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बजट न केवल देशभर के लिए फायदेमंद बल्कि उत्तराखंड को मिली बेतहर भागीदारी : त्रिवेंद्र
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पत्रकारों से वार्ता करते सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत साथ में विधायक मदन कौशिक और आदेश चौहान ।
- फोटो : 1
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हरिद्वार। सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्रीय बजट को लेकर शनिवार को मीडिया के सामने उत्तराखंड की हिस्सेदारी को रखते हुए प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि देश में जारी बजट में उत्तराखंड के हिस्से में बेहतर हिस्सेदारी है। रेलवे, इंस्फ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन को बढ़ावा मिलने और उत्तराखंड के विकास को गति देने वाला बजट बताते हुए सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि निवेश, रोजगार और समावेशी भारत की दिशा में एक संतुलित और भविष्य परक रोडमैप पेश करने वाला यह बजट है।
सांसद ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बजट तीन कर्तव्यों तेज आर्थिक विकास, क्षमता निर्माण और सबका साथ सबका विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कर सुधार और निर्यात को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि बजट से आर्थिक ढांचा मजबूत होगा और राजकोषीय अनुशासन स्थापित होगा।
उन्होंने कहा कि मनरेगा का केवल नाम बदला गया है। योजना को खत्म नहीं किया गया है। योजना में कई राज्यों में घोटाले सामने आने के बाद कुछ प्रावधान बदले गए हैं। अब ग्रामीणों को 125 दिन का रोजगार मिलेगा। 33 फीसदी महिलाओं को काम देना अनिवार्य किया गया है।
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यूजीसी पर बोलने से कतरा रहे जनप्रतिनिधि आम चर्चाओं में पार्टी भी कर रही निर्णय की निंदा
भारतीय जनता पार्टी ने भले ही शिक्षा में कई तरह के प्रावधान लागू किए, लेकिन यूजीसी के मामले में पूछे गए सवालों पर अधिकांश चुप्पी साध ले रहे हैं। यही हाल शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड व सांसाद हरिद्वार का भी दिखा। पत्रकारों ने जब पूछा कि आखिरकार केंद्र सरकार यूजीसी मामलों में अपना मंतव्य स्पष्ट क्यों नहीं कर रही है तो वह उसे कोर्ट के दायरे में सुनवाई के अधीन बताते हुए किसी टिप्पणी से इनकार कर दिए। हालांकि वहीं उनके साथ मौजूद कई अन्य भाजपा के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने बाद में इस सवाल को सराहा। कई ने यह तर्क रखा कि जो छात्र कक्षा में महज 40 नंबर प्राप्त कर आरक्षण के आधार पर डॉक्टर, वैज्ञानिक या अन्य सेवाओंं में पहुंचेगा उसे और 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र में अंतर रखना होगा। उन्होंने मेधा को सम्मान दिलाने और उन्हें सेवा का अवसर देने के लिए ऐसे नियम को शिक्षा से दूर रखने के लिए पुरजोर पैरवी भी की। फिलहाल सत्ताधारी दल के लोग इन मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं। यह अलग बात है कि उनकी आम चर्चाओंं में जिक्र शिक्षा में आरक्षण के विरोध में ही है।
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सांसद ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बजट तीन कर्तव्यों तेज आर्थिक विकास, क्षमता निर्माण और सबका साथ सबका विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कर सुधार और निर्यात को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि बजट से आर्थिक ढांचा मजबूत होगा और राजकोषीय अनुशासन स्थापित होगा।
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उन्होंने कहा कि मनरेगा का केवल नाम बदला गया है। योजना को खत्म नहीं किया गया है। योजना में कई राज्यों में घोटाले सामने आने के बाद कुछ प्रावधान बदले गए हैं। अब ग्रामीणों को 125 दिन का रोजगार मिलेगा। 33 फीसदी महिलाओं को काम देना अनिवार्य किया गया है।
यूजीसी पर बोलने से कतरा रहे जनप्रतिनिधि आम चर्चाओं में पार्टी भी कर रही निर्णय की निंदा
भारतीय जनता पार्टी ने भले ही शिक्षा में कई तरह के प्रावधान लागू किए, लेकिन यूजीसी के मामले में पूछे गए सवालों पर अधिकांश चुप्पी साध ले रहे हैं। यही हाल शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड व सांसाद हरिद्वार का भी दिखा। पत्रकारों ने जब पूछा कि आखिरकार केंद्र सरकार यूजीसी मामलों में अपना मंतव्य स्पष्ट क्यों नहीं कर रही है तो वह उसे कोर्ट के दायरे में सुनवाई के अधीन बताते हुए किसी टिप्पणी से इनकार कर दिए। हालांकि वहीं उनके साथ मौजूद कई अन्य भाजपा के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने बाद में इस सवाल को सराहा। कई ने यह तर्क रखा कि जो छात्र कक्षा में महज 40 नंबर प्राप्त कर आरक्षण के आधार पर डॉक्टर, वैज्ञानिक या अन्य सेवाओंं में पहुंचेगा उसे और 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र में अंतर रखना होगा। उन्होंने मेधा को सम्मान दिलाने और उन्हें सेवा का अवसर देने के लिए ऐसे नियम को शिक्षा से दूर रखने के लिए पुरजोर पैरवी भी की। फिलहाल सत्ताधारी दल के लोग इन मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं। यह अलग बात है कि उनकी आम चर्चाओंं में जिक्र शिक्षा में आरक्षण के विरोध में ही है।