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Nainital News: 1.3 किमी की लोअर मॉलरोड में 335 मीटर दरारें
Thu, 13 Aug 2026 02:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 13 Aug 2026 02:10 AM IST
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नैनीताल। झील नगरी नैनीताल की प्रसिद्ध लोअर मॉलरोड पर लगातार बढ़ रहा भू-धंसाव और दरारों का दायरा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। टीएचडीसी के हालिया सर्वे में 1.3 किलोमीटर लंबी इस सड़क के 335 मीटर हिस्से में दरारें चिह्नित की गई हैं। वर्तमान में केवल 70 मीटर क्षतिग्रस्त क्षेत्र में ही लगभग 3.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी सुरक्षा कार्य किया जा रहा है जबकि शेष 265 मीटर हिस्से का भविष्य अब भी अधर में है।
लोअर मॉलरोड लंबे समय से इस समस्या से जूझ रही है। वर्ष 2018 में सड़क का 25 मीटर हिस्सा ढहकर नैनी झील में गिर गया था जिसके बाद सितंबर 2025 में दोबारा 25 मीटर हिस्सा धंस गया। इन दोनों प्रभावित क्षेत्रों को मिलाकर तैयार डीपीआर के आधार पर स्टारकॉन इंफ्रा प्रोजेक्ट के 70 मीटर हिस्से का मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रत्नेश सक्सेना ने बताया कि शुरुआती सर्वे में 190 मीटर क्षेत्र में दरारें मिली थीं जो टीएचडीसी के दोबारा सर्वे में बढ़कर 335 मीटर सामने आई हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि शेष 265 मीटर हिस्से के उपचार का प्रस्ताव अभी शासन को नहीं भेजा गया है क्योंकि सिंचाई विभाग की ओर से झील की सुरक्षा दीवारों के पुनर्निर्माण का अलग प्रस्ताव भेजा गया है। आगामी ठोस कदम न उठाए जाने तक सड़क के बड़े हिस्से पर खतरा लगातार बना हुआ है।
दरारें सुरक्षा दीवार पर बढ़ते दबाव का संकेत
लोअर मॉलरोड पर लगातार सामने आ रही दरारों और नैनी झील की सुरक्षा दीवारों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग ने 38 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। ये दरारें केवल सड़क की सतह की समस्या नहीं हैं। ये झील की ओर सड़क के आधार और सुरक्षा दीवार पर बढ़ते दबाव का संकेत हैं। सड़क का 335 मीटर हिस्सा दरारों से प्रभावित है। झील और सड़क की सुरक्षा दीवारें भी कई स्थानों पर कमजोर और क्षतिग्रस्त पाई गई हैं। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नीरज तिवारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 1850 मीटर लंबी झील की दीवारों के पुनर्निर्माण की योजना है। इस योजना पर लगभग 38 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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लोअर मॉलरोड लंबे समय से इस समस्या से जूझ रही है। वर्ष 2018 में सड़क का 25 मीटर हिस्सा ढहकर नैनी झील में गिर गया था जिसके बाद सितंबर 2025 में दोबारा 25 मीटर हिस्सा धंस गया। इन दोनों प्रभावित क्षेत्रों को मिलाकर तैयार डीपीआर के आधार पर स्टारकॉन इंफ्रा प्रोजेक्ट के 70 मीटर हिस्से का मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रत्नेश सक्सेना ने बताया कि शुरुआती सर्वे में 190 मीटर क्षेत्र में दरारें मिली थीं जो टीएचडीसी के दोबारा सर्वे में बढ़कर 335 मीटर सामने आई हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि शेष 265 मीटर हिस्से के उपचार का प्रस्ताव अभी शासन को नहीं भेजा गया है क्योंकि सिंचाई विभाग की ओर से झील की सुरक्षा दीवारों के पुनर्निर्माण का अलग प्रस्ताव भेजा गया है। आगामी ठोस कदम न उठाए जाने तक सड़क के बड़े हिस्से पर खतरा लगातार बना हुआ है।
दरारें सुरक्षा दीवार पर बढ़ते दबाव का संकेत
लोअर मॉलरोड पर लगातार सामने आ रही दरारों और नैनी झील की सुरक्षा दीवारों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग ने 38 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। ये दरारें केवल सड़क की सतह की समस्या नहीं हैं। ये झील की ओर सड़क के आधार और सुरक्षा दीवार पर बढ़ते दबाव का संकेत हैं। सड़क का 335 मीटर हिस्सा दरारों से प्रभावित है। झील और सड़क की सुरक्षा दीवारें भी कई स्थानों पर कमजोर और क्षतिग्रस्त पाई गई हैं। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नीरज तिवारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 1850 मीटर लंबी झील की दीवारों के पुनर्निर्माण की योजना है। इस योजना पर लगभग 38 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।