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Pauri News: संगम पर देव डोलियों ने किया स्नान
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 23 Jan 2026 11:21 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवप्रयाग। वसंत पंचमी पर्व पर सती अनसूया की डोली 51 वर्ष बाद देवप्रयाग के पावन संगम पर गंगा स्नान को पहुंची।
ढोल नगाड़ों सहित अपने निशानों के साथ डोली ने गंगा स्नान किया। मां सती अनसूया की डोली 1975 के बाद देवप्रयाग पहुंची। वहीं भैरव देव की डोली ने भी स्नान किया। श्रद्धालुओं ने भी यहां अलकनंदा भागीरथी संगम पर स्नान किया।
गोपेश्वर (चमोली) के कीलांचल पर्वत पर स्थित सिद्धपीठ मां अनसूया के पुजारी राकेश तिवाड़ी ने बताया कि मां अनसूया व अत्रि मुनि के आश्रम से निकली देवरा यात्रा पावन नदियों के स्नान व प्रमुख तीर्थों के दर्शन के बाद 28 अप्रैल को अपने आश्रम में पहुंचेगी।
उन्होंने बताया कि सती अनसूया ने ब्रह्मा, विष्णु व महेश को नवजात शिशु का रूप देकर उन्हें माता का स्नेह दिया था। वहीं वसंत पंचमी पर्व पर स्नान के लिए बूढ़ा केदार से भैरव देव की डोली भी गंगा स्नान को पहुंची।
वसंत आगमन का कविताओं से किया स्वागत
श्रीनगर। हिमालयन साहित्य एवं कला एवं साहित्य परिषद का स्थापना दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर परिषद के सदस्यों की ओर से कविता पाठ का आयोजन कर वसंत का आगमन किया गया। मीठा भात का सहभोज किया गया। साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। परिषद के मुख्य ट्रस्टी कृष्णानंद मैठाणी एवं प्रो. उमा मैठाणी ने कहा कि परिषद कला, संस्कृति एवं साहित्य के संरक्षण की दिशा में नित नए कार्य किए जा रहे हैं। प्रो. आरएन गैरोला ने कविता का पाठ किया। माधुरी नैथानी ने अलकनंदा नदी में हो रहे खनन व बांध से पानी कम छोड़े जाने से नदी के प्रवाह क्षेत्र में आई भारी कमी पर रचना प्रस्तुत की। साईनी कृष्ण उनियाल ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। कवि नीरज नैथानी, रंगकर्मी विमल बहुगुणा, संगीतकार वीरेंद्र रतूड़ी, कवि जयकृष्ण पैन्यूली, डाॅ. प्रकाश चमोली, अंकित रावत, बाल कवि प्रद्युम्न उनियाल, अनीता नौडियाल, कौशल्या नैथानी, मीनाक्षी ने भी अपनी कविताओं का पाठ किया। संवाद
देवप्रयाग। वसंत पंचमी पर्व पर सती अनसूया की डोली 51 वर्ष बाद देवप्रयाग के पावन संगम पर गंगा स्नान को पहुंची।
ढोल नगाड़ों सहित अपने निशानों के साथ डोली ने गंगा स्नान किया। मां सती अनसूया की डोली 1975 के बाद देवप्रयाग पहुंची। वहीं भैरव देव की डोली ने भी स्नान किया। श्रद्धालुओं ने भी यहां अलकनंदा भागीरथी संगम पर स्नान किया।
गोपेश्वर (चमोली) के कीलांचल पर्वत पर स्थित सिद्धपीठ मां अनसूया के पुजारी राकेश तिवाड़ी ने बताया कि मां अनसूया व अत्रि मुनि के आश्रम से निकली देवरा यात्रा पावन नदियों के स्नान व प्रमुख तीर्थों के दर्शन के बाद 28 अप्रैल को अपने आश्रम में पहुंचेगी।
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उन्होंने बताया कि सती अनसूया ने ब्रह्मा, विष्णु व महेश को नवजात शिशु का रूप देकर उन्हें माता का स्नेह दिया था। वहीं वसंत पंचमी पर्व पर स्नान के लिए बूढ़ा केदार से भैरव देव की डोली भी गंगा स्नान को पहुंची।
वसंत आगमन का कविताओं से किया स्वागत
श्रीनगर। हिमालयन साहित्य एवं कला एवं साहित्य परिषद का स्थापना दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर परिषद के सदस्यों की ओर से कविता पाठ का आयोजन कर वसंत का आगमन किया गया। मीठा भात का सहभोज किया गया। साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। परिषद के मुख्य ट्रस्टी कृष्णानंद मैठाणी एवं प्रो. उमा मैठाणी ने कहा कि परिषद कला, संस्कृति एवं साहित्य के संरक्षण की दिशा में नित नए कार्य किए जा रहे हैं। प्रो. आरएन गैरोला ने कविता का पाठ किया। माधुरी नैथानी ने अलकनंदा नदी में हो रहे खनन व बांध से पानी कम छोड़े जाने से नदी के प्रवाह क्षेत्र में आई भारी कमी पर रचना प्रस्तुत की। साईनी कृष्ण उनियाल ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। कवि नीरज नैथानी, रंगकर्मी विमल बहुगुणा, संगीतकार वीरेंद्र रतूड़ी, कवि जयकृष्ण पैन्यूली, डाॅ. प्रकाश चमोली, अंकित रावत, बाल कवि प्रद्युम्न उनियाल, अनीता नौडियाल, कौशल्या नैथानी, मीनाक्षी ने भी अपनी कविताओं का पाठ किया। संवाद

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