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राहत : बणासी गांव में दहशत का पर्याय बना गुलदार पिंजरे में कैद

Sat, 04 Jul 2026 05:24 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार Updated Sat, 04 Jul 2026 05:24 PM IST
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Relief: Leopard that had become a source of terror in Banasi village caged.
वन विभाग ने कार्बेट व कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के चिकित्सकों की मदद से किया ट्रैंकुलाइज
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बीती 27 जून को महिला की मौत के बाद से बनी है दहशत
कोटद्वार/धुमाकोट। नैनीडांडा विकासखंड के सल्ड महादेव क्षेत्र के बणासी गांव में आतंक का पर्याय बना गुलदार शुक्रवार रात को पिंजरे में कैद हो गया है। सूचना मिलते ही हरकत में आए वन विभाग के अधिकारियों ने कार्बेट और कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के चिकित्सकों की मदद से उसे ट्रैंकुलाइज कर रात को ही धुमाकोट रेंज कार्यालय पहुंचा दिया।
गुलदार के पिंजरे में कैद होने की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीण गुलदार को मारने की मांग कर रहे थे। वन अधिकारियों ने उन्हें किसी तरह समझा बुझाकर शांत कराया। हमलावर गुलदार की पहचान होने तक गांव में पिंजरे, कैमरा ट्रैप व वन कर्मियों की टीम बनी रहेगी। वन विभाग पकड़े गए गुलदार का मेडिकल कराने और उसका सैंपल लेकर डब्लूआईआई देहरादून भेजने की तैयारी कर रहा है।
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बीती 27 जून की सुबह दिनदहाड़े गुलदार ने खेत में घास काटने गई बणासी गांव निवासी 65 वर्षीय वृद्धा सुशीला देवी पत्नी स्व. अनूप सिंह को मार डाला था। तब से गांव में दहशत बनी थी। वन विभाग की ओर से यहां पर चार पिंजरे, 10 कैमरा ट्रेप, दो विभागीय शूटर व वन कर्मचारियों की टीम लगाई थी। घटना के बाद से गुलदार पिंजरे के पास नहीं फटक रहा था। शुक्रवार रात को करीब 10 बजे लोगों को घटनास्थल के पास लगे पिंजरे से कुत्ते के भौंकने की तेज आवाज सुनाई दी। ग्रामीण मौके पर पहुंचे और वन विभाग को मामले की जानकारी दी।
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गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि लोगों के आक्रोश को देखते हुए रात को ही कार्बेट और केटीआर की टीम के सहयोग से गुलदार को ट्रैंकुलाइज कर धुमाकोट रेंज ले जाया गया है। पकड़ा गया गुलदार नर और उसकी उम्र आठ से दस साल के बीच आंकी गई है। उसके सैंपल लेकर भारतीव वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई) देहरादून भेजे जाएंगे। जहां पूर्व में घटनास्थल के पास से लिए सैंपल से मिलान व जांच के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा। सतखोल के ग्राम प्रधान सुभाष चंद्र, समाज सेवी अरविंद सिंह नेगी और विजय सिंह रावत ने बताया कि फिलहाल ग्रामीणों ने राहत महसूस की है लेकिन जब तक गुलदार के आतंक से पूरी तरह निजात नहीं मिल जाती, तब तक पिंजरे, कैमरा ट्रैप, शूटर व वन कर्मियों की टीम नहीं हटानी चाहिए।
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