{"_id":"6a6ce09bf899f185ad005df9","slug":"agricultural-advisory-for-the-month-of-august-issued-for-hill-farmers-of-uttarakhand-nainital-news-c-238-1-ntl1018-128858-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए अगस्त माह की कृषि सलाह जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए अगस्त माह की कृषि सलाह जारी
Fri, 31 Jul 2026 11:21 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ अनिल चंद्र ने उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए अगस्त माह हेतु कृषि एवं बागवानी संबंधी महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। यह सलाह लगातार बारिश, कोहरे और बदलते मौसम के बीच फसलों की सही देखभाल और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए है।
एक हजार से 1500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसान गोभी, शलजम और मूली की नर्सरी तैयार कर सकते हैं। सेब और नाशपाती की तुड़ाई के बाद पेड़ों की सूखी शाखाओं की हल्की छंटाई करने की भी सलाह दी गई है। 1,500 से 2,500 मीटर की ऊंचाई पर आलू की फसल में झुलसा रोग का खतरा अधिक है। किसानों को नियमित निगरानी की सलाह दी गई है। परिपक्व सेब की समय पर तुड़ाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। पॉलीहाउस में टमाटर और शिमला मिर्च की फसलों की लगातार देखभाल भी आवश्यक है। 2,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में राजमा, कूटू और स्थानीय आलू की फसलों में निराई-गुड़ाई करें। औषधीय फसलों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
रोगों से बचाव और फल उत्पादन
लगातार बारिश और कोहरे से फफूंद जनित रोग तेजी से फैल सकते हैं। आलू और टमाटर में झुलसा रोग की रोकथाम के लिए मौसम साफ होने पर 0.2 प्रतिशत मैंकोजेब का छिड़काव करें। कटुआ कीट और तना छेदक से बचने के लिए खेतों की नियमित साफ-सफाई बनाए रखें। सेब की तुड़ाई सही समय पर करें और फलों को चोट लगने से बचाएं। पहाड़ी ढलानों पर भू-स्खलन और मिट्टी के कटाव से बचाव के लिए खेतों में उचित नालियां बनाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक हजार से 1500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसान गोभी, शलजम और मूली की नर्सरी तैयार कर सकते हैं। सेब और नाशपाती की तुड़ाई के बाद पेड़ों की सूखी शाखाओं की हल्की छंटाई करने की भी सलाह दी गई है। 1,500 से 2,500 मीटर की ऊंचाई पर आलू की फसल में झुलसा रोग का खतरा अधिक है। किसानों को नियमित निगरानी की सलाह दी गई है। परिपक्व सेब की समय पर तुड़ाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। पॉलीहाउस में टमाटर और शिमला मिर्च की फसलों की लगातार देखभाल भी आवश्यक है। 2,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में राजमा, कूटू और स्थानीय आलू की फसलों में निराई-गुड़ाई करें। औषधीय फसलों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
रोगों से बचाव और फल उत्पादन
लगातार बारिश और कोहरे से फफूंद जनित रोग तेजी से फैल सकते हैं। आलू और टमाटर में झुलसा रोग की रोकथाम के लिए मौसम साफ होने पर 0.2 प्रतिशत मैंकोजेब का छिड़काव करें। कटुआ कीट और तना छेदक से बचने के लिए खेतों की नियमित साफ-सफाई बनाए रखें। सेब की तुड़ाई सही समय पर करें और फलों को चोट लगने से बचाएं। पहाड़ी ढलानों पर भू-स्खलन और मिट्टी के कटाव से बचाव के लिए खेतों में उचित नालियां बनाएं।
विज्ञापन