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Rishikesh News: बापूग्राम को राजस्व ग्राम घोषित करने की उठी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 16 Jan 2026 02:23 AM IST
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बापूग्राम में जमीन और घर बचाने को लेकर उमड़ुी भीड़। स्रोत जागरूक पाठक।
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ऋषिकेश के बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर और शिवाजीनगर समेत कई क्षेत्रों में वन विभाग की हालिया कार्रवाई के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित विशाल जनसभा में स्थानीय नागरिकों ने केंद्र और प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए दो टूक कहा कि इन क्षेत्रों को तत्काल राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाए, ताकि वर्षों से रह रहे लोगों का अस्तित्व सुरक्षित हो सके।
बृहस्पतिवार को आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र की वन भूमि समस्या पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ऋषिकेश क्षेत्र के हजारों परिवारों पर बेघर होने का संकट आ खड़ा हुआ है। यह वह जनता है जो बीते 50-60 वर्षों से यहां बसी हुई है और जिसे सरकारों ने स्वयं बिजली, पानी, सड़क और नगर निगम जैसी सुविधाएं दी हैं।
समिति के संयोजक रमेश जुगलान ने कहा कि हम चाहते हैं कि विधानसभा के इस विशेष सत्र में सरकार केवल जुबानी आश्वासन न दे, बल्कि सदन के पटल पर एक ठोस प्रस्ताव पास करें। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाए, ताकि इस आबादी वाले क्षेत्र को वन संरक्षण अधिनियम से बाहर करके इसे राजस्व ग्राम घोषित किया जा सके।
जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ और भूमि अधिग्रहण पर पूर्ण विराम लगाने की गारंटी सदन में ली जाए। ऋषिकेश के हजारों बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अपनी छत बचाने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार से टकटकी लगाए हुए हैं। इस दौरान अविनाश सेमल्टी, अनिल रावत, हर्षवर्धन रावत, सत्य कपरवाण, बीरेंद्र रमोला आदि मौजूद रहे।
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जल्द होगा जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक
वन क्षेत्राधिकारी गंभीर सिंह धमांदा ने कहा कि बृहस्पतिवार को सिर्फ कागजी कार्रवाई की गई है। जल्द स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में नगर निगम, तहसील प्रशासन भी मौजूद रहेगा। बैठक के निर्णय के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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बृहस्पतिवार को आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र की वन भूमि समस्या पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ऋषिकेश क्षेत्र के हजारों परिवारों पर बेघर होने का संकट आ खड़ा हुआ है। यह वह जनता है जो बीते 50-60 वर्षों से यहां बसी हुई है और जिसे सरकारों ने स्वयं बिजली, पानी, सड़क और नगर निगम जैसी सुविधाएं दी हैं।
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समिति के संयोजक रमेश जुगलान ने कहा कि हम चाहते हैं कि विधानसभा के इस विशेष सत्र में सरकार केवल जुबानी आश्वासन न दे, बल्कि सदन के पटल पर एक ठोस प्रस्ताव पास करें। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाए, ताकि इस आबादी वाले क्षेत्र को वन संरक्षण अधिनियम से बाहर करके इसे राजस्व ग्राम घोषित किया जा सके।
जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ और भूमि अधिग्रहण पर पूर्ण विराम लगाने की गारंटी सदन में ली जाए। ऋषिकेश के हजारों बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अपनी छत बचाने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार से टकटकी लगाए हुए हैं। इस दौरान अविनाश सेमल्टी, अनिल रावत, हर्षवर्धन रावत, सत्य कपरवाण, बीरेंद्र रमोला आदि मौजूद रहे।
जल्द होगा जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक
वन क्षेत्राधिकारी गंभीर सिंह धमांदा ने कहा कि बृहस्पतिवार को सिर्फ कागजी कार्रवाई की गई है। जल्द स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में नगर निगम, तहसील प्रशासन भी मौजूद रहेगा। बैठक के निर्णय के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

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