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एक भी विद्यार्थी को अनधिकृत तरीके से नहीं दिया गया प्रवेश : प्रवीन कुमार
Tue, 11 Aug 2026 01:42 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 11 Aug 2026 01:42 AM IST
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किच्छा। सूरजमल विश्वविद्यालय ने भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) की मान्यता पर उठ रहे सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कहा कि लगभग 10,000 से 12,000 विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में अपनी शिक्षा पूरी कर चुके हैं। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रवीन कुमार ने बताया कि किसी भी विद्यार्थी को अनधिकृत तरीके से प्रवेश नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाहरी छात्र नेता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह प्रश्न उठा रहे हैं कि यदि कॉलेज भारतीय नर्सिंग परिषद की मान्यता के योग्य नहीं था तो विद्यार्थियों को प्रवेश कैसे दिया गया। प्रवीन कुमार ने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यार्थी को अनधिकृत अथवा नियम-विरुद्ध तरीके से प्रवेश नहीं दिया गया है। प्रवेश प्रक्रिया उस समय लागू संबंधित नियमों एवं नियामक प्रावधानों के अनुरूप की गई थी। उन्होंने कहा कि पात्र संस्थानों को उस राज्य सरकार से जहां नर्सिंग या जीएनएम की स्थापना की जानी है, अनिवार्यता व अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना आवश्यक है। इसके बाद संबंधित एसएनआरसी से संबंधित शैक्षणिक वर्ष के लिए जीएनएम व नर्सिंग कार्यक्रम के लिए मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है। उपर्युक्त दस्तावेज को ऑनलाइन प्राप्त किए जाने के पश्चात मान्यता प्राप्त नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान में अधिनियम के प्रावधानों के तहत बनाए गए नियमों के अनुरूप अध्यापन संकाय, नैदानिक सुविधाओं एवं मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन करने के लिए अधिनियम की धारा 13 के तहत वैधानिक निरीक्षण किया जाता है। उन्होंने बताया कि जैसे ही आईएनसी का पुनरीक्षण होगा तो समस्या का समाधान हो जाएगा। प्रबंधन आंदोलन पर बैठे विद्यार्थियों से लगातार संपर्क साधे हुए है। इस समस्या का निदान भी जल्द होने की उम्मीद है। इस मौके पर परीक्षा नियंत्रक विपिन कुमार अग्रवाल और प्राचार्य सबीना बी मौजूद रहीं।
-इंसेट
विद्यार्थियों का आंदोलन जारी
इधर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर नर्सिगं व जीएनएम के विद्यार्थियों का आंदोलन जारी है। भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद विद्यार्थी गेट पर डटे हुए हैं। छात्र-छात्राओं का कहना है कि मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाहरी छात्र नेता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह प्रश्न उठा रहे हैं कि यदि कॉलेज भारतीय नर्सिंग परिषद की मान्यता के योग्य नहीं था तो विद्यार्थियों को प्रवेश कैसे दिया गया। प्रवीन कुमार ने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यार्थी को अनधिकृत अथवा नियम-विरुद्ध तरीके से प्रवेश नहीं दिया गया है। प्रवेश प्रक्रिया उस समय लागू संबंधित नियमों एवं नियामक प्रावधानों के अनुरूप की गई थी। उन्होंने कहा कि पात्र संस्थानों को उस राज्य सरकार से जहां नर्सिंग या जीएनएम की स्थापना की जानी है, अनिवार्यता व अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना आवश्यक है। इसके बाद संबंधित एसएनआरसी से संबंधित शैक्षणिक वर्ष के लिए जीएनएम व नर्सिंग कार्यक्रम के लिए मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है। उपर्युक्त दस्तावेज को ऑनलाइन प्राप्त किए जाने के पश्चात मान्यता प्राप्त नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान में अधिनियम के प्रावधानों के तहत बनाए गए नियमों के अनुरूप अध्यापन संकाय, नैदानिक सुविधाओं एवं मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन करने के लिए अधिनियम की धारा 13 के तहत वैधानिक निरीक्षण किया जाता है। उन्होंने बताया कि जैसे ही आईएनसी का पुनरीक्षण होगा तो समस्या का समाधान हो जाएगा। प्रबंधन आंदोलन पर बैठे विद्यार्थियों से लगातार संपर्क साधे हुए है। इस समस्या का निदान भी जल्द होने की उम्मीद है। इस मौके पर परीक्षा नियंत्रक विपिन कुमार अग्रवाल और प्राचार्य सबीना बी मौजूद रहीं।
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विद्यार्थियों का आंदोलन जारी
इधर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर नर्सिगं व जीएनएम के विद्यार्थियों का आंदोलन जारी है। भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद विद्यार्थी गेट पर डटे हुए हैं। छात्र-छात्राओं का कहना है कि मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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