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Haridwar News: गबन के आरोप में प्रधानाचार्य और कनिष्ठ सहायक निलंबित
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बहादराबाद। राष्ट्रीय इंटर कॉलेज रोहालकी में कार्यरत प्रधानाचार्य और कनिष्ठ सहायक को प्रबंध समिति के अध्यक्ष अजय चौहान ने निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने विद्यालय के शुल्क संबंधी दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर गबन किया है।
प्रबंध समिति ने निर्देश दिए हैं कि निलंबन अवधि के दौरान दोनों कर्मचारी विद्यालय परिसर के कक्ष संख्या चार में उपस्थित रहेंगे और किसी भी प्रकार से विद्यालय के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। साथ ही इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में पत्र जारी कर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखंड सरकार, अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, पौड़ी गढ़वाल, प्रबंधक राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, प्रधानाचार्य और वरिष्ठ लिपिक को सूचित कर दिया गया है।
प्रधानाचार्य सत्यपाल सिंह का कहना हैै कि विद्यालय में अपर निदेशक की टीम ने जांच की थी। इसमें बाबू की ओर से जयंत कुमार को नकद भुगतान (कैश) देने की बात सामने आई थी और कुछ धनराशि खाते में जमा करने के निर्देश भी दिए गए थे। प्रधानाचार्य ने बताया कि जांच टीम ने जयंत कुमार को कई बार बिल वाउचर के साथ उपस्थित होने के लिए बुलाया, लेकिन, वह टीम के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान धन के लेन-देन में उनका कहीं भी नाम सामने नहीं आया है और टीम ने उन्हें निर्दोष पाया है। सत्यपाल सिंह का कहना है कि जयंत कुमार की सदस्यता आजीवन समाप्त किए जाने के बाद उन्होंने षड्यंत्र के तहत यह कार्रवाई कराई है, जिसके परिणामस्वरूप उनका निलंबन किया गया है।
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प्रबंध समिति ने निर्देश दिए हैं कि निलंबन अवधि के दौरान दोनों कर्मचारी विद्यालय परिसर के कक्ष संख्या चार में उपस्थित रहेंगे और किसी भी प्रकार से विद्यालय के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। साथ ही इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
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अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में पत्र जारी कर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखंड सरकार, अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, पौड़ी गढ़वाल, प्रबंधक राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, प्रधानाचार्य और वरिष्ठ लिपिक को सूचित कर दिया गया है।
प्रधानाचार्य सत्यपाल सिंह का कहना हैै कि विद्यालय में अपर निदेशक की टीम ने जांच की थी। इसमें बाबू की ओर से जयंत कुमार को नकद भुगतान (कैश) देने की बात सामने आई थी और कुछ धनराशि खाते में जमा करने के निर्देश भी दिए गए थे। प्रधानाचार्य ने बताया कि जांच टीम ने जयंत कुमार को कई बार बिल वाउचर के साथ उपस्थित होने के लिए बुलाया, लेकिन, वह टीम के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान धन के लेन-देन में उनका कहीं भी नाम सामने नहीं आया है और टीम ने उन्हें निर्दोष पाया है। सत्यपाल सिंह का कहना है कि जयंत कुमार की सदस्यता आजीवन समाप्त किए जाने के बाद उन्होंने षड्यंत्र के तहत यह कार्रवाई कराई है, जिसके परिणामस्वरूप उनका निलंबन किया गया है।