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Nainital News: खेल विवि में प्रवेश लेने के लिए दिव्यांग खिलाड़ियों को करना होगा अभी इंतजार
Fri, 03 Jul 2026 01:26 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 03 Jul 2026 01:26 AM IST
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हल्द्वानी। गौलापार में स्थापित होने वाले खेल विश्वविद्यालय के पहले शैक्षणिक सत्र में दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रवेश नहीं मिलेगा। आवश्यक संसाधनों और विशेष सुविधाओं का अभाव इसका मुख्य कारण है। विश्वविद्यालय पैरा खिलाड़ियों को प्रवेश देने की योजना बना रहा है।
कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य खेल शिक्षा को व्यापक बनाना और भविष्य में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अवसर उपलब्ध कराना है। दिव्यांग खिलाड़ियों की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए विशेष संसाधनों व व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है। वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी व्यवस्था करना अभी संभव नहीं है। आने वाले समय में इस दिशा में ठोस योजनाएं बनाई जाएंगी। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे राज्य के प्रत्येक वर्ग के खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय का लाभ मिल सके।
दिव्यांग और पैरा खिलाड़ी में अंतर
दिव्यांग खिलाड़ी और पैरा खिलाड़ी शब्दों का उपयोग अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर होता है लेकिन इनमें अंतर है। दिव्यांग खिलाड़ी वह हैं जिनमें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, दृष्टि या श्रवण संबंधी दिव्यांगता हो। पैरा खिलाड़ी वह दिव्यांग खिलाड़ी होता है जो पैरा खेलों के नियमों के अनुसार वर्गीकृत होकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता है। पैरा खिलाड़ी बनने के लिए केवल दिव्यांग होना पर्याप्त नहीं। संबंधित खेल के वर्गीकरण नियमों के तहत पात्र होना भी आवश्यक है। हर पैरा खिलाड़ी दिव्यांग होता है लेकिन हर दिव्यांग खिलाड़ी पैरा खिलाड़ी नहीं। सभी प्रकार की दिव्यांगताएं हर पैरा खेल में पात्र नहीं होती है। किसी खिलाड़ी की पात्रता संबंधित खेल के वर्गीकरण नियमों के आधार पर तय की जाती है।
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12वीं पास खिलाड़ियों के स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव की योजना
खेल विश्वविद्यालय में अगले माह उत्तराखंड स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव आयोजित करने की योजना है। इसमें राज्य के खेल छात्रावासों, विश्वविद्यालयों और 12वीं पास खिलाड़ियों को आमंत्रित किया जाएगा। कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि पहले सत्र में बीएससी स्पोर्ट्स साइंस, बैचलर ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और बैचलर ऑफ स्पोर्ट्स जर्नलिज्म और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी चल रही है। कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवाओं को इन नए पाठ्यक्रमों, कॅरिअर की संभावनाओं और प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी देना है।
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कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य खेल शिक्षा को व्यापक बनाना और भविष्य में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अवसर उपलब्ध कराना है। दिव्यांग खिलाड़ियों की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए विशेष संसाधनों व व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है। वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी व्यवस्था करना अभी संभव नहीं है। आने वाले समय में इस दिशा में ठोस योजनाएं बनाई जाएंगी। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे राज्य के प्रत्येक वर्ग के खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय का लाभ मिल सके।
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दिव्यांग और पैरा खिलाड़ी में अंतर
दिव्यांग खिलाड़ी और पैरा खिलाड़ी शब्दों का उपयोग अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर होता है लेकिन इनमें अंतर है। दिव्यांग खिलाड़ी वह हैं जिनमें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, दृष्टि या श्रवण संबंधी दिव्यांगता हो। पैरा खिलाड़ी वह दिव्यांग खिलाड़ी होता है जो पैरा खेलों के नियमों के अनुसार वर्गीकृत होकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता है। पैरा खिलाड़ी बनने के लिए केवल दिव्यांग होना पर्याप्त नहीं। संबंधित खेल के वर्गीकरण नियमों के तहत पात्र होना भी आवश्यक है। हर पैरा खिलाड़ी दिव्यांग होता है लेकिन हर दिव्यांग खिलाड़ी पैरा खिलाड़ी नहीं। सभी प्रकार की दिव्यांगताएं हर पैरा खेल में पात्र नहीं होती है। किसी खिलाड़ी की पात्रता संबंधित खेल के वर्गीकरण नियमों के आधार पर तय की जाती है।
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12वीं पास खिलाड़ियों के स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव की योजना
खेल विश्वविद्यालय में अगले माह उत्तराखंड स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव आयोजित करने की योजना है। इसमें राज्य के खेल छात्रावासों, विश्वविद्यालयों और 12वीं पास खिलाड़ियों को आमंत्रित किया जाएगा। कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि पहले सत्र में बीएससी स्पोर्ट्स साइंस, बैचलर ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और बैचलर ऑफ स्पोर्ट्स जर्नलिज्म और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी चल रही है। कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवाओं को इन नए पाठ्यक्रमों, कॅरिअर की संभावनाओं और प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी देना है।