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Pauri News: धारी देवी मंदिर में दान व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की तैयारी
Fri, 24 Jul 2026 06:17 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 24 Jul 2026 06:17 PM IST
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ट्रस्ट ने पहली बार सार्वजनिक की पूरी व्यवस्था, दानपात्र की राशि मंदिर विकास पर खर्च
सत्य प्रसाद मैठाणी
श्रीनगर। देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र धारी देवी मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर प्रबंधन अगले माह होने वाली आदि शक्ति मां धारी पुजारी न्यास की बैठक में उपसमिति गठन का प्रस्ताव रखेगा। प्रस्तावित समिति में ट्रस्ट सदस्यों के साथ क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि मंदिर के विकास कार्यों और दान राशि के उपयोग में सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
मंदिर के पुजारी और न्यास के प्रबंधक लक्ष्मी प्रसाद पांडे ने बताया कि धारी देवी मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था अलग-अलग है। करीब 200 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मां को अर्पित सोना, चांदी, नकदी और अन्य चढ़ावा उस दिन बारी पर रहने वाले को मिलता है, जबकि पूजा के बाद श्रद्धालुओं द्वारा दी जाने वाली दक्षिणा पंडित की होती है।
उन्होंने बताया कि मंदिर व्यवस्थाओं के संचालन के लिए वर्ष 2000 में 11 सदस्यीय आदि शक्ति मां धारी पुजारी न्यास का गठन किया गया था। हाईवे से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की भेंट व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर दानपात्र लगाया गया और बाद में मंदिर परिसर में भी दानपात्र व रसीद प्रणाली शुरू की गई।
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पांडे के अनुसार, दानपात्र और रसीदों से प्राप्त पूरी राशि ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा होती है। इसी राशि से मंदिर की बिजली-पानी व्यवस्था, साफ-सफाई, रखरखाव, टिन शेड, मरम्मत और श्रद्धालुओं की सुविधाओं सहित अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। सभी खर्चों का लेखा-जोखा ट्रस्ट अभिलेखों में दर्ज रहता है।
उन्होंने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रस्तावित उपसमिति में समाज के लोगों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर मार्ग पर लगे पुराने और क्षतिग्रस्त घंटों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। हटाए गए घंटों की नीलामी से प्राप्त धनराशि को भी मंदिर विकास कार्यों में लगाया जाएगा।
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सत्य प्रसाद मैठाणी
श्रीनगर। देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र धारी देवी मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर प्रबंधन अगले माह होने वाली आदि शक्ति मां धारी पुजारी न्यास की बैठक में उपसमिति गठन का प्रस्ताव रखेगा। प्रस्तावित समिति में ट्रस्ट सदस्यों के साथ क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि मंदिर के विकास कार्यों और दान राशि के उपयोग में सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
मंदिर के पुजारी और न्यास के प्रबंधक लक्ष्मी प्रसाद पांडे ने बताया कि धारी देवी मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था अलग-अलग है। करीब 200 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मां को अर्पित सोना, चांदी, नकदी और अन्य चढ़ावा उस दिन बारी पर रहने वाले को मिलता है, जबकि पूजा के बाद श्रद्धालुओं द्वारा दी जाने वाली दक्षिणा पंडित की होती है।
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उन्होंने बताया कि मंदिर व्यवस्थाओं के संचालन के लिए वर्ष 2000 में 11 सदस्यीय आदि शक्ति मां धारी पुजारी न्यास का गठन किया गया था। हाईवे से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की भेंट व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर दानपात्र लगाया गया और बाद में मंदिर परिसर में भी दानपात्र व रसीद प्रणाली शुरू की गई।
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पांडे के अनुसार, दानपात्र और रसीदों से प्राप्त पूरी राशि ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा होती है। इसी राशि से मंदिर की बिजली-पानी व्यवस्था, साफ-सफाई, रखरखाव, टिन शेड, मरम्मत और श्रद्धालुओं की सुविधाओं सहित अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। सभी खर्चों का लेखा-जोखा ट्रस्ट अभिलेखों में दर्ज रहता है।
उन्होंने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रस्तावित उपसमिति में समाज के लोगों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर मार्ग पर लगे पुराने और क्षतिग्रस्त घंटों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। हटाए गए घंटों की नीलामी से प्राप्त धनराशि को भी मंदिर विकास कार्यों में लगाया जाएगा।