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Nainital News: नैनीताल के बलियानाला क्षेत्र में 19 फीसदी जल स्रोत सूखे
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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में प्रस्तुत एक नवीन शोध ने हिमालयी क्षेत्र में गहराते जल संकट पर गंभीर चिंता जताई है। डॉ. पूनम शाह गंगोला के निर्देशन में वसीम अहमद की ओर से किए गए शोध में उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण बलिया नदी घाटी का पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से बदल रहा है।
वसीम अहमद ने इंपैक्ट ऑफ क्लाइमेट चेंज ऑन वाटर रिसोर्सेज : ए केस स्टडी ऑफ बलिया कैचमेंट विषय पर शोध कार्य पूर्ण किया है। शोध के अनुसार बलियानाला और उसकी सहायक नदियों कुरिया व नलेना नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। अध्ययन में पाया गया कि क्षेत्र के लगभग 19 फीसदी जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 24 फीसदी स्रोत अब केवल मौसमी रह गए हैं। स्थानीय आर्द्रभूमियां, जिन्हें सिमार और गजार कहा जाता है, तेजी से सिकुड़ रही हैं।
डॉ. अहमद ने बताया कि वर्षा के प्रतिरूप में बदलाव और बढ़ते तापमान ने कृषि, बागवानी और पशुपालन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय खाद्य सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। शोध में सुझाव दिया गया है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीकों के मेल से रिचार्ज जोनों का संरक्षण और समुदाय आधारित जल प्रबंधन ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।
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वसीम अहमद ने इंपैक्ट ऑफ क्लाइमेट चेंज ऑन वाटर रिसोर्सेज : ए केस स्टडी ऑफ बलिया कैचमेंट विषय पर शोध कार्य पूर्ण किया है। शोध के अनुसार बलियानाला और उसकी सहायक नदियों कुरिया व नलेना नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। अध्ययन में पाया गया कि क्षेत्र के लगभग 19 फीसदी जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 24 फीसदी स्रोत अब केवल मौसमी रह गए हैं। स्थानीय आर्द्रभूमियां, जिन्हें सिमार और गजार कहा जाता है, तेजी से सिकुड़ रही हैं।
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डॉ. अहमद ने बताया कि वर्षा के प्रतिरूप में बदलाव और बढ़ते तापमान ने कृषि, बागवानी और पशुपालन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय खाद्य सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। शोध में सुझाव दिया गया है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीकों के मेल से रिचार्ज जोनों का संरक्षण और समुदाय आधारित जल प्रबंधन ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।