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Tehri News: रानीचौरी की महिलाओं की ओर से बनाया गया हर्बल गुलाल बाजार में छाया
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Fri, 27 Feb 2026 06:44 PM IST
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नई टिहरी। इस बार होली पर रानीचौरी की महिलाओं के हाथों से तैयार किया गया हर्बल गुलाल बाजार में खास पहचान बना रहा है। मानवाधिकार संरक्षण एवं ग्रामीण विकास समिति के अंतर्गत संचालित आराधना लघु उद्योग से जुड़ी महिलाओं ने फूलों और प्राकृतिक सामग्री से गुलाल तैयार कर स्थानीय बाजारों में उतारा है। करीब आठ कुंतल हर्बल गुलाल तैयार किया जा चुका है, जिसकी मांग नई टिहरी सहित आसपास के क्षेत्रों और ऑनलाइन माध्यम से भी मिल रही है।
महिला समूह पिछले एक पखवाड़े से होली के लिए विशेष तैयारियों में जुटा रहा। तैयार गुलाल की पैकिंग कर नई टिहरी, बौराड़ी, बीपुरम, कोटीकॉलोनी, चंबा, बादशाहीथौल, आगराखाल और नरेंद्रनगर समेत अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति की जा रही है। मांग पर संस्था की ओर से उपभोक्ताओं के पते पर भी रंग उपलब्ध कराया जा रहा हैं।
संस्था के अध्यक्ष संजय बहुगुणा और आराधना लघु उद्योग की सुषमा बहुगुणा के नेतृत्व में समूह की महिलाओं ने पारंपरिक और प्राकृतिक विधि से रंग तैयार किए हैं। सुषमा बहुगुणा ने बताया कि बादशाहीथौल बंगाचली सहकारिता मेले में लगाए गए स्टॉल पर पिछले सात दिनों के भीतर लगभग दो कुंतल हर्बल रंगों की बिक्री हुई। संजय बहुगुणा ने बताया कि हर्बल गुलाल पूरी तरह सुरक्षित है और इसे बनाने में फूलों का बुरादा, सब्जियों का रस, अरारोट पाउडर और मुल्तानी मिट्टी का उपयोग किया जाता है। गेंदा, गुड़हल और गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीसा जाता है। फिर इसे अरारोट या कॉर्नफ्लोर के साथ मिलाकर छाना जाता है, जिससे मुलायम गुलाल तैयार होता है। चुकंदर से गहरा गुलाबी, पालक से हरा और गाजर से नारंगी रंग बनाया जाता है। खुशबू के लिए नींबू और चंदन तेल की कुछ बूंदें मिलाई जाती हैं।
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महिला समूह पिछले एक पखवाड़े से होली के लिए विशेष तैयारियों में जुटा रहा। तैयार गुलाल की पैकिंग कर नई टिहरी, बौराड़ी, बीपुरम, कोटीकॉलोनी, चंबा, बादशाहीथौल, आगराखाल और नरेंद्रनगर समेत अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति की जा रही है। मांग पर संस्था की ओर से उपभोक्ताओं के पते पर भी रंग उपलब्ध कराया जा रहा हैं।
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संस्था के अध्यक्ष संजय बहुगुणा और आराधना लघु उद्योग की सुषमा बहुगुणा के नेतृत्व में समूह की महिलाओं ने पारंपरिक और प्राकृतिक विधि से रंग तैयार किए हैं। सुषमा बहुगुणा ने बताया कि बादशाहीथौल बंगाचली सहकारिता मेले में लगाए गए स्टॉल पर पिछले सात दिनों के भीतर लगभग दो कुंतल हर्बल रंगों की बिक्री हुई। संजय बहुगुणा ने बताया कि हर्बल गुलाल पूरी तरह सुरक्षित है और इसे बनाने में फूलों का बुरादा, सब्जियों का रस, अरारोट पाउडर और मुल्तानी मिट्टी का उपयोग किया जाता है। गेंदा, गुड़हल और गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीसा जाता है। फिर इसे अरारोट या कॉर्नफ्लोर के साथ मिलाकर छाना जाता है, जिससे मुलायम गुलाल तैयार होता है। चुकंदर से गहरा गुलाबी, पालक से हरा और गाजर से नारंगी रंग बनाया जाता है। खुशबू के लिए नींबू और चंदन तेल की कुछ बूंदें मिलाई जाती हैं।