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Udham Singh Nagar News: सीईटीपी के निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार, अपशिष्ट जल का होगा समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 26 Jan 2026 12:54 AM IST
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रुद्रपुर। सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से औद्योगिक इकाइयों को जोड़ने के काम ने रफ्तार पकड़ ली है। परियोजना लंबे समय से निर्माणाधीन है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर पर्यावरण प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
सिडकुल क्षेत्र में कुल 10.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर फैक्टरियों को सीईटीपी से जोड़ा जाना है। करीब 8.5 किलोमीटर लंबाई तक का कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष हिस्से में निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
प्रबंधन का लक्ष्य है कि मानसून सत्र से पूर्व शेष कार्य भी पूर्ण कर लिया जाए ताकि वर्षा के दौरान औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नालों या जलस्रोतों में न जाए। सीईटीपी के पूर्ण संचालन में आने से सिडकुल क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत मिलेगी।
इसके माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार तय मानकों के अनुसार किया जाएगा, जिससे न केवल आसपास के जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे, बल्कि क्षेत्र में प्रदूषण की शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से औद्योगिक अपशिष्ट जल को लेकर चिंता जताई जा रही थी। कई स्थानों पर नालों और जलधाराओं में दूषित पानी जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
सीईटीपी से जुड़ाव पूरा होने के बाद ऐसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो सकेगा। परियोजना की प्रगति को लेकर सिडकुल प्रशासन नियमित निगरानी कर रहा है। निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और तय समय सीमा में कार्य पूर्ण किया जाए। अधिकारियों कहते हैं कि सीईटीपी परियोजना के पूर्ण होने से सिडकुल क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक सुरक्षित और टिकाऊ औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित होगा।
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सीईटीपी से औद्योगिक इकाइयों को जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। कुल 10.5 किलोमीटर में से लगभग 8.5 किलोमीटर पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य को मानसून सत्र से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अपशिष्ट जल के निस्तारण में काफी सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। -मनीष बिष्ट, क्षेत्रीय प्रबंधक, सिडकुल
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सिडकुल क्षेत्र में कुल 10.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर फैक्टरियों को सीईटीपी से जोड़ा जाना है। करीब 8.5 किलोमीटर लंबाई तक का कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष हिस्से में निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
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प्रबंधन का लक्ष्य है कि मानसून सत्र से पूर्व शेष कार्य भी पूर्ण कर लिया जाए ताकि वर्षा के दौरान औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नालों या जलस्रोतों में न जाए। सीईटीपी के पूर्ण संचालन में आने से सिडकुल क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत मिलेगी।
इसके माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार तय मानकों के अनुसार किया जाएगा, जिससे न केवल आसपास के जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे, बल्कि क्षेत्र में प्रदूषण की शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से औद्योगिक अपशिष्ट जल को लेकर चिंता जताई जा रही थी। कई स्थानों पर नालों और जलधाराओं में दूषित पानी जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
सीईटीपी से जुड़ाव पूरा होने के बाद ऐसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो सकेगा। परियोजना की प्रगति को लेकर सिडकुल प्रशासन नियमित निगरानी कर रहा है। निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और तय समय सीमा में कार्य पूर्ण किया जाए। अधिकारियों कहते हैं कि सीईटीपी परियोजना के पूर्ण होने से सिडकुल क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक सुरक्षित और टिकाऊ औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित होगा।
सीईटीपी से औद्योगिक इकाइयों को जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। कुल 10.5 किलोमीटर में से लगभग 8.5 किलोमीटर पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य को मानसून सत्र से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अपशिष्ट जल के निस्तारण में काफी सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। -मनीष बिष्ट, क्षेत्रीय प्रबंधक, सिडकुल

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