{"_id":"69f79eddaf92592ad80e6174","slug":"the-post-of-forensic-expert-is-vacant-in-the-district-hospital-for-two-decades-rudrapur-news-c-242-1-rdp1022-140918-2026-05-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: जिला अस्पताल में दो दशक से फोरेंसिक विशेषज्ञ का पद रिक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: जिला अस्पताल में दो दशक से फोरेंसिक विशेषज्ञ का पद रिक्त
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 04 May 2026 12:45 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्रपुर। जिला अस्पताल में चिकित्सा और कानून के बीच की कड़ी को जोड़ने वाला फोरेंसिक विशेषज्ञ का पद करीब दो दशक से रिक्त है। फोरेंसिक विशेषज्ञ न होने से विशेष मामलों में अन्य अस्पताल से मदद लेनी पड़ती है।
फोरेंसिक विशेषज्ञ (जिन्हें फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट या मेडिको-लीगल एक्सपर्ट भी कहा जाता है) मुख्य रूप से संदिग्ध के साथ ही अचानक या हिंसक मामलों में हुई मौत की जांच करते हैं। संदिग्ध, हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना या अज्ञात कारणों से हुई मौत के मामले में शव का परीक्षण (पोस्टमार्टम) करते हैं ताकि मौत का सटीक कारण और तरीका पता चल सके।
फोरेंसिक विशेषज्ञ अस्पताल में आने वाले चोट के मामलों जैसे कि मारपीट, यौन शोषण, जहरखुरानी या दुर्घटनाओं का मूल्यांकन करते हैं। वह जीवित या मृत व्यक्ति से सबूत (जैसे- डीएनए, बाल, त्वचा के नमूने, गोली के अंश) एकत्र करते हैं। जो पुलिस जांच और अदालत में काम आते हैं।
फोरेंसिक विशेषज्ञ अपने निष्कर्षों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं और कानूनी मामलों में विशेषज्ञ गवाह के रूप में अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। वहीं अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञ न होने से संदिग्ध मौतों का पता लगाने के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी की शरण लेनी पड़ती है।
-- --
-कोट:
जिला अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञ न होने का मामला स्वास्थ्य महानिदेशालय के संज्ञान में है। विशेषज्ञ की तैनाती के लिए लगातार महानिदेशालय से पत्राचार किया जाता है।
-डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, यूएस नगर
Trending Videos
फोरेंसिक विशेषज्ञ (जिन्हें फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट या मेडिको-लीगल एक्सपर्ट भी कहा जाता है) मुख्य रूप से संदिग्ध के साथ ही अचानक या हिंसक मामलों में हुई मौत की जांच करते हैं। संदिग्ध, हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना या अज्ञात कारणों से हुई मौत के मामले में शव का परीक्षण (पोस्टमार्टम) करते हैं ताकि मौत का सटीक कारण और तरीका पता चल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
फोरेंसिक विशेषज्ञ अस्पताल में आने वाले चोट के मामलों जैसे कि मारपीट, यौन शोषण, जहरखुरानी या दुर्घटनाओं का मूल्यांकन करते हैं। वह जीवित या मृत व्यक्ति से सबूत (जैसे- डीएनए, बाल, त्वचा के नमूने, गोली के अंश) एकत्र करते हैं। जो पुलिस जांच और अदालत में काम आते हैं।
फोरेंसिक विशेषज्ञ अपने निष्कर्षों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं और कानूनी मामलों में विशेषज्ञ गवाह के रूप में अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। वहीं अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञ न होने से संदिग्ध मौतों का पता लगाने के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी की शरण लेनी पड़ती है।
-कोट:
जिला अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञ न होने का मामला स्वास्थ्य महानिदेशालय के संज्ञान में है। विशेषज्ञ की तैनाती के लिए लगातार महानिदेशालय से पत्राचार किया जाता है।
-डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, यूएस नगर
