नैनीताल: जिला पंचायत में सरकारी फाइलें अभियंताओं के घर मिलीं, रिकॉर्ड व्यवस्था पर बड़ा सवाल; हिसाब-किताब गायब
नैनीताल जिला पंचायत में औचक निरीक्षण के दौरान हल्द्वानी स्थित निजी आवास से करीब 50-55 सरकारी फाइलें मिलीं। संविदा पर तैनात दो अभियंताओं के घर से पत्रावलियां मिलने से रिकॉर्ड व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया।
विस्तार
नैनीताल जिला पंचायत में सरकारी फाइलें दफ्तर की जगह संविदा में तैनात दो अभियंताओं के घर में मिलीं। औचक निरीक्षण के दौरान हल्द्वानी स्थित निजी आवास से करीब 50-55 सरकारी पत्रावलियां मिलने से रिकॉर्ड व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया। यही नहीं, निरीक्षण टीम के कार्यालय पहुंचते ही रजिस्टरों में अधूरी प्रविष्टियां भरने का सिलसिला शुरू हो गया। एक तरफ करोड़ों की सरकारी रकम खातों में पड़ी रही, दूसरी तरफ फाइलों और रिकॉर्ड का हिसाब-किताब ही दुरुस्त नहीं मिला। जिला पंचायत की इस तस्वीर ने पूरे कामकाज पर सवालिया निशान लगा दिया है।
मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे दोपहर करीब एक बजे जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे। निरीक्षण शुरू होते ही रजिस्टरों के रखरखाव में खामियां सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक कुछ रजिस्टरों में रिकॉर्ड व्यवस्थित नहीं था और टीम की मौजूदगी में ही उनमें एंट्री की गई।
निरीक्षण का सबसे गंभीर बिंदु सरकारी पत्रावलियों का निजी आवास में पाया जाना रहा। अधिकारियों के अनुसार, संविदा अभियंता कमेलश सिंह बिष्ट और पंकज धपोला से संबंधित करीब 50-55 सरकारी पत्रावलियां हल्द्वानी स्थित आवास पर मिलीं। सरकारी फाइलें कार्यालय से बाहर किसकी अनुमति से गईं और उन्हें निजी आवास पर रखने की जरूरत क्यों पड़ी, अब जांच का विषय है। अधिकारियों ने इसे नियमों के विपरीत बताया है। मामले में कनिष्ठ सहायक निर्माण निखिल बिष्ट की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों का कहना है कि उनकी अनुमति के बिना फाइलें बाहर कैसे गईं, इसका जवाब लिया जाएगा और कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
18 करोड़ पड़े रहे, योजनाएं जमीन पर नहीं उतरीं
जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर सिर्फ फाइलों ने ही सवाल नहीं खड़े किए। निरीक्षण में सामने आया कि करीब 17 से 18 करोड़ रुपये की धनराशि वर्ष 2021-22 से विभिन्न खातों में पड़ी है। 15वें वित्त आयोग, केंद्र पोषित और राज्य पोषित योजनाओं की यह राशि समय पर योजनाएं प्रस्तावित नहीं होने और स्वीकृत कार्य शुरू नहीं होने के कारण खर्च नहीं हो सकी। यह स्थिति जिला योजना की समीक्षा बैठक में भी सामने आ चुकी है।
आठ में सात टैक्स कलेक्टर गायब
राजस्व वसूली की स्थिति भी निरीक्षण में कमजोर मिली। अधिकारियों के अनुसार, जिला पंचायत के टैक्स संग्रह में लगातार गिरावट आई है। आठ टैक्स कलेक्टरों में से सिर्फ एक कार्यालय में मौजूद मिला जबकि सात बिना सूचना के अनुपस्थित थे। सभी से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए गए।
नक्शे पास, तारीख का पता नहीं
नक्शा पास करने की व्यवस्था में भी खामियां मिलीं। स्वीकृत नक्शों पर तारीख दर्ज नहीं की जा रही थी। निर्धारित समय पर शुल्क जमा नहीं होने की बात भी सामने आई। इससे नक्शा पास करने की प्रक्रिया और जिला पंचायत की राजस्व व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
1955 की लीज, आज भी 10-20 रुपये का किराया
जिला पंचायत की संपत्तियों की लीज व्यवस्था भी सवालों में है। वर्ष 1955-56 में 10, 12, 15 और 20 रुपये जैसी मामूली दरों पर दी गई कई संपत्तियों की लीज का आज तक नवीनीकरण नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश के समय से कई संपत्तियों को लीज पर दिया गया है लेकिन उनका रिन्युअल नहीं किया गया। अभी तक उसी दरों पर काम चल रहा है। इससे जिला पंचायत को राजस्व का संभावित नुकसान हो रहा है।
25 सीएल ने भी खींचा ध्यान
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सुभाष चंद्रा के अवकाश रिकॉर्ड की भी जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने एक जनवरी से अब तक 25 सीएल ली हैं जिनमें लगातार आठ सीएल लेने का मामला भी शामिल है। निर्धारित अवधि से अधिक लगातार अवकाश के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी होती है। इस बिंदु पर भी जांच की जाएगी।
जिला पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से लगातार शिकायतें मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर औचक निरीक्षण किया गया। अब निरीक्षण में सामने आई कमियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। - अरविंद कुमार पांडे, मुख्य विकास अधिकारी