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Rishikesh News: त्रिवेणी घाट पर होलिका पूजन के लिए उमड़े लोग
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Tue, 03 Mar 2026 02:25 AM IST
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06- त्रिवेणी घाट पर होलिका पूजन करते श्रद्धालु।संवाद
- फोटो : Samvad
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तीर्थनगरी में ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर के प्रत्येक चौक-चौराहे पर होलिका पूजन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। विशेष रूप से त्रिवेणी घाट परिसर में होलिका पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जहां दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है। मान्यता के अनुसार श्रद्धालु प्रातः काल से ही गाय के गोबर के उपले, अनाज, नमक, पीली सरसों, कपूर, हरी इलायची, लौंग और गुड़ अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।
पं. आदित्य शर्मा ने बताया कि होली पर्व पर होलिका दहन का विशेष धार्मिक महत्व है। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग होलिका पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु उपलों की माला बनाकर होलिका की पूजा करते हैं, जिसे होलिका के अंग के रूप में मान्यता है।
पं. शर्मा के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन रात्रि 1:30 बजे किया गया। दहन से पूर्व रात्रि 1:23 बजे प्रह्लाद, जो ध्वज रूप में विराजमान होते हैं, उन्हें होलिका से उतारा जाएगा, इसके बाद विधिवत होलिका दहन होगा।
होलिका दहन के अवसर पर त्रिवेणी घाट पर विशेष आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें युवाओं के लिए गुलाल की होली और महिलाओं के लिए लड्डू की होली की व्यवस्था है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका की अग्नि में नई फसल की बालियां अर्पित करने से घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती और सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं, होलिका की राख को शुभ और रोगनाशक माना जाता है, जिससे श्रद्धालु इसका तिलक भी करते हैं।
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हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है। मान्यता के अनुसार श्रद्धालु प्रातः काल से ही गाय के गोबर के उपले, अनाज, नमक, पीली सरसों, कपूर, हरी इलायची, लौंग और गुड़ अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।
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पं. आदित्य शर्मा ने बताया कि होली पर्व पर होलिका दहन का विशेष धार्मिक महत्व है। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग होलिका पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु उपलों की माला बनाकर होलिका की पूजा करते हैं, जिसे होलिका के अंग के रूप में मान्यता है।
पं. शर्मा के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन रात्रि 1:30 बजे किया गया। दहन से पूर्व रात्रि 1:23 बजे प्रह्लाद, जो ध्वज रूप में विराजमान होते हैं, उन्हें होलिका से उतारा जाएगा, इसके बाद विधिवत होलिका दहन होगा।
होलिका दहन के अवसर पर त्रिवेणी घाट पर विशेष आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें युवाओं के लिए गुलाल की होली और महिलाओं के लिए लड्डू की होली की व्यवस्था है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका की अग्नि में नई फसल की बालियां अर्पित करने से घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती और सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं, होलिका की राख को शुभ और रोगनाशक माना जाता है, जिससे श्रद्धालु इसका तिलक भी करते हैं।

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