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Kotdwar News: बरसात शुरू होते ही आमसौड़ के वाशिंदों में आपदा का डर

Wed, 08 Jul 2026 03:34 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार Updated Wed, 08 Jul 2026 03:34 PM IST
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Fear of disaster grips Aamsaud residents as the rainy season begins.
2023 की आपदा से प्रभावित 22 में से दो परिवार कर चुके पलायन
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सर्वे और निरीक्षण तक सिमटा पहाड़ी का ट्रीटमेंट
कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के आपदा प्रभावित आमसौड़ गांव के लोग आसमान में बादल देखते ही सहम उठते हैं। दरअसल, वे वर्ष 2023 से लगातार पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन की आपदा झेल रहे हैं। आलम यह है कि यहां के 22 में से दो परिवार पलायन कर चुके हैं। शासन-प्रशासन की ओर से भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी का ट्रीटमेंट करने का आश्वासन तीन साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा न्यूनीकरण विभाग की सर्वे रिपोर्ट और सुझाव मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मामला सर्वे और निरीक्षण तक ही सिमटकर रह गया है।
23 अगस्त, 2023 को हुई भारी बारिश के दौरान पहाड़ी से हुए भूस्खलन के कारण मलबा, पत्थर और पानी कई घरों में घुस गया था। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी। इसके बाद वर्ष 2024 के जुलाई और अगस्त में हुई भारी बारिश में भी पहाड़ी से मलबा और पानी आने से कई मकानों को नुकसान पहुंचा। उस दौरान भी प्रभावित परिवारों ने पंचायत भवन, रिश्तेदारों और गांव के अन्य घरों में शरण लेकर रातें गुजारी थीं।
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प्रभावित परिवारों का कहना है कि लगातार हो रहे भूस्खलन से पूर्वजों की ओर से बसाया गए गांव पर अस्तित्व का संकट बना है। जिला प्रशासन ने आपदा न्यूनीकरण विभाग से पहाड़ी का सर्वे कराया था। विभाग ने अपनी रिपोर्ट और सुझाव भी प्रशासन को सौंप दिए लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी पहाड़ी के ट्रीटमेंट का कार्य शुरू नहीं हो सका।
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पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कुंदन सिंह और समाज सेवी इंद्रमोहन जुयाल ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन केवल निरीक्षण और मौका मुआयना तक सीमित रहा। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग ने बरसाती नाले पाणी रौला में करीब 10 लाख की लागत से तटबंध बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी जबकि भूस्खलन रोकने के लिए केलापाणी पहाड़ी का स्थायी उपचार आज तक नहीं किया गया। .




आमसौड़ में आपदा के बाद करीब 10 लाख रुपये की लागत से पाणी के रौले में तटबंध बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी के ट्रीटमेंट के लिए डीपीआर बनाने के लिए शासन से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। स्वीकृति मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- अनिल राठौर, ईई सिंचाई खंड दुगड्डा।
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