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Roorkee News: हरिद्वार से खुर्जा तक कांवड़ लेकर जा रहीं 82 साल की दादी
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उम्र के इस पड़ाव पर जब शरीर को आराम करने की जरूरत होती है वहीं 82 वर्षीय दादी राजकुमारी अपनी अटूट आस्था और दृढ़ संकल्प से लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर बुलंदशहर, तहसील खुर्जा तक पैदल कांवड़ यात्रा कर रही हैं।
तपती सड़क, लंबी दूरी और शारीरिक थकान भी उनके कदमों को नहीं रोक पा रही है। गंगाजल और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास के साथ वह प्रतिदिन लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय कर रही हैं।
दादी राजकुमारी अपने बेटे अनिल शर्मा और पोते रोहित के साथ पहली बार हरिद्वार से गंगाजल भरकर पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। उन्होंने बताया कि उनकी इस यात्रा का मकसद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भविष्य में प्रधानमंत्री के रूप में देखना है।
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अनिल शर्मा ने बताया कि यह उनकी 25वीं कांवड़ यात्रा है जबकि उनके बेटे रोहित की 21 लीटर गंगाजल के साथ यह दूसरी कांवड़ यात्रा है। इससे पहले रोहित 42 लीटर गंगाजल की कांवड़ भी लेकर जा चुका है।
उन्होंने कहा कि जब मन में सच्ची आस्था और विश्वास हो तो उम्र और कठिनाइयां मायने नहीं रखतीं। बेटे और पोते के साथ यात्रा कर रहीं दादी राजकुमारी के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि संतोष और अटूट विश्वास झलक रहा है। दादी राजकुमारी ने कहा कि सच्ची आस्था उम्र की मोहताज नहीं होती और भगवान के प्रति समर्पण हर कठिन रास्ते को आसान बना देता है।
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तपती सड़क, लंबी दूरी और शारीरिक थकान भी उनके कदमों को नहीं रोक पा रही है। गंगाजल और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास के साथ वह प्रतिदिन लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय कर रही हैं।
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दादी राजकुमारी अपने बेटे अनिल शर्मा और पोते रोहित के साथ पहली बार हरिद्वार से गंगाजल भरकर पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। उन्होंने बताया कि उनकी इस यात्रा का मकसद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भविष्य में प्रधानमंत्री के रूप में देखना है।
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अनिल शर्मा ने बताया कि यह उनकी 25वीं कांवड़ यात्रा है जबकि उनके बेटे रोहित की 21 लीटर गंगाजल के साथ यह दूसरी कांवड़ यात्रा है। इससे पहले रोहित 42 लीटर गंगाजल की कांवड़ भी लेकर जा चुका है।
उन्होंने कहा कि जब मन में सच्ची आस्था और विश्वास हो तो उम्र और कठिनाइयां मायने नहीं रखतीं। बेटे और पोते के साथ यात्रा कर रहीं दादी राजकुमारी के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि संतोष और अटूट विश्वास झलक रहा है। दादी राजकुमारी ने कहा कि सच्ची आस्था उम्र की मोहताज नहीं होती और भगवान के प्रति समर्पण हर कठिन रास्ते को आसान बना देता है।