उत्तराखंड: हाईकोर्ट का सख्त रुख, दुष्कर्म आरोपियों की सार्वजनिक परेड-पिटाई पर रोक की मांग पर सरकार को नोटिस
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रपुर में दुष्कर्म आरोपियों को खुलेआम पिटवाने, सार्वजनिक परेड कराने और बिना मास्क फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बीते दिनों रुद्रपुर ऊधमसिंह नगर में पुलिस द्वारा दुष्कर्म केस के आरोपियों को गिरफ्तार कर खुलेआम पुलिस की निगरानी में पुलिस व जनता के द्वारा खुले बाजार में पिटवाने और उनकी सार्वजनिक रूप से परेड करावाने तथा उनके नाम की फोटो और वीडियो बिना मास्क के सहित पुलिस द्वारा अपनी आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाने जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार सहित अन्य सभी पक्षकारों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में राज्य सरकार, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक तथा पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था को पक्षकार बनाया गया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हाल के वर्षों में पुलिस द्वारा आरोपित या गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, सार्वजनिक परेड, मीडिया के सामने पेश करने तथा उनकी फोटो और वीडियो पुलिस के द्वारा प्रसारित करने की घटनाएं सोशल मिडिया पर डाली जा रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत मिले अधिकारों का उल्लघन है। याचिका में विशेष रूप से 28 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के कुछ कर्मियों द्वारा सार्वजनिक सड़क पर लोगों को लाठी-डंडों से पीटते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया है। याचिका के अनुसार इसी घटना से जुड़े एक अन्य वीडियो में कथित रूप से आरोपितों को सड़क पर घसीटने और जिंदा जलाने जैसी बातें भी कही गईं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया के बजाय सार्वजनिक प्रतिशोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस घटना के बाद 28 जुलाई 2026 को पुलिस महानिदेशक को विस्तृत प्रतिनिधित्व भेजकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे राज्य के लिए पुलिस बल के प्रयोग, गिरफ्तार व्यक्तियों के सम्मान, मीडिया से संवाद तथा फोटो-वीडियो जारी करने संबंधी एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर एसओपी बनाने की मांग की गई है।
याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के इस्लाम खान बनाम राज्य राजस्थान मामले के निर्णय का हवाला दिया गया है। दावा किया गया है कि उस फैसले के बाद राजस्थान में गिरफ्तार व्यक्तियों के साथ व्यवहार को लेकर विस्तृत एसओपी लागू की गई थी और उत्तराखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता है। जनहित याचिका में हाईकोर्ट से राज्य सरकार और पुलिस विभाग को गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, सार्वजनिक अपमान, मीडिया ट्रायल तथा आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान उजागर करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही गिरफ्तारी, हिरासत, बल प्रयोग, मीडिया से संवाद और जवाबदेही तय करने के लिए राज्यव्यापी एसओपी तैयार करने तथा पहले से आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आरोपितों के फोटो, वीडियो और पहचान संबंधी सामग्री की समीक्षा कर आवश्यक होने पर हटाने या पहचान छिपाने के निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है।