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Tehri News: बंजर भूमि पर ग्राम प्रधान और महिलाओं ने तैयार की नर्सरी
Wed, 05 Aug 2026 07:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Wed, 05 Aug 2026 07:04 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। भिलंगना ब्लॉक के मल्ड गांव की बंजर पड़ी भूमि महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखा रही है। ग्राम प्रधान राकेश भट्ट ने रीप परियोजना और आकाश स्वयं सहायता समूह के सहयोग से डांगी तोक में नीलचामेश्वर नर्सरी स्थापित की है। यहां फूल, फलदार और सजावटी पौधों की 200 से अधिक प्रजातियां तैयार की जा रही है। नर्सरी में गांव की 12 महिलाओं को स्वरोजगार मिल रहा है। क्षेत्र के लोगों को अब फूल और पौधों के लिए ऋषिकेश, देहरादून नहीं जाना पड़ रहा।
ग्राम प्रधान राकेश भट्ट ने बताया कि एक वर्ष पहले गांव की आठ नाली बंजर भूमि पर नर्सरी शुरू की गई। इसके लिए रीप परियोजना से छह लाख, बैंक से तीन लाख का ऋण व आकाश स्वयं सहायता समूह से एक लाख का सहयोग मिला। नर्सरी में मौसम के अनुसार फूलों के अलावा फलदार और घरों की सजावट में उपयोग होने वाले पौधे तैयार किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि नर्सरी में कार्यरत महिलाएं फूल तोड़ने, पौधों की निराई-गुड़ाई, बीजों की बुआई और पौध तैयार करने का काम करती हैं। घर और खेत के कामकाज के साथ यह अतिरिक्त रोजगार उन्हें हर महीने पांच से छह हजार की आय दे रहा है। वहीं नर्सरी से उन्हें स्वयं प्रतिमाह करीब 40 से 50 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
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रीप परियोजना के अधिकारी विजयराम डोभाल ने कहा कि ग्राम प्रधान की पहल से गांव की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। साथ ही क्षेत्र के लोगों को फूल, फलदार और सजावटी पौधों के लिए बाहर के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।
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ग्राम प्रधान राकेश भट्ट ने बताया कि एक वर्ष पहले गांव की आठ नाली बंजर भूमि पर नर्सरी शुरू की गई। इसके लिए रीप परियोजना से छह लाख, बैंक से तीन लाख का ऋण व आकाश स्वयं सहायता समूह से एक लाख का सहयोग मिला। नर्सरी में मौसम के अनुसार फूलों के अलावा फलदार और घरों की सजावट में उपयोग होने वाले पौधे तैयार किए जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि नर्सरी में कार्यरत महिलाएं फूल तोड़ने, पौधों की निराई-गुड़ाई, बीजों की बुआई और पौध तैयार करने का काम करती हैं। घर और खेत के कामकाज के साथ यह अतिरिक्त रोजगार उन्हें हर महीने पांच से छह हजार की आय दे रहा है। वहीं नर्सरी से उन्हें स्वयं प्रतिमाह करीब 40 से 50 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
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रीप परियोजना के अधिकारी विजयराम डोभाल ने कहा कि ग्राम प्रधान की पहल से गांव की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। साथ ही क्षेत्र के लोगों को फूल, फलदार और सजावटी पौधों के लिए बाहर के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।