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Udham Singh Nagar News: प्रारंभिक शिक्षा में 332 शिक्षकों की भारी कमी, बच्चों के भविष्य पर संकट
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रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले में प्रारंभिक शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों की भारी कमी है। वर्तमान में प्राइमरी स्कूलों में 2190 स्वीकृत पद हैं। इन पदों के सापेक्ष केवल 1858 शिक्षक ही तैनात हैं। प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए 332 शिक्षकों की तत्काल आवश्यकता है।
प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की यह कमी बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाल रही है। वहीं पर्याप्त शिक्षक न होने से शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में यह समस्या और भी गंभीर है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं को पढ़ाना पड़ रहा है। इससे शिक्षकों पर कार्यभार बढ़ रहा है और वे सभी बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
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शिक्षकों की कमी का प्रभाव
शिक्षकों की कमी से छात्रों के सीखने की प्रक्रिया धीमी हो रही है। विशेषकर प्राथमिक स्तर पर बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान देने की आवश्यकता होती है। पर्याप्त शिक्षक न होने से पाठ्यक्रम पूरा करने में भी कठिनाई आती है। इससे छात्रों की नींव कमजोर रह जाती है, जिसका असर आगे की पढ़ाई पर पड़ता है।
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अभिभावकों की बात
प्रारंभिक शिक्षा बच्चों की नींव होती है। इन स्कूलों में शिक्षक नहीं होंगे तो नींव कैसे मजबूत होगी। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - गीता देवी, जगतपुरा, रुद्रपुर।
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गरीब अभिभावक अपने बच्चों को महंगे काॅन्वेंट स्कूलों में नहीं पढ़ा पाते हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का न होना चिंता का विषय है। इससे कहीं न कहीं पढ़ाई प्रभावित होगी।
- रूपेश सिंह, आदर्श कॉलोनी, रुद्रपुर।
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सीईओ का पक्ष
प्रारंभिक स्कूलों में रिक्त पदों को भरने की कवायद शासन स्तर पर चल रही है। हालांकि रिक्त पदों से पठन-पाठन पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पढ़ाई कराई जाती है। -हरेंद्र कुमार मिश्रा, प्रभारी सीईओ।
प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की यह कमी बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाल रही है। वहीं पर्याप्त शिक्षक न होने से शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में यह समस्या और भी गंभीर है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं को पढ़ाना पड़ रहा है। इससे शिक्षकों पर कार्यभार बढ़ रहा है और वे सभी बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
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शिक्षकों की कमी का प्रभाव
शिक्षकों की कमी से छात्रों के सीखने की प्रक्रिया धीमी हो रही है। विशेषकर प्राथमिक स्तर पर बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान देने की आवश्यकता होती है। पर्याप्त शिक्षक न होने से पाठ्यक्रम पूरा करने में भी कठिनाई आती है। इससे छात्रों की नींव कमजोर रह जाती है, जिसका असर आगे की पढ़ाई पर पड़ता है।
अभिभावकों की बात
प्रारंभिक शिक्षा बच्चों की नींव होती है। इन स्कूलों में शिक्षक नहीं होंगे तो नींव कैसे मजबूत होगी। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - गीता देवी, जगतपुरा, रुद्रपुर।
गरीब अभिभावक अपने बच्चों को महंगे काॅन्वेंट स्कूलों में नहीं पढ़ा पाते हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का न होना चिंता का विषय है। इससे कहीं न कहीं पढ़ाई प्रभावित होगी।
- रूपेश सिंह, आदर्श कॉलोनी, रुद्रपुर।
सीईओ का पक्ष
प्रारंभिक स्कूलों में रिक्त पदों को भरने की कवायद शासन स्तर पर चल रही है। हालांकि रिक्त पदों से पठन-पाठन पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पढ़ाई कराई जाती है। -हरेंद्र कुमार मिश्रा, प्रभारी सीईओ।