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ऋषिकेश: राजाजी टाइगर रिजर्व में बढ़ेगा बाघों का कुनबा, जनवरी में कॉर्बेट से लाए जाएंगे पांच और बाघ

Mon, 02 Nov 2026 02:14 PM IST
Renu Saklani राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेसी, ऋषिकेश
राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Mon, 02 Nov 2026 02:14 PM IST
सार

राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। इसके तहत तीन बाघिन और दो बाघ कॉर्बेट से लाए जाएंगे। बाघों की निगरानी और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वनकर्मियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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Rajaji tiger reserve to bring five more tigers from corbett in january forest staff training planned in nov g
राजाजी टाइगर रिजर्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजाजी टाइगर रिजर्व में अगले वर्ष जनवरी माह में बाघों का कुनबा बढ़ेगा। पार्क प्रशासन बाघ शिफ्टिंग योजना के दूसरे चरण के तहत कार्बेट नेशनल पार्क से यहां पांच और बाघ शिफ्ट करने जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि जनवरी के पहले पखवाड़े तक नए बाघों को लाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके लिए राजाजी के साथ देहरादून, रायवाला और हरिद्वार वन प्रभाग के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले चरण के तहत वर्ष 2020 से 2025 तक यहां पांच बाघ शिफ्ट किए गए थे।

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पिछले कई वर्षों से राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के मार्गदर्शन में बाघ पुनर्वास परियोजना शुरू की गई थी। इसी वर्ष जून माह में पार्क प्रशासन को कार्बेट नेशनल पार्क से पांच और बाघों को लाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से सहमति मिली थी।इनमें तीन बाघिन और दो बाघ शामिल हैं। पार्क प्रशासन ने इसके लिए एनटीसीए के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया था। इससे क्षेत्र पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों के कुनबे के विस्तार और जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जगी थी।

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पार्क प्रशासन के अनुसार पिछले बाघों के पुनर्वास के दौरान सामने आई चुनौतियों को देखते हुए इस बार व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। कर्मचारियों को बाघों की निगरानी, उनके पदचिह्न और अन्य प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संकेतों की पहचान करने के साथ ही कैमरा ट्रैप लगाने और आपसी समन्वय का प्रशिक्षण दिया जा। रहा है। यह प्रशिक्षण डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। नंवबर माह में यूपी-हिमाचल और हरियाणा के वनकर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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2016 में बनी थी बाघ शिफ्टिंग योजना

राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघ शिफ्टिंग योजना वर्ष 2016 में बनाई गई थी। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से इसे मंजूरी मिली। 24 दिसम्बर 2020 को पहले बाघ को मोतीचूर में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद नौ जनवरी 2021 को बाघिन, 20 मई 2023 को बाघिन, 16 मार्च 2024 को बाघिन और अब एक मई 2025 को एक बाघ को यहां शिफ्ट किया गया। जिसके चलते यहां बाघों की संख्या पांच हो गई थी। जिसमें दो बाघ व तीन बाघिन शामिल थे। एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म भी दिया था, हालांकि चारों शावक बच नहीं पाए थे। अभी भी दो मादा व एक नर बाघ पार्क क्षेत्र में ही हैं। वहीं दो बाघिनें काफी लंबे समय से ट्रेस नहीं हो पा रही हैं। आशंका जताई जा रही हैं कि दोनों बाघिनें पार्क क्षेत्र से बाहर हिमाचल की सीमा में चली गई हैं। पार्क प्रशासन दोनों की लोकेशन ट्रेस करने के प्रयास कर रहे हैं।

पूर्व में उम्मीदों को लगा था झटका

राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन नेशनल पार्क के पश्चिमी हिस्से में बाघों की आबादी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। वर्ष 2024 में यहां बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया तो राजाजी प्रशासन को उम्मीदें भी जगीं, लेकिन इस कवायद को झटका तब लगा जब दो शावकों को गुलदार ने हमला कर शिकार बना लिया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गुलदार के निशान सामने आए थे। हालांकि बाद में दो शावकों का भी पता नहीं चल पाया था।

बाघ विहीन था पश्चिमी क्षेत्र

राजाजी टाइगर रिजर्व में कुल 55 बाघ हैं। सभी बाघ पूर्वी क्षेत्र में हैं क्योंकि यह क्षेत्र नेशनल कार्बेट पार्क से जुड़ा हुआ है। पश्चिमी हिस्सा बाघ विहीन हो गया था। अत्यधिक मानवीय निर्मित अवरोधों के चलते बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था। राजाजी नेशनल पार्क गंगा के कारण पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में बंटा हुआ है। पूर्वी क्षेत्र में तीन रेंज (गौरी, चोला व रवासन रेंज) और पश्चिमी क्षेत्र में सात रेंज (हरिद्वार, कांसरो, मोतीचूर, धोलखंड, बेरीबाड़ा, चीलावाली व रामगढ़) हैं। पश्चिमी क्षेत्र में मानव निर्मित अवरोध सड़कें व चीला नहर आदि होने से यहां बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था जबकि यहां प्रचुर मात्रा में संसाधन हैं। यह क्षेत्र कहीं ज्यादा बाघों को वहन कर सकता है।

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- कर्मचारियों को बाघों की निगरानी, उनके पदचिह्न और अन्य प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संकेतों की पहचान करने के साथ ही कैमरा ट्रैप लगाने और आपसी समन्वय का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। जल्द पांच और बाघों को यहां शिफ्ट किया जाएगा। -कोको रोशो, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क।

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