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Rudraprayag News: सिरोहबगड़ में 95.12 करोड़ की लागत से होगा भूस्खलन ट्रीटमेंट कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Sun, 11 Jan 2026 05:14 PM IST
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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से मिली स्वीकृति
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ-केदारनाथ हाईवे के सबसे संवेदनशील क्षेत्र भूस्खलन जोन सिरोहबगड़ का अब 95.12 करोड़ की लागत से ट्रीटमेंट किया जाएगा। इस कार्य के लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से स्वीकृति प्रदान की गई है।
सिरोहबगड़ क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय भूस्खलन जोन यात्रियों, स्थानीय लोगों व प्रशासन के लिए सरदर्द बना हुआ था। अब परियोजना के अंतर्गत सिरोहबगड़ में 350.767 से 350.938 तक भूस्खलन क्षेत्र का उपचार कराया जाएगा। इससे पूर्व राज्य लोक निर्माण विभाग की ओर से 96.11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था जिसे परीक्षण के बाद मंत्रालय स्तर पर संशोधित करते हुए स्वीकृति दी गई। इसके तहत ढीली चट्टानों की स्केलिंग, पहाड़ी ढलानों का सुदृढ़ीकरण आदि कार्य किए जाएंगे। यह कार्य ईपीसी आधार पर किया जाएगा और जल्द इसके ट्रीटमेंट का कार्य शुरू हो जाएगा। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि सिरोहबगड़ ट्रीटमेंट कार्य की स्वीकृति से हाईवे पर यातायात अधिक सुरक्षित होगा और चारधाम यात्रा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सुगम होगी।
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रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ-केदारनाथ हाईवे के सबसे संवेदनशील क्षेत्र भूस्खलन जोन सिरोहबगड़ का अब 95.12 करोड़ की लागत से ट्रीटमेंट किया जाएगा। इस कार्य के लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से स्वीकृति प्रदान की गई है।
सिरोहबगड़ क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय भूस्खलन जोन यात्रियों, स्थानीय लोगों व प्रशासन के लिए सरदर्द बना हुआ था। अब परियोजना के अंतर्गत सिरोहबगड़ में 350.767 से 350.938 तक भूस्खलन क्षेत्र का उपचार कराया जाएगा। इससे पूर्व राज्य लोक निर्माण विभाग की ओर से 96.11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था जिसे परीक्षण के बाद मंत्रालय स्तर पर संशोधित करते हुए स्वीकृति दी गई। इसके तहत ढीली चट्टानों की स्केलिंग, पहाड़ी ढलानों का सुदृढ़ीकरण आदि कार्य किए जाएंगे। यह कार्य ईपीसी आधार पर किया जाएगा और जल्द इसके ट्रीटमेंट का कार्य शुरू हो जाएगा। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि सिरोहबगड़ ट्रीटमेंट कार्य की स्वीकृति से हाईवे पर यातायात अधिक सुरक्षित होगा और चारधाम यात्रा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सुगम होगी।
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