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Udham Singh Nagar News: लेफ्ट हैंडर विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बनाई खास कुर्सी
Wed, 19 Aug 2026 12:08 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 19 Aug 2026 12:08 AM IST
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पेटेंट के साथ व्योम केसरवानी और विवि के अधिकारी
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पंतनगर। विवि परिसर स्थित कैंपस स्कूल के कक्षा छह के छात्र व्योम केसरवानी ने एक विशेष कुर्सी डिजाइन की है। इस कुर्सी को बाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों की सुविधा के लिए तैयार किया गया है। व्योम को अपने इस अभिनव डिजाइन के लिए भारत सरकार से डिजाइन पेटेंट भी हासिल हो गया है।
आजकल अधिकांश विद्यालयों और महाविद्यालयों में उपलब्ध कुर्सियां मुख्य रूप से दाहिने हाथ से लिखने वाले छात्रों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। इससे बाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों को बैठने और लिखने में असुविधा होती है। व्योम ने अपने परिवार में इस समस्या को करीब से देखा, क्योंकि उनके पिता भी बाएं हाथ से लिखते हैं। इसी समस्या से प्रेरित होकर व्योम ने ऐसी कुर्सी बनाने का विचार किया। यह कुर्सी बाएं और दाएं दोनों हाथों से लिखने वाले विद्यार्थियों के लिए सुविधाजनक होगी। उनका यह विचार एक अभिनव डिजाइन के रूप में विकसित हुआ। स्वतंत्रता दिवस पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव दीपा विनय, कैंपस स्कूल समिति के अध्यक्ष राजेश मिश्रा और प्रधानाचार्य प्रियंका भट्ट ने व्योम को सम्मानित किया। उन्होंने व्योम के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। संवाद
-इंसेट
पिता ने नवाचार को व्यावहारिक रूप देने में निभाई भूमिका
पंतनगर। व्योम के पिता डॉ. अमित केसरवानी ने इस नवाचार को व्यावहारिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने व्योम की डिजाइन को अंतिम रूप देने और पेटेंट प्रक्रिया को समझाने सहित उसे पूरा करने में मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया। डॉ. केसरवानी स्वयं भी नवाचार और अनुसंधान क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनके नाम तीन पेटेंट दर्ज हैं। डॉ. केसरवानी अब इस पेटेंट डिजाइन का प्रोटोटाइप विकसित कर व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने विद्यालय और जिला प्रशासन से इस नवाचार को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित और विकसित करने में सहयोग की अपेक्षा जताई है। संवाद
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आजकल अधिकांश विद्यालयों और महाविद्यालयों में उपलब्ध कुर्सियां मुख्य रूप से दाहिने हाथ से लिखने वाले छात्रों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। इससे बाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों को बैठने और लिखने में असुविधा होती है। व्योम ने अपने परिवार में इस समस्या को करीब से देखा, क्योंकि उनके पिता भी बाएं हाथ से लिखते हैं। इसी समस्या से प्रेरित होकर व्योम ने ऐसी कुर्सी बनाने का विचार किया। यह कुर्सी बाएं और दाएं दोनों हाथों से लिखने वाले विद्यार्थियों के लिए सुविधाजनक होगी। उनका यह विचार एक अभिनव डिजाइन के रूप में विकसित हुआ। स्वतंत्रता दिवस पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव दीपा विनय, कैंपस स्कूल समिति के अध्यक्ष राजेश मिश्रा और प्रधानाचार्य प्रियंका भट्ट ने व्योम को सम्मानित किया। उन्होंने व्योम के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। संवाद
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पिता ने नवाचार को व्यावहारिक रूप देने में निभाई भूमिका
पंतनगर। व्योम के पिता डॉ. अमित केसरवानी ने इस नवाचार को व्यावहारिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने व्योम की डिजाइन को अंतिम रूप देने और पेटेंट प्रक्रिया को समझाने सहित उसे पूरा करने में मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया। डॉ. केसरवानी स्वयं भी नवाचार और अनुसंधान क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनके नाम तीन पेटेंट दर्ज हैं। डॉ. केसरवानी अब इस पेटेंट डिजाइन का प्रोटोटाइप विकसित कर व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने विद्यालय और जिला प्रशासन से इस नवाचार को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित और विकसित करने में सहयोग की अपेक्षा जताई है। संवाद
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