{"_id":"69677c007d407879b509200b","slug":"the-terror-of-stray-dogs-is-showing-no-signs-of-stopping-roorkee-news-c-5-1-drn1027-878457-2026-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Roorkee News: लावारिस कुत्तों का आतंक नहीं ले रहा थमने का नाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Roorkee News: लावारिस कुत्तों का आतंक नहीं ले रहा थमने का नाम
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर और देहात में लावारिस कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गलियों, मोहल्लों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर झुंड बनाकर घूम रहे कुत्ते आम लोगों के लिए डर का कारण बने हुए हैं। सिविल अस्पताल में रोजाना 50 लोग कुत्ते के काटने के बाद इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
बुधवार को सिविल अस्पताल में कुत्ते के काटने पर दोपहर करीब 12 बजे तक 55 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे। इनमें 25 नए मरीज शामिल हैं। वहीं 30 पुराने मरीज एंटी रेबीज की दूसरी और तीसरी डोज लगवाने के लिए अस्पताल पहुंचे। रामनगर निवासी विनोद ने बताया कि सुबह और शाम के समय सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है।
स्कूल एवं ट्यूशन जाने वाले बच्चे और बुजुर्गों को खासा डर सताता है। उन्होंने बताया कि सोमवार को भी एक कुत्ते ने महिला पर हमला कर दिया था जिससे वह घायल हो गई थी। उन्होंने बताया कि सड़कों पर चल रहे दोपहिया वाहनों के पीछे इनके दौड़ने से कई बार वाहन चालक गिरकर घायल तक हो गए हैं। सिविल अस्पताल के डॉ़ मशरूफ अली ने बताया कि डॉग बाइट के मामलों में रोजाना 50 प्रतिशत से अधिक मरीज एंटी-रेबीज इंजेक्शन और प्राथमिक उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
गणेशपुर निवासी संजय ने कहा कि शहर के कई इलाकों में बच्चों का अकेले बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि स्कूल जाते समय या गली में खेलते वक्त बच्चे कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। वहीं बुजुर्गों के लिए यह समस्या और भी गंभीर है क्योंकि वे तेजी से भाग नहीं पाते और आसानी से निशाना बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम की ओर से समय-समय पर लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की बात कही जाती है लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा है।
Trending Videos
बुधवार को सिविल अस्पताल में कुत्ते के काटने पर दोपहर करीब 12 बजे तक 55 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे। इनमें 25 नए मरीज शामिल हैं। वहीं 30 पुराने मरीज एंटी रेबीज की दूसरी और तीसरी डोज लगवाने के लिए अस्पताल पहुंचे। रामनगर निवासी विनोद ने बताया कि सुबह और शाम के समय सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्कूल एवं ट्यूशन जाने वाले बच्चे और बुजुर्गों को खासा डर सताता है। उन्होंने बताया कि सोमवार को भी एक कुत्ते ने महिला पर हमला कर दिया था जिससे वह घायल हो गई थी। उन्होंने बताया कि सड़कों पर चल रहे दोपहिया वाहनों के पीछे इनके दौड़ने से कई बार वाहन चालक गिरकर घायल तक हो गए हैं। सिविल अस्पताल के डॉ़ मशरूफ अली ने बताया कि डॉग बाइट के मामलों में रोजाना 50 प्रतिशत से अधिक मरीज एंटी-रेबीज इंजेक्शन और प्राथमिक उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
गणेशपुर निवासी संजय ने कहा कि शहर के कई इलाकों में बच्चों का अकेले बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि स्कूल जाते समय या गली में खेलते वक्त बच्चे कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। वहीं बुजुर्गों के लिए यह समस्या और भी गंभीर है क्योंकि वे तेजी से भाग नहीं पाते और आसानी से निशाना बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम की ओर से समय-समय पर लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की बात कही जाती है लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा है।