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Haridwar News: जंगली जानवरों के कारण किसानों का मसूर की फसल से मोहभंग
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sun, 15 Mar 2026 05:50 PM IST
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- पहले बाहर से आकर मसूर खरीदते थे लोग, अब अन्य जगहों से खरीदने को मजबूर
पथरी। क्षेत्र के किसानों का मसूर की फसल से मोहभंग हो गया है। अब किसानों ने जंगली जानवरों के डर से खेतों में मसूर की फसल बोनी बंद कर दिया है। दस-पंद्रह साल पहले क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल पैदा की जाती थी। जैसे-जैसे जंगली जानवरों से क्षेत्र में मसूर की फसल का नुकसान बढ़ता गया। वैसे-वैसे किसानों ने मसूर की फसल बोनी कम कर दी। अब इक्का-दुक्का किसान ही क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल बोते हैं। उन दिनों क्षेत्र में मसूर की फसल की खूब पैदावार होती थी। उस समय दूसरे स्थानों के लोग क्षेत्र में आकर मसूर खरीद कर ले जाते थे। अब आलम यह है कि क्षेत्र के लोग खाने के लिए बाहरी स्थानों से मसूर खरीद कर लाते हैं।
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संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में जंगली जानवरों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। तभी किसान क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल बोनी शुरू कर सकते हैं।
अशोक कुमार, धारीवाला-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
सरकार व कृषि विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र के किसानों को खेतों में मसूर की फसल बोने के लिए जागरूक करना चाहिए, ताकि, क्षेत्र में खेतों में फिर से मसूर की फसल होनी शुरू हो जाए।
सोमप्रकाश सैनी, बादशाहपुर
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किसान नवंबर व दिसंबर माह में क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल बोते थे। मार्च व अप्रैल माह में खेतों में मसूर की फसल पक जातीं थीं और फसल कटने के बाद किसानों के घर मसूर पहुंच जातीं थीं।
इलयास, नसीरपुर कलां
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दस-पंद्रह साल पहले किसानों के लिए मसूर की फसल पैदा करना फायदेमंद होता था। बाद में जंगली जानवरों से नुक़सान के कारण किसानों के लिए मसूर की फसल पैदा करना घाटे का सौदा होने लगी। इससे किसानों ने इस फसल से तौबा कर ली।
राजेश चौहान, हरसीवाला-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
कृषि विभाग की ओर से आयोजित होने वाली गोष्ठियों में किसानों को मसूर की फसल बोने के लिए जागरूक किया जाएगा। किसानों से मसूर की फसल की पैदावर शुरू कर सकें।
मोहित कुमार, प्रभारी, ब्लाॅक बहादराबाद-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
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पथरी। क्षेत्र के किसानों का मसूर की फसल से मोहभंग हो गया है। अब किसानों ने जंगली जानवरों के डर से खेतों में मसूर की फसल बोनी बंद कर दिया है। दस-पंद्रह साल पहले क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल पैदा की जाती थी। जैसे-जैसे जंगली जानवरों से क्षेत्र में मसूर की फसल का नुकसान बढ़ता गया। वैसे-वैसे किसानों ने मसूर की फसल बोनी कम कर दी। अब इक्का-दुक्का किसान ही क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल बोते हैं। उन दिनों क्षेत्र में मसूर की फसल की खूब पैदावार होती थी। उस समय दूसरे स्थानों के लोग क्षेत्र में आकर मसूर खरीद कर ले जाते थे। अब आलम यह है कि क्षेत्र के लोग खाने के लिए बाहरी स्थानों से मसूर खरीद कर लाते हैं।
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संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में जंगली जानवरों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। तभी किसान क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल बोनी शुरू कर सकते हैं।
अशोक कुमार, धारीवाला
सरकार व कृषि विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र के किसानों को खेतों में मसूर की फसल बोने के लिए जागरूक करना चाहिए, ताकि, क्षेत्र में खेतों में फिर से मसूर की फसल होनी शुरू हो जाए।
सोमप्रकाश सैनी, बादशाहपुर
किसान नवंबर व दिसंबर माह में क्षेत्र में खेतों में मसूर की फसल बोते थे। मार्च व अप्रैल माह में खेतों में मसूर की फसल पक जातीं थीं और फसल कटने के बाद किसानों के घर मसूर पहुंच जातीं थीं।
इलयास, नसीरपुर कलां
दस-पंद्रह साल पहले किसानों के लिए मसूर की फसल पैदा करना फायदेमंद होता था। बाद में जंगली जानवरों से नुक़सान के कारण किसानों के लिए मसूर की फसल पैदा करना घाटे का सौदा होने लगी। इससे किसानों ने इस फसल से तौबा कर ली।
राजेश चौहान, हरसीवाला
कृषि विभाग की ओर से आयोजित होने वाली गोष्ठियों में किसानों को मसूर की फसल बोने के लिए जागरूक किया जाएगा। किसानों से मसूर की फसल की पैदावर शुरू कर सकें।
मोहित कुमार, प्रभारी, ब्लाॅक बहादराबाद