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Pithoragarh News: हुनर की ताकत... जूट के धागों से बुनी सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 16 Apr 2026 11:38 PM IST
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चंपावत। जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहीं हैं। उचौलीगोठ ग्राम पंचायत की 10 महिलाओं ने जूट उत्पाद बनाकर न सिर्फ अपनी आमदनी का जरिया बनाया बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की है।
जय लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने जूट के धागों से न सिर्फ बैग बनाए बल्कि अपनी जिंदगी की दिशा भी बदल दी। साल 2018 में 10 महिलाओं ने इस समूह की शुरुआत की थी। उस समय न पर्याप्त पूंजी थी और न ही संसाधन लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा जरूर था। उनका एक छोटा प्रयास आज महिलाओं के सफल उद्यम के रूप में सामने है।
समूह अध्यक्ष पूजा महरा ने बताया कि महिलाएं जूट से बने बैग, फाइल फोल्डर, बोतल कवर, सेविंग किट और कैरी बैग तैयार कर रही हैं इनके उत्पाद पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल हैं। ऐसे समय में जब प्लास्टिक के विकल्प की तलाश की जा रही है। ये महिलाएं एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी हैं।
आज इस समूह की मासिक आय करीब 50 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। समूह से जुड़ी हर महिला प्रतिमाह करीब आठ हजार रुपये तक कमा रही है। यह आमदनी न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधार रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान भी दे रही है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था लेकिन अब वे खुद अपने परिवार का सहारा बन गई हैं। जय लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह आज उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो परिस्थितियों के आगे हार मान लेती हैं।
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जय लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने जूट के धागों से न सिर्फ बैग बनाए बल्कि अपनी जिंदगी की दिशा भी बदल दी। साल 2018 में 10 महिलाओं ने इस समूह की शुरुआत की थी। उस समय न पर्याप्त पूंजी थी और न ही संसाधन लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा जरूर था। उनका एक छोटा प्रयास आज महिलाओं के सफल उद्यम के रूप में सामने है।
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समूह अध्यक्ष पूजा महरा ने बताया कि महिलाएं जूट से बने बैग, फाइल फोल्डर, बोतल कवर, सेविंग किट और कैरी बैग तैयार कर रही हैं इनके उत्पाद पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल हैं। ऐसे समय में जब प्लास्टिक के विकल्प की तलाश की जा रही है। ये महिलाएं एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी हैं।
आज इस समूह की मासिक आय करीब 50 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। समूह से जुड़ी हर महिला प्रतिमाह करीब आठ हजार रुपये तक कमा रही है। यह आमदनी न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधार रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान भी दे रही है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था लेकिन अब वे खुद अपने परिवार का सहारा बन गई हैं। जय लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह आज उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो परिस्थितियों के आगे हार मान लेती हैं।
