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Pithoragarh News: बुजुर्गों में प्रोस्टेट, तो युवाओं में पथरी की दिक्कत बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 15 Mar 2026 11:58 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय के आंकड़ों के अनुसार बुजुर्गों में प्रोस्टेट और युवाओं में पथरी (स्टोन) की समस्या तेजी से पैर पसार रही है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 60 से अधिक मरीज इन्हीं शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
चिकित्साधिकारी डॉ. आशुतोष जोशी ने बताया कि रोजाना 25 से 45 साल के 30 से अधिक युवा पथरी से ग्रसित मिल रहे हैं। बताया कि आम तौर पर रोजाना 50 से 60 ओपीडी होती है। इनमें 50 से 70 साल के 25 से अधिक बुजुर्ग हर रोज प्रोस्टेट की दिक्कत से जूझते हुए इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
वर्तमान में इन बीमारी से ग्रसित रोगियों के पहुंचने से ओपीडी में भी उछाल आया है। शरीर में हार्मोंस असंतुलन, मोटापा प्रोस्टेट की दिक्कत का प्रमुख कारण है। युवा गलत खानपान के चलते पथरी की चपेट में आ रहे हैं। लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव कर खुद को स्वस्थ रखना होगा। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों का होम्योपैथिक अस्पताल में बेहतर इलाज किया जा रहा है।
बच्चों को सांस लेने में होने लगी दिक्कत
डॉ. आशुतोष जोशी ने बताया कि इन दिनों पांच से 15 वर्ष के अधिकांश बच्चे बलगम वाली खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत से जूझते हुए इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम में बदलाव और वातावरण में फैली धुंध इसका कारण है। अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए। बगैर डॉक्टर की सलाह के बच्चों को दवा खिलाना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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चिकित्साधिकारी डॉ. आशुतोष जोशी ने बताया कि रोजाना 25 से 45 साल के 30 से अधिक युवा पथरी से ग्रसित मिल रहे हैं। बताया कि आम तौर पर रोजाना 50 से 60 ओपीडी होती है। इनमें 50 से 70 साल के 25 से अधिक बुजुर्ग हर रोज प्रोस्टेट की दिक्कत से जूझते हुए इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
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वर्तमान में इन बीमारी से ग्रसित रोगियों के पहुंचने से ओपीडी में भी उछाल आया है। शरीर में हार्मोंस असंतुलन, मोटापा प्रोस्टेट की दिक्कत का प्रमुख कारण है। युवा गलत खानपान के चलते पथरी की चपेट में आ रहे हैं। लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव कर खुद को स्वस्थ रखना होगा। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों का होम्योपैथिक अस्पताल में बेहतर इलाज किया जा रहा है।
बच्चों को सांस लेने में होने लगी दिक्कत
डॉ. आशुतोष जोशी ने बताया कि इन दिनों पांच से 15 वर्ष के अधिकांश बच्चे बलगम वाली खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत से जूझते हुए इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम में बदलाव और वातावरण में फैली धुंध इसका कारण है। अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए। बगैर डॉक्टर की सलाह के बच्चों को दवा खिलाना नुकसानदायक साबित हो सकता है।