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Chamoli News: भगवान राम की दी मुद्रिका देखकर भावुक हुईं सीता
Tue, 20 Oct 2026 04:52 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Tue, 20 Oct 2026 04:52 PM IST
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कर्णप्रयाग/गौचर/जिलासू। सदाशिव रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला के नवें दिन अशोक वाटिका का मंचन किया गया। माता सीता की खोज में पवनपुत्र हनुमान समुद्र पार करते हुए लंका पहुंचते हैं। जहां विभीषण से माता सीता का पता मिलने के बाद हनुमान अशोक वाटिका पहुंचते हैं। हनुमान भगवान श्रीराम की दी हुई मुद्रिका देकर माता सीता को प्रभु श्रीराम का संदेश देते हैं। वहीं कामधेनु रामलीला कमेटी गौचर में आयोजित रामलीला मंचन में रावण-अंगद संवाद और लक्ष्मण शक्ति का मंचन किया गया। युद्ध से पूर्व रावण को समझाने के लिए अंगद को दूत बनाकर लंका में भेजा जाता है। अंगद रावण के दरबार में पहुंचकर माता सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम को लौटाने और युद्ध टालने का संदेश देते हैं। मगर रावण अंगद की बात मानने से इनकार कर देता है। अंगद दरबार में पैर जमा देता है लेकिन कोई भी उनका पैर नहीं उठा पाता। वहीं सरणा में भी लोगों ने रामलीला का आनंद लिया। संवाद
लालटेन के उजाले से लेकर एलईडी से चमक रही रामलीला
कर्णप्रयाग। लालटेन और पेट्रोमैक्स के धुंधले उजाले में सजने वाली रामलीलाएं अब आधुनिकता के रंग में सराबोर हो चुकी हैं। कर्णप्रयाग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के तेल की जगह हाईटेक एलईडी लाइटों और आधुनिक साउंड सिस्टम ने ले ली है।
अपर बाजार निवासी कांति प्रसाद डिमरी बताते हैं कि पहले कलाकार बिना साउंड सिस्टम के अभिनय करते थे। डिम्मर में 109 वर्षों से अनवरत रामलीला हो रही है, जिसके 93 वर्षीय साक्षी मोहन प्रसाद डिमरी के अनुसार शुरुआती दौर में हर घर से लालटेन और पंचलाइट मांगकर मंच रोशन किया जाता था। वहीं, गौचर (पनाईं) में 105 साल पुरानी रामलीला के समिति अध्यक्ष 77 वर्षीय उमराव सिंह नेगी ने बताया कि अब संसाधनों के सुलभ होने से युवा कलाकारों में उत्साह दोगुना हो गया है और एलईडी व स्क्रीन का उपयोग होने लगा है। लालटेन के उजाले से शुरू हुई आस्था की यह यात्रा आज अत्याधुनिक तकनीक के सहारे और अधिक भव्य हो उठी है। संवाद
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लालटेन के उजाले से लेकर एलईडी से चमक रही रामलीला
कर्णप्रयाग। लालटेन और पेट्रोमैक्स के धुंधले उजाले में सजने वाली रामलीलाएं अब आधुनिकता के रंग में सराबोर हो चुकी हैं। कर्णप्रयाग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के तेल की जगह हाईटेक एलईडी लाइटों और आधुनिक साउंड सिस्टम ने ले ली है।
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अपर बाजार निवासी कांति प्रसाद डिमरी बताते हैं कि पहले कलाकार बिना साउंड सिस्टम के अभिनय करते थे। डिम्मर में 109 वर्षों से अनवरत रामलीला हो रही है, जिसके 93 वर्षीय साक्षी मोहन प्रसाद डिमरी के अनुसार शुरुआती दौर में हर घर से लालटेन और पंचलाइट मांगकर मंच रोशन किया जाता था। वहीं, गौचर (पनाईं) में 105 साल पुरानी रामलीला के समिति अध्यक्ष 77 वर्षीय उमराव सिंह नेगी ने बताया कि अब संसाधनों के सुलभ होने से युवा कलाकारों में उत्साह दोगुना हो गया है और एलईडी व स्क्रीन का उपयोग होने लगा है। लालटेन के उजाले से शुरू हुई आस्था की यह यात्रा आज अत्याधुनिक तकनीक के सहारे और अधिक भव्य हो उठी है। संवाद
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