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Pauri News: लोन का भुगतान नहीं करने पर महिला उद्यमी को बकाया चुकाने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Mon, 22 Jun 2026 04:56 PM IST
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- 3 लाख 12 हजार 787.59 रुपये की धनराशि एक महीने में चुकाने के आदेश दिए
कोर्ट की खबर
पौड़ी। अदालत ने लोन वसूली के मामले में बैंक के हक में फैसला सुनाते हुए एक महिला उद्यमी को बैंक की बकाया 3 लाख 12 हजार 787.59 रुपये की धनराशि एक महीने में चुकाने के आदेश दिए हैं। साथ ही 16 सितंबर 2025 से पूरी राशि का भुगतान होने तक 11.40 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए हैं। सिविल जज (सी.डि) पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
मामले के अनुसार नैनीताल बैंक की श्रीनगर शाखा ने मैसर्स रेशमा शम्शी इलेक्ट्रिकल की संचालक के खिलाफ वसूली का मुकदमा दायर किया था। बैंक का कहना था कि महिला कारोबारी ने फरवरी 2023 में अपने कारोबार के लिए पांच लाख रुपए का लोन लिया था। लोन लेते समय उसने बैंक के सभी जरूरी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। लोन लेने के कुछ समय बाद संचालक ने किश्तें जमा करना बंद कर दिया। कई बार नोटिस देने के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं की गई। इसके चलते सितंबर 2025 में खाता एनपीए घोषित कर दिया गया, उस समय महिला पर बैंक के 3,12,787.59 रुपये का बकाया था।
मामले की सुनवाई के दौरान संचालक अदालत में पेश नहीं हुईं और न ही अपनी ओर से कोई जवाब दाखिल करवाया। अदालत ने बैंक की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर एकपक्षीय सुनवाई की। अदालत ने माना कि बैंक ने अपना दावा साबित कर दिया है। जिस पर अदालत ने संचालक को उक्त बकाया धनराशि चुकाने का आदेश दिया।
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कोर्ट की खबर
पौड़ी। अदालत ने लोन वसूली के मामले में बैंक के हक में फैसला सुनाते हुए एक महिला उद्यमी को बैंक की बकाया 3 लाख 12 हजार 787.59 रुपये की धनराशि एक महीने में चुकाने के आदेश दिए हैं। साथ ही 16 सितंबर 2025 से पूरी राशि का भुगतान होने तक 11.40 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए हैं। सिविल जज (सी.डि) पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
मामले के अनुसार नैनीताल बैंक की श्रीनगर शाखा ने मैसर्स रेशमा शम्शी इलेक्ट्रिकल की संचालक के खिलाफ वसूली का मुकदमा दायर किया था। बैंक का कहना था कि महिला कारोबारी ने फरवरी 2023 में अपने कारोबार के लिए पांच लाख रुपए का लोन लिया था। लोन लेते समय उसने बैंक के सभी जरूरी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। लोन लेने के कुछ समय बाद संचालक ने किश्तें जमा करना बंद कर दिया। कई बार नोटिस देने के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं की गई। इसके चलते सितंबर 2025 में खाता एनपीए घोषित कर दिया गया, उस समय महिला पर बैंक के 3,12,787.59 रुपये का बकाया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान संचालक अदालत में पेश नहीं हुईं और न ही अपनी ओर से कोई जवाब दाखिल करवाया। अदालत ने बैंक की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर एकपक्षीय सुनवाई की। अदालत ने माना कि बैंक ने अपना दावा साबित कर दिया है। जिस पर अदालत ने संचालक को उक्त बकाया धनराशि चुकाने का आदेश दिया।