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Tehri News: संसाधनों के अभाव में जूझ रहा है बालगंगा महाविद्यालय
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Wed, 25 Mar 2026 06:29 PM IST
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कक्ष और प्रयोगशालाओं का बना है टोटा, अधर लटका तीन मंजिला भवन निर्माण
घनसाली (टिहरी)। बालगंगा महाविद्यालय में कक्षा-कक्षों और प्रयोगशालाओं का अभाव छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। हर साल बढ़ती छात्रसंख्या के बावजूद संसाधनों का विस्तार नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वर्तमान में महाविद्यालय में करीब 700 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। कक्षा-कक्ष और प्रयोगशालाओं की संख्या 15 तक ही सीमित रह गई है।
महाविद्यालय में सबसे अधिक दिक्कत विज्ञान संकाय के छात्रों को हो रही है। प्रयोगशालाओं के अभाव में छोटे-छोटे कमरों में ही प्रयोगात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। भिलंगना टिहरी जिले का सबसे बड़ा विकासखंड है जहां 180 ग्राम पंचायतें आती हैं। उच्च शिक्षा के लिए यही एकमात्र संस्थान है। वर्ष 1991 में क्षेत्रीय लोगों ने अपने संसाधनों से सेंदुल में निजी भवन पर महाविद्यालय की स्थापना की थी। बाद में छात्रसंख्या बढ़ने पर ग्रामीणों ने 50 नाली भूमि दान में दी, जिसके बाद बालगंगा शिक्षा प्रसार समिति ने वर्ष 2001 में भवन निर्माण कराया।
वर्ष 2015-16 में महाविद्यालय में विज्ञान संकाय शुरू होने के बाद छात्र संख्या में तेजी से वृद्धि हुई लेकिन आधारभूत सुविधाओं का विस्तार उस अनुपात में नहीं हो सका। स्थानीय लोगों की मांग पर टीएचडीसी ने एक तीन मंजिला भवन स्वीकृत किया गया था, लेकिन दो वर्ष पूर्व पहली मंजिल का निर्माण पूरा होने के बाद शेष कार्य अधूरा पड़ा है।
छात्र संख्या मानक के अनुसार कक्षा-कक्षों की काफी कमी बनी हुई है। सेवा टीएचडीसी ने जो तीन मंजिला भवन बनाना था उसका कार्य पूरा करने के लिए बार-बार टीएचडीसी को पत्र भेजकर उसे पूरा करने का अनुरोध किया जा रहा है।
-डाॅ. बिपिन चंद्र उनियाल, प्राचार्य बालगंगा महाविद्यालय घनसाली
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घनसाली (टिहरी)। बालगंगा महाविद्यालय में कक्षा-कक्षों और प्रयोगशालाओं का अभाव छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। हर साल बढ़ती छात्रसंख्या के बावजूद संसाधनों का विस्तार नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वर्तमान में महाविद्यालय में करीब 700 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। कक्षा-कक्ष और प्रयोगशालाओं की संख्या 15 तक ही सीमित रह गई है।
महाविद्यालय में सबसे अधिक दिक्कत विज्ञान संकाय के छात्रों को हो रही है। प्रयोगशालाओं के अभाव में छोटे-छोटे कमरों में ही प्रयोगात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। भिलंगना टिहरी जिले का सबसे बड़ा विकासखंड है जहां 180 ग्राम पंचायतें आती हैं। उच्च शिक्षा के लिए यही एकमात्र संस्थान है। वर्ष 1991 में क्षेत्रीय लोगों ने अपने संसाधनों से सेंदुल में निजी भवन पर महाविद्यालय की स्थापना की थी। बाद में छात्रसंख्या बढ़ने पर ग्रामीणों ने 50 नाली भूमि दान में दी, जिसके बाद बालगंगा शिक्षा प्रसार समिति ने वर्ष 2001 में भवन निर्माण कराया।
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वर्ष 2015-16 में महाविद्यालय में विज्ञान संकाय शुरू होने के बाद छात्र संख्या में तेजी से वृद्धि हुई लेकिन आधारभूत सुविधाओं का विस्तार उस अनुपात में नहीं हो सका। स्थानीय लोगों की मांग पर टीएचडीसी ने एक तीन मंजिला भवन स्वीकृत किया गया था, लेकिन दो वर्ष पूर्व पहली मंजिल का निर्माण पूरा होने के बाद शेष कार्य अधूरा पड़ा है।
छात्र संख्या मानक के अनुसार कक्षा-कक्षों की काफी कमी बनी हुई है। सेवा टीएचडीसी ने जो तीन मंजिला भवन बनाना था उसका कार्य पूरा करने के लिए बार-बार टीएचडीसी को पत्र भेजकर उसे पूरा करने का अनुरोध किया जा रहा है।
-डाॅ. बिपिन चंद्र उनियाल, प्राचार्य बालगंगा महाविद्यालय घनसाली