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कैबिनेट चेहरे: तराई की सियासी जमीन रह गई सूखी, पांडेय, चीमा और अरोरा की नहीं चमकी किस्मत
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: गायत्री जोशी
Updated Fri, 20 Mar 2026 01:11 PM IST
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सार
उत्तराखंड में हुए कैबिनेट विस्तार में तराई क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है। पांच नए मंत्रियों के नामों की घोषणा में तराई से तीन में से किसी भी विधायक को कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी।
तराई के तीनों विधायक क्रमश: काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा और गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय।
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विस्तार
कैबिनेट विस्तार में तराई की राजनीतिक उम्मीदों को झटका लगा है। पांच नए मंत्रियों के नामों की घोषणा के बावजूद तराई क्षेत्र से किसी भी नए विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। पहले से शामिल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सौरभ बहुगुणा के अलावा इस बार तराई की सियासी जमीन सूखी रह गई।
नौ सीटों वाले जिले में भाजपा के चार विधायक
ऊधम सिंह नगर कुमाऊं में सबसे अधिक नौ विधानसभा सीटों वाला जिला है। जहां भाजपा के चार विधायक हैं। इनमें रुद्रपुर से शिव अरोरा, सितारगंज से सौरभ बहुगुणा, गदरपुर से अरविंद पांडेय और काशीपुर से त्रिलोक सिंह चीमा शामिल हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास गृह, वित्त, राजस्व, कार्मिक, सतर्कता, सूचना, नीति एवं योजना, औद्योगिक विकास, श्रम, ऊर्जा, पेयजल, पर्यावरण, नागरिक उड्डयन, और आपदा प्रबंधन सहित 23 से अधिक विभाग हैं। सौरभ बहुगुणा पशुपालन, मत्स्य पालन, कौशल विकास और रोजगार, प्रोटोकॉल और गन्ना विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री हैं। उम्मीद की जा रही थी कि इस विस्तार में तराई से किसी अन्य विधायक को भी मंत्री पद से नवाजा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सियासी टकराव बना पांडेय के मंत्रीमंडल में जगह न पाने की वजह
गदरपुर के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडेय के मंत्रिमंडल में शामिल न होने के पीछे कई राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं। हाल ही में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में उनके खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई को एक प्रमुख वजह के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटना के बाद पांडेय ने अपनी ही सरकार को घेरने का प्रयास किया था, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी देखी गई। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनसे मिलने के लिए गूलरभोज का दौरा भी किया था। इसके बाद, पांडेय ने देहरादून से लेकर दिल्ली तक अपनी पैरवी की। उनके समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और मदन कौशिक के यहां पहुंचने के कार्यक्रम भी तय हुए थे, लेकिन अंतिम क्षणों में इन कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया। यह घटनाक्रम पांडेय के मंत्रीमंडल में जगह न पाने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
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नौ सीटों वाले जिले में भाजपा के चार विधायक
ऊधम सिंह नगर कुमाऊं में सबसे अधिक नौ विधानसभा सीटों वाला जिला है। जहां भाजपा के चार विधायक हैं। इनमें रुद्रपुर से शिव अरोरा, सितारगंज से सौरभ बहुगुणा, गदरपुर से अरविंद पांडेय और काशीपुर से त्रिलोक सिंह चीमा शामिल हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास गृह, वित्त, राजस्व, कार्मिक, सतर्कता, सूचना, नीति एवं योजना, औद्योगिक विकास, श्रम, ऊर्जा, पेयजल, पर्यावरण, नागरिक उड्डयन, और आपदा प्रबंधन सहित 23 से अधिक विभाग हैं। सौरभ बहुगुणा पशुपालन, मत्स्य पालन, कौशल विकास और रोजगार, प्रोटोकॉल और गन्ना विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री हैं। उम्मीद की जा रही थी कि इस विस्तार में तराई से किसी अन्य विधायक को भी मंत्री पद से नवाजा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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सियासी टकराव बना पांडेय के मंत्रीमंडल में जगह न पाने की वजह
गदरपुर के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडेय के मंत्रिमंडल में शामिल न होने के पीछे कई राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं। हाल ही में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में उनके खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई को एक प्रमुख वजह के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटना के बाद पांडेय ने अपनी ही सरकार को घेरने का प्रयास किया था, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी देखी गई। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनसे मिलने के लिए गूलरभोज का दौरा भी किया था। इसके बाद, पांडेय ने देहरादून से लेकर दिल्ली तक अपनी पैरवी की। उनके समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और मदन कौशिक के यहां पहुंचने के कार्यक्रम भी तय हुए थे, लेकिन अंतिम क्षणों में इन कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया। यह घटनाक्रम पांडेय के मंत्रीमंडल में जगह न पाने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।