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Rudraprayag News: माधो सिंह भंडारी के जीवन की कहानी देख भावुक हुए दर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Sat, 10 Jan 2026 06:47 PM IST
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- गढ़वाली कविताओं ने बांधा समा
- रुद्रनाथ महोत्सव के चौथे दिन विभिन्न आयोजनों ने जीता दिल
रुद्रप्रयाग।शनिवार को रुद्रनाथ महोत्सव व शीतकालीन उत्सव मेले के चौथे दिन विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन हुए। इस मौके पर तिलणी की महिलाओं की ओर से माधो सिंह भंडारी के जीवन पर आधारित नाटक मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। नाटक में माधोसिंह भंडारी वीर का मलेथा की सूखती जमीनों के लिए अपने बेटे का बलिदान देने व कठिन परिश्रम से पहाड़ों को काटकर मलेथा की बंजर जमीनों को सिंचाई के लिए पानी पहुंवाने के दृश्य देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। उनके मार्मिक मंचन को देखकर दर्शकों के आंखों में आंसू आ गए। इससे पहले मुख्य अतिथि गुप्तकाशी नगर पंचायत अध्यक्ष विशेश्वरी देवी ने आयोजन समिति को बेहतर आयोजन की बधाई दी। वहीं कीर्तन मंडली अमसारी की महिलाओं ने भी रामी बौराणी नृत्य नाटिका का मंचन किया। सात से 13 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में दूर-दूर से लोग पहुंचकर पहाड़ की लोकसंस्कृति व लोकगायन लुत्फ ले रहे हैं।
गढ़वाली हास्य कविताओं सुन लोट पोट हुए दर्शक
रुद्रनाथ महोत्सव के चौथे दिन गढ़वाली हास्य कविताओं ने जहां लोगों को लोट पोट कर दिया। वहीं सामाजिक मुद्दों पर आधारित कविताओं ने लोगों को सोचने पर भी मजबूर किया। कलश संस्था की ओर से आयोजित गढ़वाली कवि सम्मेलन में कवियों ने विभिन्न विषयों पर गढ़वाली कविता पाठ किया। संस्था के संयोजक ओम प्रकाश सेमवाल ने दुख मा सुख खोजणै ऋतु लैगे, मुरली दीवान ने कटी अब उकाल भुला ब्वे का सौं, बीना बेंजवाल बेट्यूं तैं मैत बुलौंद पूस, गिरीश सुन्दरियाल उच्चि डांडी कांठ्यूं मा अटगणू च ह्यूंद, ओम बधाणी भुला अब ज्वानी कु बसंत पैटण बैठीगे, मोहन वशिष्ठ भैजि जु सु आंदोलनों मा हर जगा सरीक रै, बृजेश रावत जनम पत्रि कट्ठा कैरि कैरी अलमरि पर चट्टा लगी, अश्विनी गौड़ सरकार ब्वनी गुगल पे, जी पे कैसलेस पे, कुसुम भट्ट बेटि छौं ब्वारि छौं भारतै नारि छौ कविता दर्शकों को सुनाई। इन कविताओं को सुन दर्शक ठहाके लगाते हुए दिखे, वहीं गंभीर मुद्दों पर कविताओं ने सोचने पर मजबूर कर दिया।
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- रुद्रनाथ महोत्सव के चौथे दिन विभिन्न आयोजनों ने जीता दिल
रुद्रप्रयाग।शनिवार को रुद्रनाथ महोत्सव व शीतकालीन उत्सव मेले के चौथे दिन विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन हुए। इस मौके पर तिलणी की महिलाओं की ओर से माधो सिंह भंडारी के जीवन पर आधारित नाटक मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। नाटक में माधोसिंह भंडारी वीर का मलेथा की सूखती जमीनों के लिए अपने बेटे का बलिदान देने व कठिन परिश्रम से पहाड़ों को काटकर मलेथा की बंजर जमीनों को सिंचाई के लिए पानी पहुंवाने के दृश्य देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। उनके मार्मिक मंचन को देखकर दर्शकों के आंखों में आंसू आ गए। इससे पहले मुख्य अतिथि गुप्तकाशी नगर पंचायत अध्यक्ष विशेश्वरी देवी ने आयोजन समिति को बेहतर आयोजन की बधाई दी। वहीं कीर्तन मंडली अमसारी की महिलाओं ने भी रामी बौराणी नृत्य नाटिका का मंचन किया। सात से 13 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में दूर-दूर से लोग पहुंचकर पहाड़ की लोकसंस्कृति व लोकगायन लुत्फ ले रहे हैं।
गढ़वाली हास्य कविताओं सुन लोट पोट हुए दर्शक
रुद्रनाथ महोत्सव के चौथे दिन गढ़वाली हास्य कविताओं ने जहां लोगों को लोट पोट कर दिया। वहीं सामाजिक मुद्दों पर आधारित कविताओं ने लोगों को सोचने पर भी मजबूर किया। कलश संस्था की ओर से आयोजित गढ़वाली कवि सम्मेलन में कवियों ने विभिन्न विषयों पर गढ़वाली कविता पाठ किया। संस्था के संयोजक ओम प्रकाश सेमवाल ने दुख मा सुख खोजणै ऋतु लैगे, मुरली दीवान ने कटी अब उकाल भुला ब्वे का सौं, बीना बेंजवाल बेट्यूं तैं मैत बुलौंद पूस, गिरीश सुन्दरियाल उच्चि डांडी कांठ्यूं मा अटगणू च ह्यूंद, ओम बधाणी भुला अब ज्वानी कु बसंत पैटण बैठीगे, मोहन वशिष्ठ भैजि जु सु आंदोलनों मा हर जगा सरीक रै, बृजेश रावत जनम पत्रि कट्ठा कैरि कैरी अलमरि पर चट्टा लगी, अश्विनी गौड़ सरकार ब्वनी गुगल पे, जी पे कैसलेस पे, कुसुम भट्ट बेटि छौं ब्वारि छौं भारतै नारि छौ कविता दर्शकों को सुनाई। इन कविताओं को सुन दर्शक ठहाके लगाते हुए दिखे, वहीं गंभीर मुद्दों पर कविताओं ने सोचने पर मजबूर कर दिया।
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