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Kotdwar News: खराब पड़ी लिथोट्रिप्सी मशीन के मामले में डीएम सख्त
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Thu, 18 Jun 2026 06:28 PM IST
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बेस अस्पताल में जिम्मेदारों को चिह्नित करने के दिए निर्देश
मानवाधिकार आयोग की सुनवाई से पहले सीएमओ ने मांगी रिपोर्ट
कोटद्वार। बेस अस्पताल कोटद्वार में बीते पांच साल से खराब पड़ी लिथोट्रिप्सी मशीन के मामले में अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने के बाद जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस. भदौरिया ने मशीन के लंबे समय से निष्क्रिय पड़े रहने को गंभीर लापरवाही मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
डीएम के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) पौड़ी डॉ. एसएम शुक्ला ने बेस अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर मशीन के निष्क्रिय रहने के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिह्नित कर उनका विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है।
कोटद्वार निवासी अधिवक्ता बीएम गौड़ की शिकायत के बाद जिला प्रशासन और विभाग हरकत में आया है। उनकी ओर से इस मामले की उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। कहा गया कि बेस अस्पताल की लिथोट्रिप्सी मशीन करीब पांच वर्षों से खराब पड़ी है, जिससे गुर्दे की पथरी से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए देहरादून, मेरठ और दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है। मानवाधिकार आयोग ने निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को मामले की जांच कर निर्धारित तिथि तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को करेगा।
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इधर, जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। सीएमओ ने अस्पताल प्रशासन से मशीन की वर्तमान स्थिति, उसके रखरखाव और मरम्मत से संबंधित सभी तथ्यों की जानकारी तलब की है। अब यह देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है और मशीन को दोबारा संचालित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
मानवाधिकार आयोग की सुनवाई से पहले सीएमओ ने मांगी रिपोर्ट
कोटद्वार। बेस अस्पताल कोटद्वार में बीते पांच साल से खराब पड़ी लिथोट्रिप्सी मशीन के मामले में अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने के बाद जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस. भदौरिया ने मशीन के लंबे समय से निष्क्रिय पड़े रहने को गंभीर लापरवाही मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
डीएम के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) पौड़ी डॉ. एसएम शुक्ला ने बेस अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर मशीन के निष्क्रिय रहने के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिह्नित कर उनका विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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कोटद्वार निवासी अधिवक्ता बीएम गौड़ की शिकायत के बाद जिला प्रशासन और विभाग हरकत में आया है। उनकी ओर से इस मामले की उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। कहा गया कि बेस अस्पताल की लिथोट्रिप्सी मशीन करीब पांच वर्षों से खराब पड़ी है, जिससे गुर्दे की पथरी से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए देहरादून, मेरठ और दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है। मानवाधिकार आयोग ने निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को मामले की जांच कर निर्धारित तिथि तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को करेगा।
इधर, जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। सीएमओ ने अस्पताल प्रशासन से मशीन की वर्तमान स्थिति, उसके रखरखाव और मरम्मत से संबंधित सभी तथ्यों की जानकारी तलब की है। अब यह देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है और मशीन को दोबारा संचालित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।