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मर्म चिकित्सा से असाध्य रोगों का उपचार संभव : प्रो. जोशी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Tue, 24 Mar 2026 05:26 PM IST
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श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हुई कार्यशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवप्रयाग। मर्म चिकित्सा से असाध्य रोगों का उपचार संभव है। इससे 40 वर्ष पूर्व पोलियोग्रस्त हुए व्यक्ति को भी स्वस्थ किया जा सकता है। यह बातें उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और मर्म विशेषज्ञ प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहीं।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा योग की सहचर पद्धति है। आज के परिप्रेक्ष्य में यह अत्यंत प्रासंगिक और लाभकारी सिद्ध हो रही है। यही कारण है कि देश के करीब 12 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में इसे पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जा रहा है। कोरोना काल का उदाहरण देते हुए प्रो. जोशी ने बताया कि जब आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां बेअसर साबित हो रही थीं तब प्राणायाम, आयुर्वेदिक काढ़ा और मसालों के पारंपरिक ज्ञान ने ही मानवता की रक्षा की। परिसर निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आगामी सत्र से विश्वविद्यालय के योग विज्ञान के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में मर्म चिकित्सा को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर डॉ. रश्मिता और रजत शर्मा सहित विभाग के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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देवप्रयाग। मर्म चिकित्सा से असाध्य रोगों का उपचार संभव है। इससे 40 वर्ष पूर्व पोलियोग्रस्त हुए व्यक्ति को भी स्वस्थ किया जा सकता है। यह बातें उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और मर्म विशेषज्ञ प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहीं।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा योग की सहचर पद्धति है। आज के परिप्रेक्ष्य में यह अत्यंत प्रासंगिक और लाभकारी सिद्ध हो रही है। यही कारण है कि देश के करीब 12 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में इसे पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जा रहा है। कोरोना काल का उदाहरण देते हुए प्रो. जोशी ने बताया कि जब आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां बेअसर साबित हो रही थीं तब प्राणायाम, आयुर्वेदिक काढ़ा और मसालों के पारंपरिक ज्ञान ने ही मानवता की रक्षा की। परिसर निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आगामी सत्र से विश्वविद्यालय के योग विज्ञान के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में मर्म चिकित्सा को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर डॉ. रश्मिता और रजत शर्मा सहित विभाग के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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