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Udham Singh Nagar News: गोविषाण टीले की खुदाई में दस फीट गहराई से मिले निर्माण अवशेष

Sun, 09 Aug 2026 12:39 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Sun, 09 Aug 2026 12:39 AM IST
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Structural remains found at a depth of ten feet during the excavation of the Govishan mound.
काशीपुर स्थित गोविषाण टीला में उत्खनन में निकला निर्माण अवशेष। स्रोत : जागरूक पाठक
काशीपुर। ऐतिहासिक गोविषाण टीले में करीब 22 साल बाद शुरू कराया गया उत्खनन मानसून की बारिश के चलते रोक दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) देहरादून की टीम को अब तक करीब दस फीट की गहराई में कुछ निर्माण अवशेष मिले हैं। मौसम साफ होने के बाद सितंबर के मध्य से खुदाई का काम दोबारा शुरू कराया जाएगा।
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बाजपुर रोड स्थित गोविषाण टीला अपने भीतर कई कालखंडों की सभ्यता, संस्कृति और मानव विकास के प्रमाण समेटे हुए है। समय-समय पर यहां हुई खुदाई में महाभारत काल से लेकर बौद्ध काल तक के अवशेष मिलने का दावा किया गया है। करीब 22 साल के अंतराल के बाद एएसआई देहरादून ने 16 जुलाई से यहां फिर उत्खनन शुरू कराया था। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने गोविषाण टीला पहुंचकर विधिवत उत्खनन कार्य का शुभारंभ किया था।
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पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक किए गए उत्खनन वाले हिस्से को मजबूत तिरपाल और पन्नी से ढककर सुरक्षित कर दिया गया है ताकि बारिश से अवशेषों को नुकसान न पहुंचे। मौसम सामान्य होने और बारिश थमने के बाद सितंबर के मध्य से उत्खनन कार्य फिर शुरू कराया जाएगा।
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इसलिए खास...
गोविषाण टीला उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में काशीपुर शहर के पास स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल है। राजा हर्षवर्धन के काल में इस प्राचीन स्थान को ''गोविषाण'' कहा जाता था। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सातवीं शताब्दी में अपने यात्रा वृत्तांत में इस बौद्ध और सांस्कृतिक केंद्र का उल्लेख किया था। यहां हुई पिछली खुदाइयों में लेट वैदिक काल, कुषाण काल, गुप्तकालीन किले के अवशेष, प्राचीन सिक्के, मूर्तियां और मिट्टी के बर्तन प्राप्त हुए हैं।

16 जुलाई से चार अगस्त तक उत्खनन कराया गया। इस दौरान मानसून की बारिश के कारण खुदाई के काम में बाधा आने लगी जिसके चलते फिलहाल कार्य रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि उत्खनन के दौरान करीब दस फीट की गहराई में कुछ निर्माण अवशेष मिले हैं। -दिनेश शर्मा, संरक्षक सहायक, पुरातत्व विभाग
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