वाहनों की आवाजाही के लिए खोल लिया जाएगा। संवाद