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Haridwar News: कांवड़ मेले में गोली चलने से मौत के मामले में आईटीबीपी जवान बरी
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रोशनाबाद। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) संदीप कुमार की अदालत ने कांवड़ मेले के दौरान गोली चलने से हुई युवक की मौत के मामले में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान संतोष चटर्जी को दोषमुक्त कर दिया है। वर्ष 2017 में हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर कांवड़ यात्रा के दौरान हुई झड़प में गोली चलने से एक युवक की मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 15 जुलाई 2017 को झज्जर हरियाणा निवासी विकास अपने साथियों के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार आया था। आरोप था कि सर्वानंद घाट पर आईटीबीपी कर्मियों के साथ कहासुनी के दौरान गोली चली, जिससे विकास की जान चली गई। मृतक के पिता कृष्ण कुमार की तहरीर पर कोतवाली हरिद्वार में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने संतोष चटर्जी, 50वीं बटालियन आईटीबीपी, पंचकूला हरियाणा के खिलाफ धारा 304ए के तहत न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने माना कि गोली जानबूझकर नहीं चलाई गई थी, बल्कि युवक की ओर से राइफल छीनने की कोशिश के दौरान हुई झड़प में यह हादसा हुआ। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी एक सरकारी कर्मचारी था और ड्यूटी पर तैनात था। ऐसे में ड्यूटी के दौरान किए गए कार्य के लिए मुकदमा चलाने के लिए धारा 197 सीआरपीसी के तहत सरकार से पूर्व अनुमति आवश्यक थी, जो इस मामले में नहीं ली गई थी। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लापरवाही या अपराध को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसी आधार पर अदालत ने संतोष चटर्जी को सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 15 जुलाई 2017 को झज्जर हरियाणा निवासी विकास अपने साथियों के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार आया था। आरोप था कि सर्वानंद घाट पर आईटीबीपी कर्मियों के साथ कहासुनी के दौरान गोली चली, जिससे विकास की जान चली गई। मृतक के पिता कृष्ण कुमार की तहरीर पर कोतवाली हरिद्वार में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने संतोष चटर्जी, 50वीं बटालियन आईटीबीपी, पंचकूला हरियाणा के खिलाफ धारा 304ए के तहत न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
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मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने माना कि गोली जानबूझकर नहीं चलाई गई थी, बल्कि युवक की ओर से राइफल छीनने की कोशिश के दौरान हुई झड़प में यह हादसा हुआ। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी एक सरकारी कर्मचारी था और ड्यूटी पर तैनात था। ऐसे में ड्यूटी के दौरान किए गए कार्य के लिए मुकदमा चलाने के लिए धारा 197 सीआरपीसी के तहत सरकार से पूर्व अनुमति आवश्यक थी, जो इस मामले में नहीं ली गई थी। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लापरवाही या अपराध को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसी आधार पर अदालत ने संतोष चटर्जी को सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
