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Chamoli News: 26 को होगा विश्व धरोहर रम्माण का मंचन, 12 दिन तक होंगे कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Tue, 14 Apr 2026 07:19 PM IST
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ज्योतिर्मठ के सलूड़-डुंग्रा में क्षेत्रपाल देवता के मुख्य निशान के साथ ग्रामीण। स्रोत जागरूक पा
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फोटो
बैसाखी पर भूमि क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में निर्धारित किया गया दिन
मुख्य आयोजन तक हर दिन होंगे अनुष्ठान और रात को मुखौटा नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण का मुख्य आयोजन 26 अप्रैल को होगा। बैसाखी पर्व पर पंचांग गणना के आधार पर शुभ दिन की घोषणा की गई। वहीं मुख्य आयोजन से पूर्व हर दिन दोपहर को अनुष्ठान और रात्रि को मुखौटा नृत्य आयोजित किया जाएगा।
पौराणिक परंपरा के अनुसार बैसाखी पर भूमि क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में सलूड़-डुंग्रा महापंचायत, रम्माण आयोजन समिति के पदाधिकारियों, पश्व, पुजारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचायत पुरोहितों ने पंचांग गणना कर रम्माण की तिथि घोषित की। इससे पूर्व भूमि क्षेत्रपाल देवता अपने निशान और कंडियों के साथ डुंग्रा निवासी दिलबर सिंह कुंवर के घर पर थे। उन्होंने सालभर क्षेत्रपाल देवता की पूजा की। मंगलवार को ढोल दमाऊं के साथ भूमि क्षेत्रपाल देवता दिलबर के घर से 11 बजे रवाना हुए और अपने मूल मंदिर चोपता में पहुंचे। परिजनों ने भावुक होकर देवता को विदाई दी। इसके बाद मंदिर में क्षेत्रपाल देवता का शृंगार किया गया और गांव के युवा ने देवता के मुख्य निशान को मंदिर परिसर में विशेष ताल पर नृत्य करवाया। विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण सलूड़-डुंग्रा के संयोजक डॉ. कुशल भंडारी ने बताया कि 12 दिनों क्षेत्र के पांच मंदिरों में अनुष्ठान, भूमि क्षेत्रपाल देवता का मिलन, क्षेत्र भ्रमण और नृत्य कार्यक्रम होंगे और रात को मुखौटा नृत्य होगा। 26 अप्रैल को रम्माण का वृहद आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति की ओर से रम्माण के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, राज्य सभा सांसद महेंद्र भट्ट, विधायक लखपत बुटोला सहित कई जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। इस दौरान भरत सिंह पंवार, रणबीर सिंह चौहान, लक्ष्मी प्रसाद, रघुवीर सिंह, पंकज बैंजवाल, अध्यक्ष शरत सिंह बंगारी, सचिव विकेश कुंवर, कोषाध्यक्ष रघुवीर सिंह आदि उपस्थित रहे।
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दिल्ली से शोधकर्ता व पर्यटन विभाग की टीम पहुंची
- दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से रम्माण पर शोध कार्य किया जा रहा है। शोध कार्य से जुड़े शोधार्थी सलूड़-डुंग्रा पहुंच गए हैं। वहीं उत्तराखंड पर्यटन विभाग इस बार रम्माण में विशेष भूमिका निभाएगा। विभाग यहां पर रम्माण का अभिलेखीकरण भी करेगा। इसके लिए दल गांव पहुंच गया है।
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बैसाखी पर भूमि क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में निर्धारित किया गया दिन
मुख्य आयोजन तक हर दिन होंगे अनुष्ठान और रात को मुखौटा नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण का मुख्य आयोजन 26 अप्रैल को होगा। बैसाखी पर्व पर पंचांग गणना के आधार पर शुभ दिन की घोषणा की गई। वहीं मुख्य आयोजन से पूर्व हर दिन दोपहर को अनुष्ठान और रात्रि को मुखौटा नृत्य आयोजित किया जाएगा।
पौराणिक परंपरा के अनुसार बैसाखी पर भूमि क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में सलूड़-डुंग्रा महापंचायत, रम्माण आयोजन समिति के पदाधिकारियों, पश्व, पुजारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचायत पुरोहितों ने पंचांग गणना कर रम्माण की तिथि घोषित की। इससे पूर्व भूमि क्षेत्रपाल देवता अपने निशान और कंडियों के साथ डुंग्रा निवासी दिलबर सिंह कुंवर के घर पर थे। उन्होंने सालभर क्षेत्रपाल देवता की पूजा की। मंगलवार को ढोल दमाऊं के साथ भूमि क्षेत्रपाल देवता दिलबर के घर से 11 बजे रवाना हुए और अपने मूल मंदिर चोपता में पहुंचे। परिजनों ने भावुक होकर देवता को विदाई दी। इसके बाद मंदिर में क्षेत्रपाल देवता का शृंगार किया गया और गांव के युवा ने देवता के मुख्य निशान को मंदिर परिसर में विशेष ताल पर नृत्य करवाया। विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण सलूड़-डुंग्रा के संयोजक डॉ. कुशल भंडारी ने बताया कि 12 दिनों क्षेत्र के पांच मंदिरों में अनुष्ठान, भूमि क्षेत्रपाल देवता का मिलन, क्षेत्र भ्रमण और नृत्य कार्यक्रम होंगे और रात को मुखौटा नृत्य होगा। 26 अप्रैल को रम्माण का वृहद आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति की ओर से रम्माण के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, राज्य सभा सांसद महेंद्र भट्ट, विधायक लखपत बुटोला सहित कई जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। इस दौरान भरत सिंह पंवार, रणबीर सिंह चौहान, लक्ष्मी प्रसाद, रघुवीर सिंह, पंकज बैंजवाल, अध्यक्ष शरत सिंह बंगारी, सचिव विकेश कुंवर, कोषाध्यक्ष रघुवीर सिंह आदि उपस्थित रहे।
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दिल्ली से शोधकर्ता व पर्यटन विभाग की टीम पहुंची
- दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से रम्माण पर शोध कार्य किया जा रहा है। शोध कार्य से जुड़े शोधार्थी सलूड़-डुंग्रा पहुंच गए हैं। वहीं उत्तराखंड पर्यटन विभाग इस बार रम्माण में विशेष भूमिका निभाएगा। विभाग यहां पर रम्माण का अभिलेखीकरण भी करेगा। इसके लिए दल गांव पहुंच गया है।

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