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Haldwani: आंगनबाड़ी केंद्रों पर भारी पड़ा कार्य बहिष्कार, लोगों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Wed, 15 Apr 2026 11:12 AM IST
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सार

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के कार्य बहिष्कार का असर दिखाई देने लगा है। छह अप्रैल से जारी आंदोलन के चलते जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली जरूरी सेवाएं बाधित हो रही हैं।

Due to the boycott of work at Anganwadi centres, people are not getting the benefits of the schemes
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हड़ताल पर जाने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों में लटके ताले। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हल्द्वानी में विभिन्न मांगों के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के कार्य बहिष्कार का असर जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिखाई दे रहा है। छह अप्रैल से जारी आंदोलन के कारण अकिधतर केंद्रों पर ताले लटक गए हैं। इससे आम लोगों को मिलने वाली कई सेवाएं बाधित हो गई हैं।

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मांगों के लिए मंगलवार को भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का बुद्ध पार्क में धरना-प्रदर्शन जारी रहा। इस कारण शहर के बनभूलपुरा, लोहरियासाल तल्ला, सुभाषनगर, गोरापड़ाव और मुखानी सहित सभी क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं। इससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को महालक्ष्मी किट, पोषण किट और अन्य योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि केंद्रों के बंद रहने से कई जरूरी कार्य प्रभावित हुए हैं। कहीं लाभार्थियों का डेटा अपडेट नहीं हो पा रहा है तो कहीं बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण संबंधी गतिविधियां ठप पड़ी हैं।

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यह होते हैं आंगनबाड़ी केंद्रों से कार्य

-बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार और राशन वितरण

- तीन से छह वर्ष के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देना।

- एएनएम के साथ मिलकर समय पर बच्चों और महिलाओं का टीकाकरण।

- बच्चों का नियमित वजन और लंबाई मापन।

- महिलाओं और किशोरियों को पोषण व स्वच्छता के प्रति जागरूक करना।

- सर्वे कर क्षेत्र के परिवारों का डेटा रखना ।

- सरकारी योजनाओं के लिए लाभार्थियों का चयन

आंगनबाड़ी वर्कर बोलीं

यह बोली महिलाएं इतने कम मानदेय में घर चलाना तो दूर स्कूल के बच्चों की फीस ही नहीं निकाल पा रही है। हम चाहते हैं कि राज्य सरकार तत्काल 140 प्रतिदिन की मानदेय वृद्धि करें। - प्रेमा बिष्ट

जब तक सरकार 10 लाख रुपये की सहायता राशि का स्पष्ट जीओ जारी नहीं करती है तब तक हमारे खातों से 300 रुपये की कटौती करना न्यायसंगत नहीं है। - रेनू

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सरकार की हर योजना को सफल बनाती हैं, लेकिन जब हमारी मांगों की बात आती है तो प्रशासन मौन हो जाता है। - अनीता तिवारी

सुबह से शाम तक बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेवा करने के बाद भी हमें वह मानदेय नहीं मिलता है जिससे घर का खर्च चल सके। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। - बिमला खेतवाल

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