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Champawat News: ग्राम पंचायत मोस्टा बकोड़ा के लोग सुविधाओं के अभाव में कर गए पलायन
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Thu, 05 Mar 2026 10:24 PM IST
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मंच/चंपावत। एक समय में 500 से अधिक परिवारों का बसेरा रहा ग्राम पंचायत मोस्टा बकोड़ा आज पलायन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। कभी जीवन और गतिविधियों से भरा यह क्षेत्र अब 300 से भी कम परिवारों तक सीमित रह गया है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने यहां के लोगों को अपना पुश्तैनी घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार पलायन का सबसे प्रमुख कारण सड़क सुविधा का अभाव है। गांव से बाजार तक पहुंचने के लिए लोगों को आज भी करीब 12 किमी दूर मंच आना पड़ता है। गांव में किसी भी प्रकार की दुकान न होने के कारण रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी आने जाने के लिए 24 किमी लंबा सफर करना पड़ता है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य की कमजोर व्यवस्था
मंच। ग्राम पंचायत में शिक्षा व्यवस्था केवल आठवीं कक्षा तक ही सीमित है। इंटर की पढ़ाई के लिए बच्चों को 12 किमी दूर मंच या फिर टनकपुर जाना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। रात के समय ग्रामीण बीमार को भी लाने से परहेज करते हैं। सुबह होने के बाद वह बीमारों को अस्पताल तक लाते हैं।
गहत की मशहूर खेती अब घट रही
मंच। मोस्टा बकोड़ा गहत की खेती के लिए कभी बेहद मशहूर था लेकिन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से खेती-बाड़ी पर भी असर पड़ा है। अब 50 फीसदी से भी कम लोग खेती कर रहे हैं। सब्जी उत्पादन भी लोगों ने अब कम कर दिया है। कहीं ऐसा न हो सड़क के अभाव में बढ़ता पलायन मोस्टा बकोड़ा की स्थिति सीमांत क्षेत्रों में विकास की धीमी रफ्तार पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब तक सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं सुधरतीं, तब तक पलायन पर रोक लग पाना मुश्किल है।
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मोस्टा बकोड़ा क्षेत्र में सड़क न होने के कारण लोगों के लिए जीवन जीना आसान नहीं है। बीमारों, घायलों, गर्भवतियों के लिए डोली ही एकमात्र सहारा है। सड़क की सुविधा होती तो रिवर्स पलायन बढ़ता और गहत की खेती फिर से लहलहाती। पिछले कुछ सालों से लगातार पलायन हो रहा है। - रवींद्र रावत, प्रधान मोस्टा बकोड़ा
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सड़क के अभाव में पिछले कुछ सालों से पलायन बढ़ा है। लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए मुख्यालय और बाहरी जिलों में चले गए हैं। जब गांव में पूजा-पाठ या अन्य कोई काज होता है तब लोग आते हैं। कई घर वीरान पड़े हैं। अपनी मिट्टी छोड़कर कोई जाना नहीं चाहता है, लेकिन मजबूर हैं। -फते सिंह, स्थानीय बकोड़ा
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ग्रामीणों के अनुसार पलायन का सबसे प्रमुख कारण सड़क सुविधा का अभाव है। गांव से बाजार तक पहुंचने के लिए लोगों को आज भी करीब 12 किमी दूर मंच आना पड़ता है। गांव में किसी भी प्रकार की दुकान न होने के कारण रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी आने जाने के लिए 24 किमी लंबा सफर करना पड़ता है।
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- शिक्षा और स्वास्थ्य की कमजोर व्यवस्था
मंच। ग्राम पंचायत में शिक्षा व्यवस्था केवल आठवीं कक्षा तक ही सीमित है। इंटर की पढ़ाई के लिए बच्चों को 12 किमी दूर मंच या फिर टनकपुर जाना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। रात के समय ग्रामीण बीमार को भी लाने से परहेज करते हैं। सुबह होने के बाद वह बीमारों को अस्पताल तक लाते हैं।
गहत की मशहूर खेती अब घट रही
मंच। मोस्टा बकोड़ा गहत की खेती के लिए कभी बेहद मशहूर था लेकिन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से खेती-बाड़ी पर भी असर पड़ा है। अब 50 फीसदी से भी कम लोग खेती कर रहे हैं। सब्जी उत्पादन भी लोगों ने अब कम कर दिया है। कहीं ऐसा न हो सड़क के अभाव में बढ़ता पलायन मोस्टा बकोड़ा की स्थिति सीमांत क्षेत्रों में विकास की धीमी रफ्तार पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब तक सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं सुधरतीं, तब तक पलायन पर रोक लग पाना मुश्किल है।
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मोस्टा बकोड़ा क्षेत्र में सड़क न होने के कारण लोगों के लिए जीवन जीना आसान नहीं है। बीमारों, घायलों, गर्भवतियों के लिए डोली ही एकमात्र सहारा है। सड़क की सुविधा होती तो रिवर्स पलायन बढ़ता और गहत की खेती फिर से लहलहाती। पिछले कुछ सालों से लगातार पलायन हो रहा है। - रवींद्र रावत, प्रधान मोस्टा बकोड़ा
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सड़क के अभाव में पिछले कुछ सालों से पलायन बढ़ा है। लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए मुख्यालय और बाहरी जिलों में चले गए हैं। जब गांव में पूजा-पाठ या अन्य कोई काज होता है तब लोग आते हैं। कई घर वीरान पड़े हैं। अपनी मिट्टी छोड़कर कोई जाना नहीं चाहता है, लेकिन मजबूर हैं। -फते सिंह, स्थानीय बकोड़ा