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Pauri News: अवैध शराब रखने के दोषी पर पांच हजार का जुर्माना
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पौड़ी। घुड़दौड़ी के निकट एक रिजॉर्ट से जब्त की गई अवैध शराब के आरोपी को अदालत ने दोषी करार देते हुए न्यायालय समयावधि तक की सजा और पांच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को एक माह के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। सिविल जज (सी.डि) व अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार 26 जुलाई 2025 को आबकारी निरीक्षक रविंद्र कुमार डिमरी के नेतृत्व में मुखबिर की सूचना पर टीम ने घुड़दौड़ी के निकट एक रिजॉर्ट में दबिश दी थी। तलाशी के दौरान एक कमरे में शराब की 12 बोतलें और 120 अद्दे के साथ ही आरोपी कुलदीप सिंह के कब्जे से 2,56,500 रुपये नकद बरामद किए गए थे। आबकारी टीम ने अदालत को बताया कि शराब रखने के संबंध में आरोपी के पास कोई लाइसेंस नहीं था। टीम ने आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए 29 मई 2026 को वाद अदालत पहुंचा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी के अपने बयान में बरामदगी स्वीकार किए जाने के आधार पर माना कि उसके खिलाफ धारा 60 आबकारी अधिनियम का आरोप पूरी तरह साबित होता है।
सजा के संबंध में आरोपी ने खुद को गरीब बताते हुए न्यूनतम अर्थदंड लगाए जाने का अनुरोध किया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और आरोपी के बयान को देखते हुए उसे न्यायालय समयावधि तक की सजा और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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अभियोजन के अनुसार 26 जुलाई 2025 को आबकारी निरीक्षक रविंद्र कुमार डिमरी के नेतृत्व में मुखबिर की सूचना पर टीम ने घुड़दौड़ी के निकट एक रिजॉर्ट में दबिश दी थी। तलाशी के दौरान एक कमरे में शराब की 12 बोतलें और 120 अद्दे के साथ ही आरोपी कुलदीप सिंह के कब्जे से 2,56,500 रुपये नकद बरामद किए गए थे। आबकारी टीम ने अदालत को बताया कि शराब रखने के संबंध में आरोपी के पास कोई लाइसेंस नहीं था। टीम ने आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए 29 मई 2026 को वाद अदालत पहुंचा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी के अपने बयान में बरामदगी स्वीकार किए जाने के आधार पर माना कि उसके खिलाफ धारा 60 आबकारी अधिनियम का आरोप पूरी तरह साबित होता है।
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सजा के संबंध में आरोपी ने खुद को गरीब बताते हुए न्यूनतम अर्थदंड लगाए जाने का अनुरोध किया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और आरोपी के बयान को देखते हुए उसे न्यायालय समयावधि तक की सजा और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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