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Rudraprayag News: प्राकृतिक नौला और धारों का डाटा संकलित होगा
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Thu, 01 Jan 2026 07:23 PM IST
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जिला स्तरीय कार्यशाला में हुई चर्चा
रुद्रप्रयाग। जनपद में स्थित प्राकृतिक नौला, पंदेरा, धारों की स्थिति क्या है इसको लेकर जल्द पटवारी व अन्य फील्ड अधिकारियों की मदद से ऐप के माध्यम से डाटा संकलित किया जाएगा। बीते कुछ वर्षों में राज्यभर में ऐसे कई प्राकृतिक स्रोत थे जो अब सूख चुके हैं। खासकर पहाड़ी जिलों में ग्रामीण इन्हीं स्रोतों पर निर्भर थे, ऐसे में राज्य की ओर से सूखती जलधाराओं का हाल जानने के लिए यह डेटा संकलित किया जा रहा है।
बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में इसी संबंध में एक जिला स्तरीय कार्यशाला हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि संगणना के माध्यम से जिले में उपलब्ध लघु, मध्यम एवं वृहद सिंचाई संरचनाओं, विभिन्न जल निकायों तथा जल स्रोतों का सटीक एवं विश्वसनीय डाटा तैयार किया जाना है। लघु सिंचाई के अधिशासी अभियंता मोहन लिए आर्य ने कहा कि संगणना कार्य शासन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिससे जिले में उपलब्ध जल संसाधनों की वास्तविक स्थिति सामने आती है। कार्यशाला मास्टर ट्रेनर राहुल शर्मा ने कहा कि आंकड़ों के आधार पर सूखते जलस्रोतों के संरक्षण एवं उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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रुद्रप्रयाग। जनपद में स्थित प्राकृतिक नौला, पंदेरा, धारों की स्थिति क्या है इसको लेकर जल्द पटवारी व अन्य फील्ड अधिकारियों की मदद से ऐप के माध्यम से डाटा संकलित किया जाएगा। बीते कुछ वर्षों में राज्यभर में ऐसे कई प्राकृतिक स्रोत थे जो अब सूख चुके हैं। खासकर पहाड़ी जिलों में ग्रामीण इन्हीं स्रोतों पर निर्भर थे, ऐसे में राज्य की ओर से सूखती जलधाराओं का हाल जानने के लिए यह डेटा संकलित किया जा रहा है।
बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में इसी संबंध में एक जिला स्तरीय कार्यशाला हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि संगणना के माध्यम से जिले में उपलब्ध लघु, मध्यम एवं वृहद सिंचाई संरचनाओं, विभिन्न जल निकायों तथा जल स्रोतों का सटीक एवं विश्वसनीय डाटा तैयार किया जाना है। लघु सिंचाई के अधिशासी अभियंता मोहन लिए आर्य ने कहा कि संगणना कार्य शासन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिससे जिले में उपलब्ध जल संसाधनों की वास्तविक स्थिति सामने आती है। कार्यशाला मास्टर ट्रेनर राहुल शर्मा ने कहा कि आंकड़ों के आधार पर सूखते जलस्रोतों के संरक्षण एवं उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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