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Udham Singh Nagar News: फिजिशियन की राह ताक रहा रुद्रपुर
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रुद्रपुर। लोगों के इलाज की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला अस्पताल और ईएसआईसी अस्पताल दोनों में ही फिजिशियन तैनात नहीं हैं। नतीजा ये है कि बुखार, शुगर, बीपी और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है या फिर महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में रोजाना ओपीडी में 800 से 1000 मरीज आते हैं। इनमें से आधे से ज्यादा मरीज बुखार, पेट दर्द, सांस और शुगर से संबंधित होते हैं लेकिन यहां फिजिशियन का पद खाली पड़ा है। इमरजेंसी में भी फिजिशियन की ड्यूटी नहीं लग पा रही है। गंभीर मरीजों को हल्द्वानी या बरेली रेफर किया जा रहा है। वहीं ईएसआईसी अस्पताल में भी यही हाल है। यहां जिले के हजारों श्रमिक और उनके परिजन इलाज कराने आते हैं। अस्पताल में 100 बेड हैं लेकिन फिजिशियन नहीं होने से भर्ती मरीजों को भी दिक्कत हो रही है। ईएसआईसी के डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी क्षमता से ज्यादा मरीज देख रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने से इलाज अधूरा रह जा रहा है।
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वर्जन:
फिजिशियन के तबादले के बाद नई तैनाती नहीं हो सकी है। इस संबंध में शासन स्तर पर वार्ता हुई है। जिले को जल्द फिजिशियन मिलने की उम्मीद है। -डॉ. ऊषा जंगपांगी, प्रभारी सीएमओ।
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जिला अस्पताल में रोजाना ओपीडी में 800 से 1000 मरीज आते हैं। इनमें से आधे से ज्यादा मरीज बुखार, पेट दर्द, सांस और शुगर से संबंधित होते हैं लेकिन यहां फिजिशियन का पद खाली पड़ा है। इमरजेंसी में भी फिजिशियन की ड्यूटी नहीं लग पा रही है। गंभीर मरीजों को हल्द्वानी या बरेली रेफर किया जा रहा है। वहीं ईएसआईसी अस्पताल में भी यही हाल है। यहां जिले के हजारों श्रमिक और उनके परिजन इलाज कराने आते हैं। अस्पताल में 100 बेड हैं लेकिन फिजिशियन नहीं होने से भर्ती मरीजों को भी दिक्कत हो रही है। ईएसआईसी के डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी क्षमता से ज्यादा मरीज देख रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने से इलाज अधूरा रह जा रहा है।
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वर्जन:
फिजिशियन के तबादले के बाद नई तैनाती नहीं हो सकी है। इस संबंध में शासन स्तर पर वार्ता हुई है। जिले को जल्द फिजिशियन मिलने की उम्मीद है। -डॉ. ऊषा जंगपांगी, प्रभारी सीएमओ।
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