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Pithoragarh News: सीमांत जिले में हो रहा है प्रतिवर्ष 1537.70 क्विंटल सेब
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:15 PM IST
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पिथौरागढ़। जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगाई की अध्यक्षता में मिशन एप्पल योजना के संबंध में शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें सेब उत्पादन को वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीक से बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि जनपद में वर्ष 2024–25 तक सेब (सीडलिंग आधारित) का कुल आच्छादित क्षेत्रफल 233.59 हेक्टेयर था। इसमें फलदार क्षेत्रफल 78.30 हेक्टेयर है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 1537.70 क्विंटल सेब का उत्पादन किया जा रहा है।
बताया कि मिशन एप्पल योजना के तहत मुनस्यारी एवं धारचूला क्षेत्र में अनुकूल जलवायु का लाभ उठाते हुए सेब उत्पादन को विस्तार दिया जा रहा है। योजना के तहत क्लोनल रूट स्टॉक आधारित उच्च घनत्व वाले सेब बागानों की स्थापना को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ ही वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सेब की उन्नत किस्मों का चयन, आधुनिक सिंचाई एवं वैज्ञानिक पद्धति से बागवानी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक पहुंचाया जाए। योजना के तहत प्रति एकड़ भूमि पर बागान स्थापित करने हेतु विभिन्न मदों में व्यय का प्रावधान किया गया है।
इसमें भूमि विकास, गड्ढा खोदाई, पौधरोपण सामग्री, उर्वरक, पौध संरक्षण, ट्रेलिस प्रणाली एवं सूक्ष्म सिंचाई जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पात्र किसानों को राज्य सहायता एवं स्वयं के अंश के आधार पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना का लाभ व्यक्तिगत कृषकों एवं कृषक समूहों को दिया जा रहा है।
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मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि जनपद में वर्ष 2024–25 तक सेब (सीडलिंग आधारित) का कुल आच्छादित क्षेत्रफल 233.59 हेक्टेयर था। इसमें फलदार क्षेत्रफल 78.30 हेक्टेयर है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 1537.70 क्विंटल सेब का उत्पादन किया जा रहा है।
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बताया कि मिशन एप्पल योजना के तहत मुनस्यारी एवं धारचूला क्षेत्र में अनुकूल जलवायु का लाभ उठाते हुए सेब उत्पादन को विस्तार दिया जा रहा है। योजना के तहत क्लोनल रूट स्टॉक आधारित उच्च घनत्व वाले सेब बागानों की स्थापना को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ ही वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सेब की उन्नत किस्मों का चयन, आधुनिक सिंचाई एवं वैज्ञानिक पद्धति से बागवानी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक पहुंचाया जाए। योजना के तहत प्रति एकड़ भूमि पर बागान स्थापित करने हेतु विभिन्न मदों में व्यय का प्रावधान किया गया है।
इसमें भूमि विकास, गड्ढा खोदाई, पौधरोपण सामग्री, उर्वरक, पौध संरक्षण, ट्रेलिस प्रणाली एवं सूक्ष्म सिंचाई जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पात्र किसानों को राज्य सहायता एवं स्वयं के अंश के आधार पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना का लाभ व्यक्तिगत कृषकों एवं कृषक समूहों को दिया जा रहा है।